गोली लगने बाद भी अंगरेजों के सामने डटे रहे थे श्रीगोप

Published at :26 Jan 2017 6:21 AM (IST)
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गोली लगने बाद भी अंगरेजों के सामने डटे रहे थे श्रीगोप

बांका : देश के जंगे आजादी में बांका वासियों ने अंग्रेजों का दांत खट्टा कर रखा था. जिले के कई स्वतंत्रता सेनानी ने कई ऐतिहासिक कारनामा को अंजाम देकर अंग्रेजों को सबक सिखायी थी और अंग्रेज इन देश प्रेमियों के नाम से ही दहशत में रहते थे. इनमें से एक सदर थाना क्षेत्र के लकड़ीकोला […]

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बांका : देश के जंगे आजादी में बांका वासियों ने अंग्रेजों का दांत खट्टा कर रखा था. जिले के कई स्वतंत्रता सेनानी ने कई ऐतिहासिक कारनामा को अंजाम देकर अंग्रेजों को सबक सिखायी थी और अंग्रेज इन देश प्रेमियों के नाम से ही दहशत में रहते थे. इनमें से एक सदर थाना क्षेत्र के लकड़ीकोला पंचायत निवासी अमर शहीद श्रीगोप प्रमुख है.

इन्होंने 1939-40 में अपने साथी बसमत्ता के परशुराम सिंह, सातपुर के जगदीश सिंह व फागा के कई स्वतंत्रता सेनानी के साथ मिलकर अंग्रेजों से लोहा लिया. जंगे आजादी के इस दिवाने ने अंग्रेजों को चुनौती देते हुए पहले बांका कोर्ट में आग लगायी. एवं कटोरिया में चल रहे कोर्ट पर भी धावा बोला था.

एक बार जब अंग्रेज अपने सेनिकों के साथ लकड़ीकोला होकर जमदाहा की ओर जा रहे थे. उसी दौरान श्रीगोप ने अपने साथियों के साथ मिलकर अंग्रेजों की सैनिक टुकड़ी पर हमला बोलकर उनके तीन सैनिकों को मार गिराया था. वहीं अंग्रेजों को बांका पहुंचने से रोकने के लिए श्रीगोप ने अपने साथियों के साथ पुल को तोड़ दिया था ताकि अंग्रेजों को लक्ष्मीपुर स्टेट से कोई मदद नहीं मिल सके. देश भक्ति से ओतप्रोत अमरपुर के ड़ाक बंगला को भी आग के हवाले कर दिया था.

जिससे बौखलाए अंग्रेज श्रीगोप को खोजने लगी और एक लाल वारंट जारी कर उन्हें देखते ही गोली मारने का आदेश दे रखा था. श्रीगोप और अंग्रेजों के बीच आंख मिचौली का खेल लंबे दिनों तक चलती रही, और एक दिन 2 अप्रैल 1943 को वर्तमान डांडा पंचायत के रतौठिया जंगल में अंग्रेजी हुकूमत ने गोली मारकर उन्हें मौत के नींद सुला दिया. उस दौरान भी श्रीगोप एक गोली खाने के बाद भी अंग्रेजों के सामने डटे रहे. अंग्रेजों ने उन्हें एक के बाद एक तीन गोली मारकर उन्हें मौत के घाट उतार दिया था.
बताया जा रहा है कि उनकी मृत्यु के बाद पोस्टमार्टम के वक्त अंग्रेजों ने उनका कलेजा निकालकर वजन कराया था, जो वजन में ढ़ाई सेर का कलेजा निकला था. उनके याद में स्थानीय लकड़ीकोला गांव में एक स्मारक भी बनाया गया है. जहां प्रति वर्ष देश प्रेमी उन्हें याद कर नमन करते हैं.
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