जल स्तर में कमी नहीं होने से बढ़ीं मुश्किलें
Updated at : 01 Oct 2019 8:20 AM (IST)
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बलिया : चार दिनों से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश का सोमवार को रुकने के बाद बाढ़पीड़ित परिवारों ने थोड़ी राहत की सांस ली, लेकिन गंगा के जल स्तर में कमी नहीं होने से बाढ़ पीड़ितों की मुश्किलें कम नहीं हो पा रही है. मूसलाधार बारिश के कारण बाढ़ पीड़ित परिवारों को प्रशासन से सूखा […]
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बलिया : चार दिनों से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश का सोमवार को रुकने के बाद बाढ़पीड़ित परिवारों ने थोड़ी राहत की सांस ली, लेकिन गंगा के जल स्तर में कमी नहीं होने से बाढ़ पीड़ितों की मुश्किलें कम नहीं हो पा रही है. मूसलाधार बारिश के कारण बाढ़ पीड़ित परिवारों को प्रशासन से सूखा राशन की आस है.
बावजूद स्थानीय प्रशासन द्वारा प्रखंड क्षेत्र के भवानंदपुर, पहाड़पुर, ताजपुर व परमानंदपुर व भगतपुर व फतेहपुर पंचायत के एक-एक वार्ड के बाढ़ पीड़ित 50 से अधिक की आबादी के बीच ना तो पॉलीथिन सीड्स का ही वितरण किया गया और ना ही सूखा राशन का. इस बीच करीब 14 दिनों से बाढ़ की विभीषिका झेल रहे प्रखंड क्षेत्र के हजारों लोगों को अब खाने के भी लाले पड़ने लगे हैं.
गांवों में अविस्थत आटा चक्की के आसपास पानी होने के कारण बाढ़ पूर्व बाढ़ पीड़ितों के द्वारा तैयार किये गये आटे अब खत्म होने लगे हैं. उस पर मौसम की बेरुखी के कारण चार दिनों से बाढ़ पीड़ितों का बलिया बाजार आना-जाना नहीं होने से उनके बीच खाने के सामान का भी किल्लत हो गया है. जल स्तर में कमी नहीं होने से दियारा क्षेत्र के गांवों से गुजर रही बाढ़ के पानी से गांव दरिया बन गया है. हर तरफ तेज धारा बह रही है.
इन तेज धाराओं के बीच बाढ़ पीड़ित परिवार रह रहे हैं. दूसरी ओर बाढ़ पीड़ित पशुपालक किसानों को भी अपने पशुओं का चारा जुटाना मुश्किल हो रहा है. 14 दिनों से दियारा क्षेत्र में आई बाढ़ के कारण क्षेत्र के ज्यादातर घरों में पानी घुस गया है, जिससे क्षेत्र के लोग अपने आस-पड़ोस के घरों में शरण लिए हुए हैं. साथ ही कुछ अपने रिश्तेदारों के यहां पलायन कर गये हैं, जिससे गांव में चोरी का डर बना रहता है.
चारों तरफ पानी के बीच रह रहे बाढ़ पीड़ित इन दिनों दहशत में जीने को विवश हैं. हर रात विभिन्न गांवों में कोई ना कोई चोरी की घटना घट ही जाती है.दियारा क्षेत्र में आयी बाढ़ को लेकर प्रशासनिक स्तर पर दियारा क्षेत्रवासियों के आवागमन व बाढ़ के पानी से निकालने के लिए बड़ी-छोटी 45 नावों का परिचालन कराया जा रहा है.
जिन नावों से प्रत्येक दिन हजारों बाढ़ पीड़ित परिवार अपने जरूरतों का सामान लेने बलिया बाजार आना-जाना कर रहे हैं. वहीं प्रत्येक दिन सैकड़ों बाढ़ पीड़ित परिवार व पशुओं के साथ पशुपालक किसानों का पलायन जारी है. पलायन करने वालों में ज्यादातर महिलाएं और बच्चे शामिल हैं.
दहशत में जीने को विवश हैं बाढ़ पीड़ित परिवार :14 दिनों से बाढ़ के पानी के बीच रह रहे बलिया प्रखंड क्षेत्र के भवानंदपुर, ताजपुर, पहाड़पुर व परमानंदपुर पंचायत के दर्जनों गांवों के लोग इन दिनों दहशत में जीने को मजबूर हैं.
बाढ़ का पानी दो पखवारे तक गांवों एवं घरों में रह जाने के कारण प्रत्येक दिन दियारा क्षेत्र के किसी न किसी गांव में चोरी की घटनाएं हो रही है. जिस डर से पानी के बीच विवस बाढ़ पीड़ित अपने घर को छोड़ अन्यत्र नहीं जा पा रहे हैं.
प्रशासन ने लगाया राहत कैंप :गुप्ता-लखमिनिया बांध के तुलसीटोल, नौरंगा एवं मीरअलीपुर घाट पर शरण लिये हुये सैकड़ों बाढ़ पीडि़तो के सोमवार से दो अन्य राहत कैंप प्रशासन के द्वारा खोला गया है. जिसमें प्रत्येक दिन सैकड़ों बाढ़ पीड़ितों को तीन वक्त का भोजन कराया जा रहा है. वहीं बांध पर शरण लिए हुए बाढ़ पीड़ितों के बीच रविवार को सीओ अमृतराज बंधु के नेतृत्व में प्रखंड प्रमुख कुंदन यादव के द्वारा दो सौ से अधिक पॉलिथीन सीड्स का भी वितरण किया गया है.
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