महिला वकील पर पति ने धारदार हथियारों से किया हमला, सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेकर शुरू की सुनवाई

Published by : Rajneesh Anand Updated At : 27 Apr 2026 4:17 PM

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सुप्रीम कोर्ट

Supreme Court : एक महिला वकील जो दो नाबालिग बच्चियों की मां है, उसपर उसके पति ने धारदार हथियारों से हमला किया . इतना ही नहीं उसकी बच्चियों को भी उससे अलग कर दिया , इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए केस दर्ज किया है.

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Supreme Court : सुप्रीम कोर्ट ने पीड़ित महिला वकील को न्याय दिलाने के लिए मामले की सुनवाई शुरू कर दी है. है. सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला एक वकील से चिट्ठी मिलने के बाद बाद किया है. वकील ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के ऑफिस को महिला वकील पर धारदार हथियारों से बेरहमी से हमले की जानकारी दी थी.

महिला का इलाज AIIMS ट्रॉमा सेंटर में हुआ

महिला वकील पर हुए हमले के बारे में जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने ध्यान दिया और अविलंब कोर्ट ने इस मामले में दखल देकर केस दर्ज करने का फैसला किया है. कोर्ट को लेटर के साथ कुछ तस्वीरें भी मिली हैं, जिनमें महिला वकील पर धारदार हथियार से हमले की पुष्टि हुई है. तस्वीरों से साफ है कि पीड़िता पर बहुत ही बेरहमी से हमला किया गया है. गंभीर चोटों की वजह से उनका इलाज शुरू में AIIMS ट्रॉमा सेंटर में इलाज करवाना पड़ा था.

महिला वकील का पति है मुख्य आरोपी

महिला वकील पर हमले का मुख्य आरोपी उसका पति ने है. पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है. केस की निष्पक्ष जांच हो यह सुनिश्चित करने के लिए कोर्ट ने अंतरिम आदेश जारी किया, जिसमें पुलिस कमिश्नर से जांच किसी सीनियर ऑफिसर, खासकर महिला ऑफिसर को सौंपने के लिए कहा गया है. पुलिस को उन दो नाबालिग बच्चों का पता लगाने का निर्देश दिया गया है, जिनके बारे में कहा जा रहा है कि उन्हें पीड़िता का पति ले गया है. कोर्ट ने यह आदेश भी दिया है कि सबसे बड़ी बेटी की कस्टडी उसके मायके वालों के पास रहेगी, जहां वह अभी रह रही है.

जिन अस्पतालों ने महिला को भर्ती करने से मना किया था, उनकी होगी जांच

जब महिला वकील पर हमला किया गया था, तो गुरु तेग बहादुर , कैलाश दीपक और आरके अस्पताल ने महिला का इलाज करने से मना कर दिया था. इस वजह से कोर्ट ने इन अस्पतालों की जांच करने को कहा है, ताकि यह पता लगाया जा सके, एक घायल महिला का इलाज इन अस्पतालों ने क्यों नहीं किया.
पीड़िता की पैसे की तंगी, खासकर उसके मेडिकल इलाज और उसकी नाबालिग बेटियों की जिम्मेदारी को ध्यान में रखते हुए, कोर्ट ने नेशनल लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (NALSA) को मुआवजा देने और पीड़िता को सही रकम देने के लिए कदम उठाने का निर्देश दिया. आगे की सुनवाई अगली तारीख पर होगी.

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लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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