बारिश से मौसम हुआ खुशनुमा, किसानों के चेहरे पर लौटी रौनक

Updated at : 02 Jul 2024 9:51 PM (IST)
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बारिश से मौसम हुआ खुशनुमा, किसानों के चेहरे पर लौटी रौनक

मंगलवार को भी जिले में हुई बारिश से मौसम सुहााना बना रहा. दिनभर आकाश में बादल छाये रहे. 20 से 30 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति से नमीयुक्त हवा से लोगों ने काफी राहत महसूस किया.

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बेगूसराय. मंगलवार को भी जिले में हुई बारिश से मौसम सुहााना बना रहा. दिनभर आकाश में बादल छाये रहे. 20 से 30 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति से नमीयुक्त हवा से लोगों ने काफी राहत महसूस किया.शहर से लेकर गांव तक लोगों में वर्षा के कारण खुशी छाई हुई है.ग्रामीण क्षेत्रों में खरीफ की विभिन्न फसलों की रोपनी शुरु हो गयी है. दिन भर किसानों खेतों में जुटे रहे.वहीं शहर के कई मोहल्लों में वर्षा के कारण दिनभर किच किच बनी रही.सीवरेज व नल-जल योजना के कारण शहर की अधिकांश सड़क पाइप बिछाने को लेकर तोड़े जाने के कारण समतल नहीं रही सकी.सड़क की मरम्मती तो कर दी गयी.परंतु सड़क पर इधर-उधर उबड़-खाबड़ तथा घुच्चियां बन गयी है.बारिश छूट जाने के बाद भी सड़क समतल नहीं होने के कारण काफी किचकिच बनी रहती है.वर्षा के कारण शहर में परेशानी बढ़ गयी.तो वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में अच्छे बारिश के साथ माॅनसून आने से खुशी का माहौल है.मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इस बार ला-नीना का प्रभाव से अच्छी वर्षा की संभावना जताई जा रही है.मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि समय से पहले और देर से प्रदेश में मानसून का प्रवेश होने से वर्षा में कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ता है. जून से सितंबर के बीच किसी माह में औसत से अधिक वर्षा होती है.प्रर्याप्त वर्षा को लेकर बंगाल की खाड़ी दबाव का होना, हवा का प्रभाव, ट्रफ एरिया का विकसित होना समेत अन्य भौगोलिक कारक होते हैं. इन चीजों में कमी आने पर वर्षा के अनुपात में कमी आती है.दूसरी ओर माॅनसून प्रवेश को लेकर आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा भी तैयारियां जारी है.बरसात के मौसम में हर साल ब्रजपात से दर्जनों लोगों की जान चली जाती है.आपदा विभाग ने ब्रजपात यानि ठनका से बचाव को लेकर कई निर्देश भी जारी किया है. वर्षा के दौरान ब्रजपात होना एक समान्य प्राकृतिक घटना होती है.अक्सर लोगों को इसके चपेट में आ जाने की गुंजाइश बनी रहती है.ब्रजपात से बचाव को लेकर कुछ साबधानियां बरतने से जोखिम को कम किया जा सकता है.बर्षा के दौरान घरों की खिड़कियां, दरवाजे बंद रखना अच्छा होता है. दरवाजे और मेटल की चीजों के पास खड़े ना होना होना चाहिए,अगर किसी पानी वाली जगह हैं तो तुरंत बाहर निकलने की कोशिश करें. पानी में छोटी नाव, स्विमिंग पूल, झील, नदी या जल के किसी भी अन्य स्रोत में नाव आदि पर सवार हैं तो तुरंत वहां से निकल जाना चाहिए,बच्चों को बिजली के किसी भी उपकरण से दूर रखना चाहिए.मोबाइल चार्ज या किसी अन्य उपकरण को प्लग करने के साथ उसका इस्तेमाल बिल्कुल न करें. ज्यादा देर तक बिजली कड़कती है तो स्थानीय राहत और बचाव एजेंसी से संपर्क साध सकते हैं. अगर बिजली चली भी जाए तो भी इलेक्ट्रिक उपकरणों या स्विच को बार-बार न छुएं. बिजली के खंभों और टॉवरों से दूरी बरतना चाहिए.वाहनों से निकल कर तुरंत सुरक्षित स्थानों पर चले जाना सुरक्षित है. जिले में माॅनसून का प्रवेश 20 दिन विलंब से हुई.जिसके कारण खरीफ फसल की बुआई-रोपनी गति नहीं पकड़ा था.जैसे ही बारिश शुरू हुई है.कृषि कार्य में हलचल तेज हो गयी है.खरीफ फसल की बुआई-रोपनी शुरू कर दी गयी है.पूरे जिले में 92061 हेक्टेयर में खरीफ फसल की खेती का लक्ष्य निर्धारित किया गया है.जिले में सबसे अधिक 48640 हेक्टेयर में मकई की खेती का लक्ष्य है,धान 10658 हेक्टेयर, सोयाबीन 9629 हेक्टेयर,अरहर 1134,उड़द 316,मूंग 229 हेक्टेयर तो वहीं अन्य दलहन भी 392 हेक्टेयर में खेती का लक्ष्य है.इसके अलावा ज्वार,कुल्थी,तिल की भी खेती की जाती है. ढैंचा की भी खेती 5256 हैक्टेयर,मरुआ 813 हेक्टेयर,चीना 573 हेक्टेयर में खेती का लक्ष्य रखा गया है.कृषि विभाग द्वारा विशेष प्रयास से अन्य मोटे अनाज की भी खेती का लक्ष्य निर्धारित की गयी है.

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