Banka : वट सावित्री पूजा को लेकर बाजारों में रौनक, कृष्णमुरारी ने बताया व्रत का महत्व

Published by : AMIT KUMAR SINH Updated At : 14 May 2026 3:18 PM

विज्ञापन

बाराहाट प्रखंड क्षेत्र में इन दिनों वट सावित्री पूजा को लेकर बाजारों में रौनक बढ़ गयी है.

विज्ञापन

बाराहाट (बांका)से अजय कुमार झा की रिपोर्ट :

बाराहाट प्रखंड क्षेत्र में इन दिनों वट सावित्री पूजा को लेकर बाजारों में रौनक बढ़ गयी है. सुहागिन एवं नवविवाहित महिलाएं पूजा की तैयारियों में जुट गयी हैं. बाजारों में फल, मिठाई, कपड़े व आभूषण की दुकानों पर खरीदारों की भारी भीड़ देखी जा रही है.

सबसे पहले सावित्री ने ही की थी वट वृक्ष की पूजा : कृष्णमुरारी

वट सावित्री पूजा से जुड़ी पौराणिक कथा का उल्लेख करते हुए क्षेत्र के प्रसिद्ध विद्वान पंडित कृष्णमुरारी मिश्रा ने बताया कि देवी भागवत कथा महापुराण के अनुसार, इस सृष्टि में सबसे पहले सावित्री ने वट सावित्री की पूजा-अर्चना की थी.

देवर्षि नारद ने सत्यवान क अल्पायु होने की दी थी जानकारी

कृष्णमुरारी मिश्रा ने बताया कि जब देवर्षि नारद ने सावित्री के पिता राजा अश्वपति को सत्यवान की अल्पायु होने की जानकारी दी, तब भी सावित्री अपने निर्णय पर अडिग रहीं.उन्होंने अपने सतीत्व के बल पर कहा कि वह अपने पति के प्राण देवताओं से भी वापस ला सकती हैं और विवाह सत्यवान से ही करेंगी.इसके बाद राजा अश्वपति एवं माता रानी मालवी ने सावित्री का विवाह धूमधाम से सत्यवान के साथ करा दिया.

पेड़ पर चढ़ने के दौरान गिरने से सत्यवान की हुई मौत

कथा के अनुसार, विवाह के बाद एक दिन सत्यवान जंगल में लकड़ी काटने गये. पेड़ पर चढ़ने के दौरान गिर जाने से उनकी मृत्यु हो गई. इसके बाद सावित्री ने वटवृक्ष के नीचे अपने पति के शव के साथ तीन दिन तक उपवास किया. इसी दौरान यमराज वहां पहुंचे और सत्यवान के प्राण लेकर जाने लगे.

सावित्री ने अपनी बुद्धिमता से यमराज को वचनों से बांधा

सावित्री ने अपने तप, त्याग और बुद्धिमत्ता से यमराज को अपने वचनों में बांध लिया. उन्होंने यमराज से पुत्रवती होने का वरदान मांग लिया. वरदान देने के बाद सावित्री ने तर्क दिया कि पति के बिना पुत्र प्राप्ति कैसे संभव है. अपने वचन से बंधे यमराज को अंततः सत्यवान के प्राण लौटाने पड़े.

पंडित कृष्णमुरारी मिश्रा ने बताया कि वटवृक्ष को विज्ञान और पर्यावरण की दृष्टि से अमर एवं अक्षय माना जाता है. इसी कारण यह पर्व वटवृक्ष के नाम से प्रसिद्ध हुआ.

आज भी व्रत के प्रति महिलाओं में है प्रगाढ़ आस्था

आज भी वट सावित्री पूजा का उत्साह कम नहीं हुआ है. बाराहाट क्षेत्र के बाजारों में पूजा सामग्री, फल, मिठाई, वस्त्र एवं आभूषणों की खरीदारी को लेकर लोगों की भारी भीड़ उमड़ रही है.

विज्ञापन
AMIT KUMAR SINH

लेखक के बारे में

By AMIT KUMAR SINH

AMIT KUMAR SINH is a contributor at Prabhat Khabar.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन