वैज्ञानिक तरीके से खेती, कम लागत में अधिक उत्पादन

Published at :22 Nov 2015 8:43 PM (IST)
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वैज्ञानिक तरीके से खेती, कम लागत में अधिक उत्पादन

वैज्ञानिक तरीके से खेती, कम लागत में अधिक उत्पादन किसान जागरूकता महाअभियान सह रबी महोत्सव आयोजित फोटो है : फोटो संख्या 22 बीएएन 61 रबी महोत्सव का उद्घाटन करते अधिकारी एवं 62 उपस्थित किसानप्रतिनिधि, कटोरियाकृषि प्रौद्योगिकी प्रबंध अभिकरण (आत्मा) के सौजन्य से रविवार को कटोरिया प्रखंड मुख्यालय में किसान जागरूकता महाअभियान सह रबी महोत्सव 2015-16 […]

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वैज्ञानिक तरीके से खेती, कम लागत में अधिक उत्पादन किसान जागरूकता महाअभियान सह रबी महोत्सव आयोजित फोटो है : फोटो संख्या 22 बीएएन 61 रबी महोत्सव का उद्घाटन करते अधिकारी एवं 62 उपस्थित किसानप्रतिनिधि, कटोरियाकृषि प्रौद्योगिकी प्रबंध अभिकरण (आत्मा) के सौजन्य से रविवार को कटोरिया प्रखंड मुख्यालय में किसान जागरूकता महाअभियान सह रबी महोत्सव 2015-16 का आयोजन किया गया़ महोत्सव का उद्घाटन बीडीओ प्रेमप्रकाश, बीएओ प्रह्लाद मिश्र, कृषि वैज्ञानिक रघुवर साहु, इंटक के श्याम यादव एवं पंसस उमेश यादव ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया़ महोत्सव में उपस्थित किसानों का स्वागत करने के बाद बीडीओ प्रेम प्रकाश ने कहा कि आप सभी वैज्ञानिक तरीकों से खेती करें. इससे कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त होगा़ किसानों की आमदनी बढ़ेगी व आर्थिक स्थिति में भी सुधार होगा. कृषि विज्ञान केंद्र बांका से पहुंचे कृषि वैज्ञानिक डाॅ रघुवर साहु ने कहा कि बढ़ती जनसंख्या का भरण-पोषण सही ढंग से हो, इसके लिए बेहतर तरीका से खेती जरूरी है़ इसके लिए समय पर बुआई, कतारबद्ध बुआई, बीजोपचार आदि पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है़ उन्होंने किसानों से कहा कि खेत में नमी रहने पर ही रबी फसलों की बुआई करें. बुआई से पहले बीज का उपचार जरूरी है़ इससे बीज में कीड़े नहीं लगेंगे, रोग भी नहीं होंगे़ कतारबद्ध बुआई करने से पौधों को मिट्टी से पोषक तत्वों को खींचने में सहायता होती है़ खेतों में फसल की सुंदरता भी बढ़ती है़ बेहतर उत्पादन व बेहतर आमदनी के लिए वैज्ञानिक तरीके से खेती आवश्यक है़ उन्होंने गेहूं की खेती परंपरागत तरीकों से करने की बजाय सूई विधि से इसकी खेती करने के बारे में जानकारी दी़ प्रशिक्षण के क्रम में सरसों, मसूर, चना, गेहूं आदि फसलों की खेती के बारे में कई महत्वपूर्ण बातें बतायी गयी़ कृषि वैज्ञानिक ने बताया कि 2015 को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मृदा वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है़ सभी किसान अपने खेतों की मिट्टी की जांच करवायें, जरूरत के अनुसार ही सही मात्रा में सही उर्वरक का उपयोग करें. मौके पर कृषि समन्वयक कुंजेश, संदीप कुमार, मृत्युंजय राय, सहायक तकनीकी प्रबंधक सुभाष कुमार दास, लेखापाल बिपिन कुमार साह, कृषि सलाहकार मनोज कुमार सिंह, कुलदीप पंडित, राजीव कुमार गुप्ता के अलावा सैकड़ों की संख्या में किसान उपस्थित थे़

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