यहां रोज बेपरदा होते हैं लोग परेशानी . महिलाओं के लिए नहीं बने हैं एक भी शौचालय
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :02 Dec 2016 6:40 AM (IST)
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एक ओर जहां राज्य सरकार महिलाओं को सरकारी नौकरियों में 50 प्रतिशत आरक्षण देने की बात कर रही है वहीं बांका जिले में महिलाओं के लिए एक भी महिला शौचालय नहीं है. ऐसे में महिला शस्त्रीकरण की बात करना इस जिले के लिए बेइमानी होगी. बांका : इस जिला मुख्यालय की विकास की बात अगर […]
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एक ओर जहां राज्य सरकार महिलाओं को सरकारी नौकरियों में 50 प्रतिशत आरक्षण देने की बात कर रही है वहीं बांका जिले में महिलाओं के लिए एक भी महिला शौचालय नहीं है. ऐसे में महिला शस्त्रीकरण की बात करना इस जिले के लिए बेइमानी होगी.
बांका : इस जिला मुख्यालय की विकास की बात अगर करे तो पिछले दो दशक में कोई खास बदलाव नहीं हुआ है. यहां पर कई राजनेता आये और गये लेकिन बांका को विकास के उचित पैमाने पर किसी ने नहीं पहुंचाया. सभी जनप्रतिनिधि के द्वारा सिर्फ यहां के लोगों के साथ दगा ही किया गया. यह जिला मुख्यालय है यहां पर दसों प्रखंडों से लोग अपने जरूरी कार्य के लिए पहुंचते है. कानूनी लड़ाई लड़नी हो या फिर अपनी समस्या को आलाधिकारियों के पास पहुंचाना हो तो उनको जिला मुख्यालय आना होता है. ऐसे में अपनी समस्या को रखने के लिए महिलाएं भी जिला मुख्यालय पहुंचती है और दर्जनों महिलाएं आती है.
लेकिन अगर वह जिला मुख्यालय पहुंच जाती है तो उनके समक्ष सबसे बड़ी समस्या शौच करने को हो जाती है. यहां एक भी महिला शौचालय नहीं है. जब जिला मुख्यालय में एक भी महिला शौचालय नहीं है तो ऐसे में महिलाओं को खुले में शौच करने के लिए मजबूर होना पड़ता है. वह सुनसान स्थान की तलाश करती है और खुले में शौच करती है. महिलाओं के अनुसार जब वह जिला मुख्यालय से निकलती है तब वह खुले में शौच करती है. और खुले में शौच के लिए जाने पर स्थानीय लड़के उन्हें घूरते है,
कभी कभी तो पत्थर भी फेंकते हैं, अश्लील बातें करते हैं और अगर सुनसान इलाका रहा तो उनको अपने साथ कोई अप्रिय वारदात की भी आशंका बनी रहती है. फिर भी वह मजबूर है क्योंकि वह मुख्यालय में शौचालय नहीं है. महिलाएं बताती है कि वह क्या करें ? अगर जिला मुख्यालय में कहीं पर भी महिलाओं के लिए शौचालय होता तो उनको खुले में शौच नहीं जाता पड़ता. वह खुले में शौच करती है तो इससे उनको तो परेशानी व शर्माहट तो होती ही है स्थानीय लोगों को बीमारी भी हो सकती है.
योजना का बड़ा है बजट
सरकार निर्मल भारत अभियान, सम्पूर्ण स्वच्छता अभियान आदि से शौचालय बनवा रही है और इसके लिए काफी बड़े बजट का प्रावधान किया गया है, लेकिन सफाई-स्वच्छता पर खर्च होने वाला धन यदि केवल ‘शौच गृह’ बनाने तक सीमित है तो हम मल प्रबंधन, खुले में शौच समस्या को ‘ट्रांसफर’ भर कर रहे हैं. न की इस समस्या का पूरा निराकरण कर रहे हैं. इस लिए शहर में महिलाओं के लिए अलग से शौचालय व मलमूत्र गृह का निर्माण होना चाहिए.
कहां-कहां होती है लोगों को परेशानी
महिलाएं जब जिला मुख्यालय पहुंचती है तो उनको सब से पहले भागलपुर बस स्टैंड, कटोरिया बस स्टैंड, अमरपुर बस स्टैंड पर होती है. वहां से निकलने के बाद कहीं भी रोड किनारे महिला शौचालय नहीं है. जिसकी वजह से परेशानी होती है. अगर महिलाएं न्यायालय के कार्य से आयी है तो उनको न्यायालय परिसर में भी महिला शौचालय नहीं मिलता है. जो शौचालय न्यायालय परिसर में है वह भी संतरी के हाथों में कैद रहता है. जिसकी वजह से महिलाओं को परेशानी होती है. अगर महिलाएं समाहरणालय के कार्य से आयी है तो उनको वहां भी परेशानी होती है. ऐसे में महिलाओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है.
शहर में शौचालय है. महिलाओं के लिए अलग से शौचालय की व्यवस्था नहीं है. महिला शौचालय के लिए विभाग को लिखा जायेगा.
बीके तरूण, कार्यपालक पदाधिकारी, बांका.
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