आखिर कैसे हो पशुओं का इलाज

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 03 Apr 2015 8:25 AM

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बांका: जिले में मवेशी चिकित्सकों के 43 स्वीकृत पद की जगह वर्तमान में 15 चिकित्सक ही कार्यरत है. ऐसे में कैसे सरकार जिले में शत प्रतिशत किसी भी योजनाओं के सफल संचालन का दावा कर सकती है. जानकारी के अनुसार 31 दिसंबर 2014 को जिला पशुपालन पदाधिकारी डा.राम कुमार राम के सेवा निवृत्ति के बाद […]

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बांका: जिले में मवेशी चिकित्सकों के 43 स्वीकृत पद की जगह वर्तमान में 15 चिकित्सक ही कार्यरत है. ऐसे में कैसे सरकार जिले में शत प्रतिशत किसी भी योजनाओं के सफल संचालन का दावा कर सकती है. जानकारी के अनुसार 31 दिसंबर 2014 को जिला पशुपालन पदाधिकारी डा.राम कुमार राम के सेवा निवृत्ति के बाद से पद रिक्त है.

हालांकि, भ्रमणशील पशु चिकित्सा पदाधिकारी जमदाहा के डॉ निरंजन कुमार को अनुमंडल पशुपालन पदाधिकारी,पशु शल्य चिकित्सक(सजर्न), फ्रोजेन सिमेंस बैंक के परियोजना पदाधिकारी एवं जिला पशुपालन पदाधिकारी का प्रभार दिया गया है. वहीं पशु शल्य चिकित्सक का पद रिक्त है. जिला पशुपालन अस्पताल में कार्यरत डा.एजाज अकबर के द्वारा दैनिक कार्य के लिए इस पद का कार्य लिया जा रहा है.

अनुमंडल पशुपालन अस्पताल का भवन इतना जजर्र हो गया है कि इस भवन में कार्य कर रहे कर्मियों के साथ कभी भी कोई अनहोनी हो सकती है.वर्ष 2011 में जिला पशुपालन अस्पताल एवं पशु चिकित्सालय का नव निर्मित भवन का उदघाटन राम नारायण मंडल के कार्यकाल में हुआ था. इस भवन ने अभी चार वर्ष भी बरसात को नहीं ङोला पहले ही दुर्गति पर आंसू बहाने लगा.

भवन की छत से बरसात के मौसम में कई जगह पर पानी टपकता है जिसमें मुख्य भवन एवं शौचालय शामिल है.जिला पशुपालन कार्यालय में आत्मा द्वारा पांच लाख की राशि से सजाया गया फर्नीचर, उपस्कर व अन्य सामग्री में से दो एसी जो शुरुआत के समय में लगाये गये थे अब तक चालू नहीं हो पाया.

स्थिति यह है कि गर्मी परवान पर आने को है जिला पशुपालन पदाधिकारी के कार्यालय वेश्म में लगा पंखा भी खराब पड़ा है.ऐसे में कैसे अधिकारियों के द्वारा सुचारु रुप से कार्य किया जा सकता है.सरकार के द्वारा तकरीबन 25 प्रकार की दवा नि:शुल्क वितरण एवं पशु पालन अस्पताल में पशुपालकों की सेवा के लिए दी जानी है. जिसमें से जोंक एवं चमोकन की दवा के अलावे करीब आठ प्रकार का इंजेक्शन ही उपलब्ध है.शेष दवा का अभाव है. इधर विभागीय कर्मी का कहना है कि चिकित्सक के अभाव में पशुपालकों की समुचित सेवा नहीं हो पा रही है.

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