चांदन जलाशय से जुड़ा है मंदिर का इतिहास

Published at :18 Oct 2015 8:54 PM (IST)
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चांदन जलाशय से जुड़ा है मंदिर का इतिहास

चांदन जलाशय से जुड़ा है मंदिर का इतिहास फोटो 18 बांका 3 : दुर्गा मंदिर की तसवीर. प्रतिनिधि, बौंसी चांदन डैम शक्तिनगर में मां देवी की पूजा शक्ति के रूप में की जाती है. श्रद्धालुओं की मानें तो यहां जो भी मन्नतें मांगी जाती है मां की कृपा से वह अवश्य पूरी होती है. साठ […]

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चांदन जलाशय से जुड़ा है मंदिर का इतिहास फोटो 18 बांका 3 : दुर्गा मंदिर की तसवीर. प्रतिनिधि, बौंसी चांदन डैम शक्तिनगर में मां देवी की पूजा शक्ति के रूप में की जाती है. श्रद्धालुओं की मानें तो यहां जो भी मन्नतें मांगी जाती है मां की कृपा से वह अवश्य पूरी होती है. साठ के दशक में बने इस मंदिर का इतिहास चांदन जलाशय से जुड़ा हुआ है. जानकारों की मानें तो जिस वक्त डैम का निर्माण कार्य प्रारंभ हुआ था उस वक्त वहां हजारों की तादाद में मजदूर और कर्मी काम करते थे. जलाशय निर्माण कार्य में संवेदक राजकरण सिंह लेबर यूनियन के सचिव भी थे. 1967 में नवरात्र के समय वहां कार्य कर रहे लोगों ने डैम में ही मां की आराधना करने का मन बनाया. इसके पूर्व ये लोग वहां से पांच किमी दूर लक्ष्मीपुर इस्टेट में पूजा अर्चणा करने जाते थे. लेकिन सभी लोगों की इच्छा हुई कि यहां पर भी एक मंदिर का निर्माण हो तो 1968 में सभी के सहयोग से वहां भव्य मंदिर का निर्माण किया गया. मंदिर में राजस्थान के जयपुर से संगमरमर की पांच फीट आदमकद प्रतिमा को लाकर विधिवत स्थापित कर दुर्गा पूजा की शुरुआत हुई. वैष्णवी देवी होने की वजह से यहां बलि नहीं दी जाती और वैष्णव पद्घति से वैदिक रीति रिवाजों से पूजा अर्चणा की जाती है. मंदिर के सामने स्थित मैदान में तीन दिनों का मेला लगता है वहीं मंदिर से सटे मंच पर ग्रामीणों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है. मंदिर के पूजारी कृष्णशेखर पाठक उर्फ पप्पु ने बताया कि प्रतिदिन सुबह के पांच बजे मां की आरती के साथ पूजा का कार्यक्रम शुरू होता है. सुबह में नौ बजे पूजा के बाद दोपहर में 12 बजे मां को भोग लगाया जाता है. जबकि शाम में संध्या सात बजे आरती के बाद भोग लगाने के बाद मंदिर का पट बंद हो जाता है. मंदिर की भव्यता देखते ही बनती है. संध्या में जब मंदिर में रोशनी होती है तो मां की प्रतिमा अलौकिक आभा से दमकने लगती है. वहां के निवासी जिलापार्षद दिनेश ठाकुर, कांति यादव, भरत साह, चंदन पाठक आदि ने बताया कि यहां जो सच्चे दिल से मां की अाराधना करता है उनकी हर मुरादें पूरी होती है. बौंसी प्रखंड के 19 जगहों पर हो रही दुर्गा पूजा बौंसी. दुर्गा पूजा को लेकर बाजार में काफी चहल पहल है. दूसरे प्रदेशों में यहां से जाकर काम करने वाले निवासी अब धीरे – धीरे अपने घरों की ओर लौट रहे हैं बाजार में कपड़े की दुकान में खरीदारी को लेकर युवक युवतियों की भीड़ दिन भर जमी रहती है. बौंसी के पुरानी हाट परिसर, दुमका रोड स्थित दुर्गा मंदिर, दलिया स्थित काली मंदिर, देवी कैरी, कुड़रो, फागा, चांदन डैम, गोकुला, कुषमाहा सहित 19 जगहों पर मां की प्रतिमा स्थापित कर पूजा अर्चना की जा रही है. ध्वनि विस्तारक यंत्रों से हो रहे दुर्गा सप्तसती के पाठ से पूजा वातावरण भक्तिमय हो गया है.

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