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मनी लांड्रिंग के मुख्य आरोपी पर आईटी एक्ट का केस दर्ज, गये जेल

Updated at : 22 Dec 2024 9:41 PM (IST)
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मनी लांड्रिंग के मुख्य आरोपी पर आईटी एक्ट का केस दर्ज, गये जेल

मनी लांड्रिंग के मुख्य आरोपी पर आईटी एक्ट का केस दर्ज, गये जेल

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बांका. यूको बैंक शाखा बांका के एक खाताधारक के खाता से करोड़ों रुंपया के जमा व निकासी मामले में मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर रविवार को जेल भेज दिया गया है. मामले में साईबर पुलिस ने दुधारी गांव निवासी राजेश पंजीयारा पर साईबर थाना में आईटी एक्ट के विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी भी दर्ज की है. डीएसपी मुख्यालय सह साईबर थानाध्यक्ष विनोद कुमार ने एक प्रेसवार्ता कर बताया है कि आरोपी के द्वारा बैंक के खाताधारक रामपुर दुधारी गांव निवासी कैलाश साह के खाता से करोड़ो रूपये की हेराफेरी की गयी है. साईबर पुलिस उनके खाता से जमा व निकासी की गयी सभी अवैध राशी का अवलोकन कर रही है. आरोपी के द्वारा किन किन खाता पर यह राशि भेजी गयी है. इसकी भी जांच की जा रही है. वहीं बैंक से भी मामले में जांच पड़ताल जारी है. खास यह भी कि आरोपी ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया है. साईबर पुलिस को आरोपी के पास से 7 एटीएम, एक मोबाईल एवं विभिन्न व्यक्तियों के दास्तावेज पैन कार्ड, आधार कार्ड व अन्य कागजात मिले हैं. यह कार्रवाई एसपी डा. सत्यप्रकाश के निर्देश पर डीएसपी मुख्यालय के नेतृत्व में एक टीम गठित कर की गयी. साईबर टीम के छापेमारी दल में प्रमुख रूप से साईबर थाना के पुलिस अवर निरीक्षक अमित कुमार, ओमप्रकाश, प्रशांत कुमार, सोनी कुमारी, संजय कुमार, रंजीत कुमार, राजु कुमार पाल, जितेंद्र कुमार व गोविंदा कुमार आदि मौजूद थे. साईबर टीम के कार्रवाई से साईबर अपराधियों में खौप हाल के दिनों में जिले की साईबर टीम के द्वारा लगातार की जा रही कार्रवाई से साईबर अपराधियों में खौप का माहौल देखा जा रहा है. लोन के नाम पर साईबर टीम ने मनी लांड्रिंग करने के एक बड़े मामले का खुलासा किया है. जिसका तार कलकत्ता जैसे महानगर से जुड़ा हुआ है. टीम का आशंका है कि मनी लांड्रिंग के इस खेल में और भी कई लोग शामिल हैं. जिसकी टीम जांच कर रही है. वहीं गत दिनों शहर के विजयनगर निवासी व्यवसायी आलोक झा से साईबर अपराधियों ने 9 से 12 दिसंबर तक डिजिटल अरेस्ट कर 15 लाख रूपये अन्य खाता में ट्रांसफर करा लिया. जिस मामले में भी साईबर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है. बताया जा रहा है कि टीम को इस मामले में भी कई अहम सुराग मिले हैं. हालांकि पूरे मामले में मुख्यालय डीएसपी ने बताया है कि डिजिटल अरेस्ट जैसा कोई मामला नहीं होता है. इस तरह के फेक कॉल से आमलोगों को बचने की जरूरत है.

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