शिलान्यास के डेढ़ दशक बाद भी नहीं बन पाया स्टेडियम

Published at :06 Mar 2016 6:25 AM (IST)
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शिलान्यास के डेढ़ दशक बाद भी नहीं बन पाया स्टेडियम

बांका : करीब डेढ़ दशक पूर्व तत्कालीन क्षेत्रीय सांसद स्व दिग्विजय सिंह की पहल पर पीबीएस कॉलेज मैदान पर स्टेडियम बनाने की बात हुई थी. उन्हीं के प्रयास से तत्कालीन उप राष्ट्रपति भैरो सिंह शेखावत ने स्टेडियम का शिलान्यास भी किया. इस योजना के लिए चार करोड़ की राशि भी विश्वविद्यालय के माध्यम से भेजी […]

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बांका : करीब डेढ़ दशक पूर्व तत्कालीन क्षेत्रीय सांसद स्व दिग्विजय सिंह की पहल पर पीबीएस कॉलेज मैदान पर स्टेडियम बनाने की बात हुई थी. उन्हीं के प्रयास से तत्कालीन उप राष्ट्रपति भैरो सिंह शेखावत ने स्टेडियम का शिलान्यास भी किया. इस योजना के लिए चार करोड़ की राशि भी विश्वविद्यालय के माध्यम से भेजी गयी.

इसी स्टेडियम के नाम पर मैदान में लगे शीशम के सैकड़ों पेड़ भी काट डाले गये, लेकिन समुचित इच्छा शक्ति और पहल के अभाव में बाद में यह योजना दम तोड़ गयी. और स्टेडियम के नाम पर यहां ना खुदाई मिली , ना विशाल ए सनम वाली बात चरितार्थ हो गयी.

आरएमके ग्राउंड भी खस्ता हाल
स्थानीय आरएम के ग्राउंड पर कई बार स्टेडियम बनाने की बात हुई. कई बार आधिकारिक स्तर पर इसकी घोषणा भी की गयी. कई बार कई योजनाओं के नाम पर लाखों की लूट भी हुई, लेकिन मैदान में शायद स्टेडियम नहीं बनना था, सो स्टेडियम नहीं बना. हाल ही में मैदान के दक्षिणी हिस्से में स्टेडियम की तर्ज पर कुछ सीढ़ियां बनवायी गयी, जो बनने के साथ ही ढहने लगी है. मैदान की बनावट भी सूप की तरह है. यह मैदान दक्षिण से उत्तर की तरफ ढलान लिये हुए है. इससे यहां खेल आयोजनों में परेशानी ही होती है.
राजनीतिक आयोजनों में होता है प्रयोग
दरअसल आरएमके व पीबीएस कॉलेज के मैदान अब खेल मैदान की बजाय प्रशासनिक एवं राजनीतिक आयोजनों के लिए ज्यादा प्रयुक्त होते हैं. एक ओर जहां राजनीतिक दलों की आम सभाओं और बैठकों के लिए इन मैदानों का इस्तेमाल सालों भर होता है. वहीं प्रशासनिक स्तर पर समय-समय पर आयोजित किये जाने वाले मेले आदि का आयोजन भी इन्हीं मैदानों पर किया जाता है.
पिछले कुछ महीनों से नये भवन में पुलिस लाइन शिफ्ट होने के पहले नवनियुक्त आरक्षियों की ट्रेनिंग आरएमके मैदान पर ही होती थी. सारा दिन मैदान पर आरक्षियों का कब्जा रहता था. हालांकि अब इससे मैदान को मुक्ति मिली है, लेकिन इतना ही काफी नहीं है. शहर के खेल प्रेमी युवाओं और बच्चों की मांग है कि यहां शीघ्र एक सुव्यवस्थित स्टेडियम का निर्माण हो.
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