चार घरों में जलापूर्ति को हर माह दो लाख खर्च

Published at :25 Feb 2016 6:24 AM (IST)
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चार घरों में जलापूर्ति को हर माह दो लाख खर्च

अनुमंडलीय अस्पताल में आपूर्ति के लिए बना जल मीनार अब सिर्फ चार घरों को पानी दे रहा है. उसमें भी दूषित और जहरीला जल परोस कर विभाग अपने ही कर्मियों की सेहत खराब कर रहा है. बांका : बांका में लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग सिर्फ 4 परिवारों को पानी पहुंचाने के लिए हर माह करीब […]

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अनुमंडलीय अस्पताल में आपूर्ति के लिए बना जल मीनार अब सिर्फ चार घरों को पानी दे रहा है. उसमें भी दूषित और जहरीला जल परोस कर विभाग अपने ही कर्मियों की सेहत खराब कर रहा है.

बांका : बांका में लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग सिर्फ 4 परिवारों को पानी पहुंचाने के लिए हर माह करीब दो लाख रुपये की राशि खर्च कर रहा है. वह भी उनके स्वास्थ्य और स्वच्छता का गला घोंट कर अव्वल तो यह की ये परिवार पीएचईडी कर्मियों के ही हैं, जो विभागीय कार्यालय कैंपस में बने क्वार्टरों में रहते है. विभागीय प्रमाद और लापरवाही का नमूना है यह. इसे देखने वाला कोई नहीं है. विभागीय पदाधिकारी भी नहीं. फलस्वरूप सब कुछ ऐसे ही चल रहा है और एक दो ही नहीं पिछले पांच वर्षों से चल रहा है.
सलाना 24 लाख का हो रहा व्यय
छोटी जल मीनार की जल धारण क्षमता 30 हजार गैलन है. जल उद्वह के लिए मीनार के ठीक नीचे पंप हाउस है. इस पर दो विभागीय कर्मचारियों की नियुक्ति है. इनके वेतन पर हर माह करीब 60 हजार रुपये व्यय होते हैं. इसके अलावा उनके विभिन्न भत्ते, व्यवस्था के रख रखाव और बिजली आदि पर भी खर्चे आते हैं. यह राशि प्रतिमाह तकरीबन 2 लाख तक पहुंच जाती है. यानि सलाना 24 लाख. इस राशि का व्ययन सिर्फ चार परिवारों को जलापूर्ति के लिए हो रहा है. दूसरी तरफ विभागीय अधिकारी इस बड़ी गलती से आंखें मूंदे बैठे है. जबकि इन क्वार्टरों में मोटर और टंकी लगाकर उन्हें बेहद कम खर्चे में जलापूर्ति की जा सकती है.
15 वर्षों से नहीं हुई टंकी की सफाई
उस पर तुर्रा यह कि जल मीनार से होने वाली जलापूर्ति विभागीय कर्मचारियों और उनके परिवार वालों के स्वास्थ्य और स्वच्छता के साथ खिलवाड़ के अलावा और कुछ नहीं है. जल मीनार के टंकी की 15 वर्षों से सफाई नहीं हुई है. इसमें 5 से 6 फीट तक जहरीला गाध जमा है. दर्जनों पक्षी इसमें मरे पड़े हैं. टंकी में उतरने के लिए लगी लोहे की सीढ़ी तक गलकर पानी में घुल चुकी है.
होती रही है जलमीनार के नाम पर लूट
ज्ञात हो कि इस जल मीनार की पाइप लाइन की मरम्मती के नाम पर कई बार लाखों की राशि का वारा न्यारा हो चुका है. पांच वर्ष पूर्व भी जब अनुमंडलीय अस्पताल बंद होने को था तब एक साजिश के तहत चार लाख की राशि पाइप लाइन की मरम्मती के नाम पर खर्च किये गये. जबकि मामूली तकनीकी गड़बड़ी की वजह से पाइप लाइन में जलापूर्ति नहीं हो पा रही थी. जिसे जल मीनार के पास ही खुरच कर ठीक कर दिया गया और इस तरह पूरी राशि गटक कर ली गयी.
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