भीषण गर्मी में पंजवारा में छह महीने से अधूरा पड़ा जलमीनार, बूंद-बूंद पानी के लिए भटक रहे ग्रामीण

Published by : AMIT KUMAR SINH Updated At : 04 Jun 2026 3:18 PM

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Banka News : लाखों रुपये खर्च कर बनाया गया जलमीनार गांव में पानी पहुंचाने के बजाय केवल शोभा की वस्तु बनकर खड़ा है. बांका के चचरा गांव में छह महीने पहले तैयार हुआ जलमीनार अब तक चालू नहीं हो सका है. नतीजा यह है कि भीषण गर्मी के बीच ग्रामीण बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं और सरकारी योजना के लाभ का इंतजार कर रहे हैं.

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पंजवारा बांका से गौरव कश्यप की रिपोर्ट

Banka News : बांका जिले के पंजवारा क्षेत्र अंतर्गत लौढ़िया खुर्द पंचायत के चचरा गांव में पेयजल संकट गहराता जा रहा है. वार्ड संख्या-1 में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से निर्मित जलमीनार पिछले लगभग छह माह से अधूरा पड़ा है. निर्माण कार्य पूरा नहीं होने और जलापूर्ति शुरू नहीं होने से सैकड़ों ग्रामीणों को भीषण गर्मी में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.

खड़ा है जलमीनार, लेकिन नहीं मिल रहा पानी

ग्रामीणों के अनुसार जलमीनार का मुख्य ढांचा काफी पहले तैयार कर दिया गया था. निर्माण कार्य लगभग पूरा होने के बावजूद आज तक जलापूर्ति शुरू नहीं हो सकी है. गांव के लोगों का कहना है कि जब जलमीनार का निर्माण हुआ था, तब उन्हें उम्मीद थी कि वर्षों पुरानी पेयजल समस्या का समाधान हो जाएगा, लेकिन अब यह उम्मीद धीरे-धीरे निराशा में बदल रही है.

गर्मी में बढ़ी पानी की किल्लत

भीषण गर्मी और बढ़ते तापमान के बीच गांव में पानी की मांग लगातार बढ़ रही है. ऐसे समय में जलमीनार बंद रहने से ग्रामीणों को चापाकलों और अन्य सीमित जलस्रोतों पर निर्भर रहना पड़ रहा है. कई परिवारों को दूर-दराज के स्थानों से पानी लाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, जिससे महिलाओं और बुजुर्गों की परेशानी और बढ़ गई है.

लाखों खर्च, लेकिन लाभ शून्य

ग्रामीणों का कहना है कि सरकार द्वारा लाखों रुपये खर्च कर बनाई गई योजना का लाभ अब तक लोगों को नहीं मिल पाया है. जलमीनार तैयार होने के बावजूद उसका संचालन शुरू नहीं होना योजना की उपयोगिता पर सवाल खड़े कर रहा है. लोगों का मानना है कि यदि समय पर इसे चालू कर दिया जाता तो गर्मी के इस मौसम में गांव को बड़ी राहत मिल सकती थी.

अधिकारियों की उदासीनता का आरोप

स्थानीय ग्रामीणों ने संबंधित विभाग और जिम्मेदार अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप लगाया है. उनका कहना है कि कई बार शिकायत और मांग के बावजूद जलमीनार को चालू कराने की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई. इसी कारण परियोजना महीनों से अधर में लटकी हुई है.

ग्रामीणों ने की त्वरित कार्रवाई की मांग

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग से मामले की जांच कर जल्द से जल्द जलमीनार को चालू कराने की मांग की है. उनका कहना है कि वार्ड संख्या-1 के सैकड़ों लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसमें और देरी नहीं होनी चाहिए.

आखिर कब मिलेगा पानी?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब जलमीनार का निर्माण महीनों पहले पूरा हो चुका है तो इसके संचालन में देरी क्यों हो रही है. ग्रामीण अब जवाब चाहते हैं कि आखिर उन्हें इस योजना का लाभ कब मिलेगा और पेयजल संकट से राहत कब तक मिलेगी.

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