Begusarai News: बीहट में सिंगल यूज प्लास्टिक पर रोक बेअसर, नगर परिषद की उदासीनता से बढ़ा पर्यावरण संकट

Published by : Nikhil Anurag Updated At : 25 May 2026 3:28 PM

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बीहट नगर परिषद क्षेत्र में सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग प्रतिबंध के बावजूद धड़ल्ले से जारी है. रोजाना 10 टन से अधिक प्लास्टिक कचरा पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए खतरा बन रहा है. स्थानीय लोगों ने नगर परिषद की उदासीनता पर सवाल उठाते हुए जूट और कपड़े के थैलों को बढ़ावा देने की मांग की.

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Begusarai News: (बिपिन राज की रिपोर्ट) शहर में सिंगल यूज प्लास्टिक के बढ़ते इस्तेमाल और उससे पैदा हो रहे कचरे ने पर्यावरणीय संकट का रूप ले लिया है. बावजूद इसके, नगर परिषद बीहट इस समस्या को रोकने के लिए कोई ठोस पहल करती नजर नहीं आ रही है. स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले कचरा सिर्फ दिन में दिखाई देता था, लेकिन अब दुधिया रोशनी में रात में भी प्लास्टिक कचरे का अंबार साफ नजर आता है.

जानकारी के अनुसार बीहट नगर परिषद क्षेत्र में प्रतिदिन औसतन 10 टन से अधिक प्लास्टिक कचरा उत्पन्न हो रहा है. यह कचरा नालियों, खुले स्थानों और लैंडफिल साइटों पर जमा होकर जलजमाव, गंदगी और बीमारियों का कारण बन रहा है. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के मुताबिक बिहार में हर साल हजारों टन प्लास्टिक कचरा पैदा हो रहा है, जो नदियों, जमीन और जीव-जंतुओं के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है.

प्रतिबंध के बावजूद धड़ल्ले से हो रहा उपयोग

बिहार सरकार ने 1 जुलाई 2022 से सिंगल यूज प्लास्टिक और थर्मोकोल उत्पादों के उत्पादन, भंडारण, बिक्री और उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लागू किया था. इससे पहले वर्ष 2018 में पॉलिथीन बैग पर भी रोक लगाई गई थी. इसके बावजूद बाजारों में प्रतिबंधित पॉलिथीन और डिस्पोजेबल सामग्री का खुलेआम इस्तेमाल जारी है.

विशेषज्ञों के अनुसार प्लास्टिक दशकों तक नष्ट नहीं होती। पशु इसे चारे के साथ निगल लेते हैं, जिससे उनकी मौत तक हो जाती है. वहीं प्लास्टिक जलाने से निकलने वाली जहरीली गैसें कैंसर, सांस और त्वचा रोगों का कारण बनती हैं. नदियों और तालाबों में पहुंचने पर यह जलनिकासी बाधित कर जलजमाव की समस्या पैदा करती है, जबकि खेतों में पहुंचकर मिट्टी की उर्वरता को नुकसान पहुंचाती है.

हाट-बाजार और सिमरिया घाट में सबसे ज्यादा खपत

व्यापारियों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में पॉलिथीन की खपत शहरों से अधिक हो रही है. गांवों के हाट-बाजार, साप्ताहिक मेले और खुदरा दुकानों में प्रतिबंधित प्लास्टिक का जमकर उपयोग हो रहा है. बीहट बाजार, बारो बाजार, सिमरिया घाट, पिपरा हाट, मल्हीपुर-चकिया और जीरोमाइल समेत कई जगहों पर प्लास्टिक का इस्तेमाल खुलेआम जारी है.

जूट और कपड़े के थैले को बढ़ावा देने की जरूरत

वर्ष 2018 में नगर परिषद बीहट द्वारा दीन दयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से कपड़े के थैले और ठोंगे की बिक्री शुरू की गई थी. बीहट पोखर पर लगाए गए स्टॉल को लोगों का अच्छा समर्थन भी मिला था, लेकिन नगर परिषद की उदासीनता के कारण यह पहल बंद हो गई.

पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में काम करने वाली “साइकिल पे संडे” टीम के संयोजक डॉ. कुंदन कुमार, विनोद भारती, सुजीत कुमार, प्रशांत कुमार, कुमार गौतम, अंशु और गोविंद कुमार ने कहा कि बीहट जैसे बड़े बाजार में नॉन ओवन कैरी बैग और जूट बैग निर्माण की मशीनें लगाकर रोजगार के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं. इससे स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय महिलाओं को प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ा जा सकेगा तथा प्लास्टिक के उपयोग में कमी आएगी.

छापेमारी के बाद भी नहीं थमी बिक्री

प्रशासन द्वारा समय-समय पर छापेमारी और जुर्माने की कार्रवाई के बावजूद बाजारों में प्लास्टिक थैली का उपयोग जारी है. सब्जी विक्रेता और फुटकर दुकानदार अब भी ग्राहकों को पॉलिथीन में सामान दे रहे हैं. लोगों में प्लास्टिक प्रतिबंध कानून का डर लगभग खत्म हो चुका है.

क्या बोले जनप्रतिनिधि और अधिकारी

नगर परिषद की मुख्य पार्षद बबीता ने कहा कि सिंगल यूज प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध समय की मांग है. जल्द ही नगर परिषद में इस विषय पर विचार-विमर्श कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी. वहीं बरौनी बीडीओ अनुरंजन कुमार ने कहा कि सिंगल यूज प्लास्टिक लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए खतरनाक है. इसके खिलाफ सामूहिक अभियान चलाने की जरूरत है.

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