बूढ़ी गंडक नदी में जल स्तर का बढ़ना जारी
Updated at : 23 Jul 2019 6:55 AM (IST)
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खोदावंदपुर : बूढ़ी गंडक नदी में विगत एक पखवारे से जल स्तर में वृद्धि को लेकर नदी खतरे के निशान को पार कर गयी है तथा जल स्तर का लगातार बढ़ना जारी है. इस सप्ताह नदी में जल स्तर में पांच मीटर से अधिक वृद्धि के कारण पानी नदी के पेट से निकल कर बाएं […]
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खोदावंदपुर : बूढ़ी गंडक नदी में विगत एक पखवारे से जल स्तर में वृद्धि को लेकर नदी खतरे के निशान को पार कर गयी है तथा जल स्तर का लगातार बढ़ना जारी है. इस सप्ताह नदी में जल स्तर में पांच मीटर से अधिक वृद्धि के कारण पानी नदी के पेट से निकल कर बाएं और दाएं तटबंध से टकरा गयी है.
इस जलवृद्धि के कारण तटबंध और नदी के बीच के सैकड़ों एकड़ में लगी मक्का, ओल, अरहर, परबल, हलदी, केला, जनेर, अलुहा, नेनुआ, ककड़ी, लौकी, बतिया सहित अन्य फसल डूब गयी है.
ढाव में चारा डूब जाने के कारण किसान परेशान हैं. पशु चारा खाने के लिए लालायित रहते हैं. तटबंध की सुरक्षा के लिए सुबह शाम बाध किनारे पानी देखने के लिए लोगों की भीड़ जमा रहती है. व्यापक पैमाने पर इस फसलों के नुकसान से इलाके के किसान मर्माहत हैं.
प्रखंड क्षेत्र के मोहनपुर, बेगमपुर, नुरूल्लाहपुर, बाड़ा, तारा बरियारपुर, फफौत, मालपुर, मटिहानी तथा मेघौल के किसान जिनकी खेतीबाड़ी नदी के ढाव क्षेत्र में था. उनको व्यापक नुकसान हुआ है. वहीं दूसरी ओर स्थानीय लोगों ने सरकार एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग पर तटबंध की सुरक्षा व्यवस्था एवं गृहरक्षकों की अब तक तैनाती नहीं करने पर नाराजगी जतायी.
बांध के अंदर बसे दर्जनों परिवार हुए बेघर : बूढ़ी गंडक नदी जल स्तर बढ़ने के कारण बांध के अंदर बसे दर्जनों परिवार का घर पानी में डूब गया और वे लोग बेघर हो गये.
इसमें मेघौल दास टोल के छह परिवार, बिदुलिया गांव में तीन परिवार, नुरूल्लाहपुर गांव के वार्ड नंबर छह निवासी धर्मेंद्र सहनी, बबलू सहनी, अरुण सहनी, रघुवीर सहनी का घर तथा फफौत में आधा दर्जन परिवार नदी में बाढ़ से प्रभावित हुआ है. प्रभावित परिवार बांध के बाहर अपने पुराने घरों में अथवा पड़ोसी के पास शरण ले रखा है. जबकि दर्जन भर परिवार बांध के ऊपर अस्थायी आशियाना बनाने में जुट गये हैं.
तटबंध की सुरक्षा व मुआवजे की मांग : प्रखंड प्रमुख अंजना कुमारी, जिला पर्षद उपाध्यक्ष मो सुभान, बरियारपुर पश्चिमी पंचायत की मुखिया प्रेमलता देवी, फफौत की मुखिया किरण देवी, पूर्व मुखिया टिंकू राय, अनिल कुमार, मेघौल मुखिया पुरुषोत्तम सिंह, सागी मुखिया अनिता देवी, समाजसेवी तरुण कुमार रोशन, राजेश कुमार, पंंकज कुमार, अजय सहनी, चंदन कुमार आदि जनप्रतिनिधियों ने बूढ़ी गंडक नदी के बाएं तटबंध की सुरक्षा, बाढ़ से क्षतिग्रस्त फसलों एवं घरों का आकलन कर किसानों को पर्याप्त मुआवजा देने की मांग की है.
क्या कहते हैं अधिकारी
तटबंध खतरे के निशान से पार कर चुका है. रोसड़ा में डेढ़ सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से जल स्तर में वृद्धि दर्ज की गयी है, जिसका बुधवार तक कमी आने की आशा है. रोसड़ा से मेघौल तक नदी के बाएं तटबंध अब तक पूरी तरह से सुरक्षित है.
जहां भी रेन कटर व गड्ढे नजर आ रहे हैं. उनमें मिट्टी डालकर तत्काल ठीक कर दिया जाता है. फफौत पुल घाट से पूरब बांस- बल्ला लगाकर एवं कैरेट डालकर बैरीकेडिंग कर तटबंध को सुरक्षित किया जा रहा है.
रामप्रवेश कुमार, कनीय अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, रोसड़ा
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