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परिवार नियोजन काउंसिलिंग को ले जिले के आयुष चिकित्सकों को दिया गया प्रशिक्षण

Updated at : 25 Oct 2024 7:45 PM (IST)
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परिवार नियोजन काउंसिलिंग को ले जिले के आयुष चिकित्सकों को दिया गया प्रशिक्षण

परिवार नियोजन के साधनों का उपयोग न केवल जनसंख्या नियंत्रण में सहायक है,

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किशनगंज जिले में परिवार नियोजन कार्यक्रम की सफलता के लिए सदर अस्पताल प्रांगण में शुक्रवार को जिला स्वास्थ्य समिति के द्वारा परिवार नियोजन काउंसलिंग एवं उसके विभिन्न साधनों की जानकारी के लिए एक विशेष कार्यशाला आयोजित की गयी. कार्यशाला सिविल सर्जन डॉ राजेश कुमार की अध्यक्षता में की गयी. इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से एमओ (आयुष) को प्रशिक्षित करने का उद्देश्य रखा गया, ताकि वे समुदाय में परिवार नियोजन के लाभों को लेकर अधिक जागरूकता फैला सकें.

परिवार नियोजन के भ्रांतियों को दूर करना आवश्यक

सिविल सर्जन डॉ राजेश कुमार ने बताया कि भारत जैसे विकासशील देश में बढ़ती जनसंख्या एक बड़ी चुनौती है, और इसे नियंत्रित करने में परिवार नियोजन की अहम भूमिका है. उन्होंने कहा, “हमारे समाज में अभी भी परिवार नियोजन के प्रति कई भ्रांतियां हैं, जिनके कारण लोग इससे दूर रहते हैं. ऐसे में स्वास्थ्य कर्मियों की यह जिम्मेदारी है कि वे लोगों को सही जानकारी प्रदान करें और इस दिशा में समाज को जागरूक करें.” उन्होंने बताया कि परिवार नियोजन के साधनों का उपयोग न केवल जनसंख्या नियंत्रण में सहायक है, बल्कि यह मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए भी अत्यंत आवश्यक है.

कार्यशाला के दौरान प्रशिक्षक ने परिवार नियोजन के विभिन्न साधनों के बारे में विस्तार से जानकारी दी, जैसे कि गर्भ निरोधक गोलियां, कॉपर टी, कंडोम, और नसबंदी जैसे स्थायी उपाय. उन्होंने बताया कि इन उपायों को अपनाने से न केवल महिलाएं सुरक्षित रहती हैं, बल्कि उनके परिवारों को भी स्वस्थ जीवन जीने का अवसर मिलता है. उन्होंने यह भी बताया कि आज के समय में कई ऐसे आधुनिक उपाय उपलब्ध हैं जो पूरी तरह से सुरक्षित हैं और जिनके दुष्प्रभाव भी न्यूनतम होते हैं.

सिविल सर्जन ने इस बात पर भी जोर दिया कि परिवार नियोजन के उपाय केवल महिला पर निर्भर नहीं होना चाहिए. उन्होंने पुरुषों को भी इस दिशा में जागरूक होने का आह्वान किया और कहा कि समाज में अभी भी यह धारणा बनी हुई है कि परिवार नियोजन की जिम्मेदारी केवल महिलाओं की है. इस सोच को बदलने की आवश्यकता है, ताकि समाज में संतुलन बना रहे और सभी का स्वास्थ्य संरक्षित रहे. मौजूद प्रशिक्षकों ने एमओ(आयुष) को प्रशिक्षित किया और उन्हें परिवार नियोजन के विभिन्न साधनों की काउंसलिंग करने के तरीकों से अवगत कराया. उन्होंने बताया कि कैसे सही परामर्श से लोग परिवार नियोजन के उपायों के प्रति आकर्षित हो सकते हैं और इसके लाभों को समझ सकते हैं. प्रशिक्षण में यह भी बताया गया कि प्रत्येक व्यक्ति की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए ही उन्हें उचित उपाय सुझाए जाएं.कार्यशाला का उद्देश्य न केवल काउंसलिंग कौशल को निखारना था, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना था कि सभी एमओ समाज में परिवार नियोजन के प्रति जागरूकता फैलाने में सक्षम हों. कार्यक्रम के अंत में, सिविल सर्जन डॉ. राजेश कुमार ने सभी प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया और आशा व्यक्त की कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम आगे भी आयोजित किए जाते रहेंगे, ताकि हर व्यक्ति तक परिवार नियोजन के लाभ पहुंच सकें.इस कार्यशाला से यह संदेश स्पष्ट रूप से निकलकर सामने आया कि स्वास्थ्य कर्मियों की भूमिका समाज को जागरूक और स्वस्थ बनाने में महत्वपूर्ण है. इस अवसर पर सभी उपस्थित प्रतिभागियों ने परिवार नियोजन की जरूरत और इसके लाभों को आत्मसात किया और समुदाय में जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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