नारियल फल व फसल दोनों है

Published at :06 Feb 2017 2:20 AM (IST)
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नारियल फल व फसल दोनों है

चौपाल. नारियल खेती को बढ़ावा देने को लेकर जागरूकता नारियल खेती को बढ़ावा देने हेतु जागरूकता कार्यक्रम के तहत किसानों की एक चौपाल बाबूमहल में आयोजित हुई, इसमें सानों से नारियल की खेती कर अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने की भी अपील की. कटोरिया : आनंदपुर ओपी क्षेत्र के उत्तरी बारणे पंचायत अंतर्गत बाबूमहल […]

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चौपाल. नारियल खेती को बढ़ावा देने को लेकर जागरूकता

नारियल खेती को बढ़ावा देने हेतु जागरूकता कार्यक्रम के तहत किसानों की एक चौपाल बाबूमहल में आयोजित हुई, इसमें सानों से नारियल की खेती कर अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने की भी अपील की.
कटोरिया : आनंदपुर ओपी क्षेत्र के उत्तरी बारणे पंचायत अंतर्गत बाबूमहल में किसान भूषण नुनेश्वर मरांडी के आवास पर रविवार को नारियल खेती को बढ़ावा देने हेतु जागरूकता कार्यक्रम के तहत किसानों की एक चौपाल आयोजित हुई. केंद्र सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के नारियल विकास बोर्ड द्वारा आयोजित कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन कटोरिया के पूर्व भाजपा विधायक सोनेलाल हेंब्रम, नारियल विकास बोर्ड के डिप्टी डायरेक्टर राजीव भूषण प्रसाद, किसान भूषण नुनेश्वर मरांडी, ग्राम भारती के समन्वयक संतोष कुमार एवं पूर्व मुखिया अशर्फी यादव ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया.
किसान जागरूकता कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पूर्व विधायक सोनेलाल हेंब्रम ने क्षेत्र के किसानों से नारियल की खेती कर अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने की भी अपील की. नारियल विकास बोर्ड के बिहार राज्य उपनिदेशक राजीव भूषण प्रसाद ने नारियल के नगरोपण से लेकर उसके विपणन तक की विस्तृत जानकारी दी. इस क्रम में उन्होंने कहा कि नारियल सिर्फ फल नहीं, एक फसल भी है. इसे स्वर्ग फल भी कहा जाता है. नारियल का उपयोग जन्म से लेकर मृत्यु तक के कार्यक्रम में होता है. नारियल पेड़ के जड़ से लेकर पत्ता, फल तक उपयोगी है. इसके विभिन्न भागों का उपयोग झाड़ू, तेल, चटाई, रस्सी, कालीन, मूर्ति, हस्तकला, फर्नीचर, दवराजा, टेबुल, कुर्सी आदि बनाने के कार्यों में होता है. नारियल का पेड़ पांच से सात सालों में फल देने लगता है. एक हेक्टेयर में छह हजार रूपये की सब्सिडी नारियल विकास बोर्ड द्वारा दी जाती है. पेड़ के नुकसान होने पर बीमा योजना के तहत भी किसानों को लाभ मिलता है. तकनीकी अधिकारी पंकज कुमार ने प्रशिक्षण के क्रम में बताया कि मधेपुरा स्थित नर्सरी में बेहतर किस्म का नारियल का पौधा व पेड़ उपलब्ध है.
भूषण मरांडी ने एक हेक्टेयर में की खेती की नारियल
किसान भूषण नुनेश्वर मरांडी ने कहा कि उन्होंने एक हेक्टेयर में नारियल की खेती शुरू की है. इसके बाद क्षेत्र के किसानों को भी जागरूक करेंगे. इस मौके पर पैक्स अध्यक्ष प्रदीप वर्णवाल, बालकृष्ण वर्णवाल, शिवलाल मुर्मू, पृथ्वीचंद मुर्मू, बेचन अंसारी, रवींद्र सिंह, मोतीलाल सोरेन, टीपन यादव, छोटेलाल मुर्मू, सुरजू मुर्मू, मुनीलाल हांसदा, श्यामलाल मुर्मू, अरूण चौधरी, नागेश्वर यादव, बिंदेश्वरी वर्णवाल, सुरेश यादव, गोविंद दास आदि मौजूद थे. नारियल की खेती से संबंधित बांका जिला में किसान जागरूकता का यह पहला कार्यक्रम आयोजित हुआ.
विश्व में नारियल उत्पादन में भारत है नंबर वन
नारियल विकास बोर्ड के उपनिदेशक राजीव भूषण प्रसाद ने बताया कि विश्व के लगभग चालीस देशों में नारियल की खेती होती है. इनमें अस्सी प्रतिशत नारियल की खेती भारत, इंडोनेशिया, फिलिपिंस व श्रीलंका में होती है. नारियल के उत्पादकता व उत्पादन में भारत का पूरी दुनिया में प्रथम स्थान है. देश के चार राज्यों में नारियल की अस्सी प्रतिशत खेती होती है. इनमें केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक व आंध्रप्रदेश शामिल हैं. फिलवक्त बिहार में पंद्रह हजार हेक्टेयर में नारियल की खेती हो रही है. बिहार में भी नारियल खेती की काफी संभावनाएं हैं. किसान आम, अमरूद के साथ-साथ नारियल भी लगा सकते हैं. इसकी खेती किसी भी प्रकार की मिट्टी में हो सकती है. लेकिन बलुआही-दोमट मिट्टी में सबसे उत्तम खेती होती है. नारियल के लिए इस क्षेत्र की मिट्टी उपयुक्त है.
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