जिस ट्रैक पर दौड़ने थे खिलाड़ी, वहां सूख रहे उपले, पंजवारा में लाखों की योजना पर उठ रहे सवाल
Published by : AMIT KUMAR SINH Updated At : 08 Jun 2026 11:01 AM
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Banka News : बांका जिले की लौढ़िया खुर्द पंचायत के बिक्रमपुर में लाखों रुपये खर्च कर बनाया गया खेल मैदान अपने उद्देश्य से भटकता नजर आ रहा है. मैदान पर खेल गतिविधियां नदारद हैं, जबकि ट्रैक का उपयोग उपले सुखाने के लिए किया जा रहा है.
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पंजवारा, बांका से गौरव कश्यप की रिपोर्ट
Banka News : ग्रामीण क्षेत्रों में खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने और युवाओं को बेहतर खेल सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर रही है. लेकिन लौढ़िया खुर्द पंचायत के बिक्रमपुर में निर्मित खेल मैदान की वर्तमान स्थिति इन प्रयासों पर सवाल खड़े कर रही है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि लाखों रुपये की लागत से तैयार इस मैदान में आज तक कोई खेल प्रतियोगिता आयोजित नहीं हुई और न ही खिलाड़ियों को इसका अपेक्षित लाभ मिल पाया है.खेल गतिविधियों के बजाय सुखाये जा रहे उपले
ग्रामीणों के अनुसार जिस मैदान को युवाओं के अभ्यास और खेल प्रतियोगिताओं के लिए तैयार किया गया था, वहां आज खेल गतिविधियों के बजाय उपले (गोबर के कंडे) सुखाए जा रहे हैं. मैदान की यह तस्वीर सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है.निर्माण हुआ, लेकिन उपयोगिता पर नहीं दिया गया ध्यान
स्थानीय युवाओं का कहना है कि मैदान का निर्माण तो कर दिया गया, लेकिन इसकी उपयोगिता और रखरखाव को लेकर कोई ठोस पहल नहीं की गई. मैदान में खिलाड़ियों के लिए आवश्यक सुविधाओं का अभाव है. यही कारण है कि क्षेत्र के खिलाड़ी यहां अभ्यास करने नहीं पहुंचते और मैदान धीरे-धीरे अपने मूल उद्देश्य से दूर होता जा रहा है.खेल प्रतिभाओं को नहीं मिल रहा लाभ
ग्रामीणों का मानना है कि यदि मैदान का निर्माण स्थानीय जरूरतों और खिलाड़ियों की मांग को ध्यान में रखकर किया गया होता, तो यहां नियमित रूप से खेल अभ्यास और प्रतियोगिताओं का आयोजन संभव था. इससे क्षेत्र की खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का अवसर मिलता. लेकिन वर्तमान स्थिति में यह मैदान उपयोगहीन साबित हो रहा है.लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद उठ रहे सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब मैदान निर्माण पर लाखों रुपये खर्च किए गए, तो उसकी गुणवत्ता, उपयोगिता और भविष्य की योजना की समीक्षा क्यों नहीं की गई. यदि मैदान बनने के बाद एक भी खेल प्रतियोगिता आयोजित नहीं हुई, तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है. यह सवाल अब स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है.जांच और सुधार की मांग तेज
ग्रामीणों और खिलाड़ियों ने जिला प्रशासन से खेल मैदान की स्थिति की जांच कराने की मांग की है. साथ ही उन्होंने मैदान को खेल गतिविधियों के अनुकूल बनाने, आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने और नियमित खेल आयोजनों की व्यवस्था सुनिश्चित करने की अपील की है. उनका कहना है कि सरकारी धन का सही उपयोग तभी माना जाएगा, जब इस मैदान का लाभ वास्तव में क्षेत्र के खिलाड़ियों और युवाओं को मिल सके.प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
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