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महाशिवरात्रि को लेकर जिलेभर में उत्साह का माहौल, इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग के साथ कई शुभ संयोग

Updated at : 06 Feb 2026 9:06 PM (IST)
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महाशिवरात्रि को लेकर जिलेभर में उत्साह का माहौल, इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग के साथ कई शुभ संयोग

जिलेभर में महाशिवरात्रि को लेकर रौनक दिखने लगी है. इस साल आगामी 15 फरवरी को महाशिवरात्रि का त्योहार मनाया जायेगा.

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चंदन कुमार, बांका. जिलेभर में महाशिवरात्रि को लेकर रौनक दिखने लगी है. इस साल आगामी 15 फरवरी को महाशिवरात्रि का त्योहार मनाया जायेगा. जिसे लेकर अभी से ही भगवान शिव की पूजा के लिए श्रद्धालुओं द्वारा सामान खरीदने को लेकर बाजार में दुकानें सजने लगी हैं. उधर मंदिर के पुजारी एवं समिति के द्वारा मंदिरों में साफ-सफाई के साथ रंग-रोगन कार्य को अंतिम रूप दिया जा रहा है, जबकि क्षेत्र के प्रसिद्ध मंदिरों में श्रद्धालुओं की आस्था को देखते हुए बैरिकेडिंग कराने का काम भी शुरू कर दिया गया है, ताकि महाशिवरात्रि के दिन श्रद्धालुओं को पूजा अर्चना करने में कोई समस्या न हो, इसका पूरा ख्याल रखा जा रहा है. साथ ही श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर व्यवस्था चाक-चौबंद की जा रही है. वहीं जिला प्रशासन ने भी शांतिपूर्ण माहौल में महाशिवरात्रि त्योहार को संपन्न कराने के लिए अपनी तैयारी पूरी कर ली है. शिव बारात से लेकर मंदिर तक पुलिस फोर्स तैनात रहेगी. श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए सादी वर्दी में भी पुरुष व महिला जवान तैनात रहेंगे. मालूम हो कि फागुन कृष्ण पक्ष त्रयोदशी को आयोजित महाशिवरात्रि पर्व पर पूजा अर्चना की परंपरा में शिव मंदिरों में बेलपत्र, भांग, धतूरा, गेडी, बेर, जौ की बाली, फल, फूल, मिठाई, धूप-दीप आदि अर्पित करने के साथ जलाभिषेक और दुग्धाभिषेक का परंपरा है. इसके साथ भगवान भोले शिव के साथ होली खेलने की भी परंपरा है.

महाशिवरात्रि के दिन पूरे समय बना रहेगा व्यतीपात योग

इस संबंध में बौंसी गुरुधाम के पंडित गोपाल शरण ने बताया कि महाशिवरात्रि फाल्गुन माह की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी और चतुर्दशी तिथि के मिलन पर मनायी जायेगी. यह तिथि 15 फरवरी को शाम 5 बजकर 04 मिनट पर आरंभ होगी और 16 फरवरी को शाम 5 बजकर 34 मिनट पर समाप्त होगी. महाशिवरात्रि का पर्व 15 फरवरी रविवार को ही मनाया जायेगा. इस दिन शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र के शिव मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, अभिषेक और रात्रि जागरण, भजन कीर्तन का भी आयोजन किया जायेगा. पंडित ने आगे बताया कि इस साल महाशिवरात्रि अत्यंत विशेष मानी जा रही है. इस दिन पूरे समय व्यतीपात योग बना रहेगा, जिसे आध्यात्मिक साधना के लिए प्रभावशाली योग माना जाता है. इसके साथ ही दिन में सर्वार्थ सिद्धि योग का भी संयोग रहेगा, जो पूजा-पाठ और मंत्र जाप के फल को शीघ्र दिलाने वाला माना जाता है. रात्रि में निशिता काल का विशेष महत्व रहेगा, क्योंकि यही वह समय होता है जब भगवान शिव की आराधना सबसे अधिक फलदायी मानी जाती है.

महाशिवरात्रि पर शुभ व श्रेष्ठ मुर्हूत

पंडित के अनुसार, महाशिवरात्रि पर भगवान शिव की पूजा रात्रि के चार प्रहरों में की जाती है. पहला प्रहर शाम 06 बजकर 39 मिनट से रात 09 बजकर 45 मिनट तक रहेगा. दूसरा प्रहर रात 09 बजकर 45 मिनट से 12 बजकर 52 मिनट तक होगा. तीसरा प्रहर रात 12 बजकर 52 मिनट से सुबह 03 बजकर 59 मिनट तक रहेगा, जबकि चौथा प्रहर सुबह 03 बजकर 59 मिनट से 07 बजकर 06 मिनट तक रहेगा. इसके अलावे निशिता काल रात 11 बजकर 52 मिनट से 12 बजकर 42 मिनट तक रहेगा. जिसे शिव पूजा के लिए सबसे श्रेष्ठ समय माना जाता है.

इसलिए प्रत्येक साल मनाया जाता है शिवरात्रि का उत्सव

शिव पुराण और अन्य धार्मिक ग्रंथों के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन ही भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था. मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव ने माता पार्वती को पत्नी रूप में स्वीकार किया था. साथ ही एक अन्य मान्यता के अनुसार इसी रात्रि भगवान शिव शिवलिंग स्वरूप में प्रकट हुए थे. यही कारण है कि इस दिन शिवलिंग की पूजा का विशेष महत्व होता है. योग शास्त्रों में भी यह रात्रि अत्यंत महत्वपूर्ण मानी गयी है. इस समय शिव तत्व सबसे अधिक सक्रिय रहता है. वहीं प्रत्येक साल श्रद्धालु इसे महाशिव उत्सव दिवस के रूप में भी मनाते हैं.

महाशिवरात्रि के दिन इस विधि से करें पूजा

शास्त्र के अनुसार, महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर विशेष वस्तुएं अर्पित करने से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं. इस दिन बेलपत्र अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है. बेलपत्र को चढ़ाते समय उसका चिकना भाग नीचे की ओर रखा जाना चाहिए. धतूरा और भांग भी भगवान शिव को प्रिय माने जाते हैं. जिन्हें अर्पित करने से मानसिक शांति प्राप्त होती है. इसके अलावे शमी के फूल, सफेद पुष्प, कच्चा दूध, गंगाजल और चंदन से शिवलिंग का अभिषेक करने से जीवन की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है. साथ ही अविवाहित कन्याओं के लिए यह व्रत मनचाहा जीवनसाथी दिलाने वाला माना जाता है. जबकि विवाहित लोगों के लिए यह दांपत्य जीवन को मजबूत करता है.

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SHUBHASH BAIDYA

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By SHUBHASH BAIDYA

SHUBHASH BAIDYA is a contributor at Prabhat Khabar.

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