ढाई दशक बीते, नहीं मिला कोल्ड स्टोरेज
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :27 Feb 2016 3:41 AM (IST)
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स्टोरेज सुविधा के अभाव में हर साल बड़े पैमाने पर किसानों की नकदी पैदावार नष्ट होती है. बिचौलियों के हाथों कौड़ी के भाव अपनी उपज बेच कर जिले के किसान घाटा उठाने पर विवश हैं. बांका : जिला बनने के ढाई दशक बाद भी बांका में एक अदद कोल्ड स्टोर नहीं है. कोल्ड स्टोरेज की […]
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स्टोरेज सुविधा के अभाव में हर साल बड़े पैमाने पर किसानों की नकदी पैदावार नष्ट होती है. बिचौलियों के हाथों कौड़ी के भाव अपनी उपज बेच कर जिले के किसान घाटा उठाने पर विवश हैं.
बांका : जिला बनने के ढाई दशक बाद भी बांका में एक अदद कोल्ड स्टोर नहीं है. कोल्ड स्टोरेज की सुविधा नहीं रहने से किसानों की अनेक नगदी फसल हर साल बर्बाद हो जाती है या फिर उन्हें मजबूरी में इन उत्पादों को औने पौने भाव में आढ़तियों के हाथों बेच कर घाटा उठाना पड़ता है. बांका कृषि प्रधान जिला है और यहां के किसान बड़े पैमाने पर आलू, प्याज, लहसुन, गाजर और शकरकंद आदि की खेती करते हैं.
इन पैदावारों को सुरक्षित रखने के लिए किसानों के पास कोई विकल्प नहीं होता है. नतीजतन इन उत्पादों के नष्ट होने के डर से विवश होकर किसानों को इन्हें आढ़तियों और पैकारों के हाथों बेमौसम बेच देना पड़ता है. आढ़तियों और पैकारों से उन्हें उनकी उपज का लाभकारी मूल्य नहीं मिल पाता. फलस्वरूप उन्हें घाटा उठाना पड़ता है. बांका जिले के कृषि बाजार इसी वजह से बाहरी और स्थानीय आढ़तियों एवं पैकारों की नजर में रहे हैं.
पैदावार होते ही वे किसानों से संपर्क कर उन्हें स्टोरेज की समस्याओं का हवाला देकर उनसे उनकी खून पसीने की कीमत पर उगाई हुई उपज कौड़ी के भाव खरीद ले जाते हैं.
समय-समय पर उठती रही है मांग
कोल्ड स्टोरेज का अभाव बांका जिले में किसानों की बहुत बड़ी समस्या है. जिले के किसान समय – समय पर इसके लिए आवाज भी उठाते रहे हैं. कई अवसरों पर विभिन्न संगठनों की ओर से भी किसानों की इस मांग को आवाज दी गयी. लेकिन अब तक कोई नतीजा नहीं निकला. किसानों का कहना है कि यदि जिले में कोल्ड स्टोर की सुविधा मिले तो उनकी आर्थिक बेहतरी संभव है. क्योंकि तब पैदावार होते ही बिचौलिये उनकी उपज कौड़ी के भाव नहीं खरीद पायेंगे. लेकिन उनकी सुनता कौन है?
कृषि व सहकारिता विभाग भी उदासीन
किसानों को पैदावार संरक्षा के लिए कोल्ड स्टोर उपलब्ध कराना प्रारंभिक तौर पर कृषि एवं सहकारिता विभाग की जिम्मेदारी है. इन विभागों द्वारा जिले में कोल्ड स्टोर की स्थापना की दिशा में कोई पहल नहीं की जा सकी है. ऐसे में सामान्य किसानों की उपज का कोई माई बाप नहीं रह जाता. बड़े किसान आंशिक तौर पर अपनी उपज को कोल्ड स्टोरेज में संरक्षित करवा पाते है लेकिन वह भी भागलपुर या हंसडीहा जाकर.
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