नकल को पसंद नहीं करते संघ के नेता

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 03 Apr 2015 12:04 AM

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बांका- फोटो : 2 बांका 20 और 21 : अनंत राय और आदित्य सिंहराज्य में शिक्षा व्यवस्था चौपट हो गयी हैनकल महामारी की तरह पूरे प्रदेश में फैल गयी है. इस राज्य में शिक्षा व्यवस्था चौपट हो चुकी है. हालत यह है कि यहां आठवीं की कक्षा पास नहीं किये, तो भी नौवीं की कक्षा […]

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बांका- फोटो : 2 बांका 20 और 21 : अनंत राय और आदित्य सिंहराज्य में शिक्षा व्यवस्था चौपट हो गयी हैनकल महामारी की तरह पूरे प्रदेश में फैल गयी है. इस राज्य में शिक्षा व्यवस्था चौपट हो चुकी है. हालत यह है कि यहां आठवीं की कक्षा पास नहीं किये, तो भी नौवीं की कक्षा में प्रवेश मिल जायेगी है. नौवीं में फेल हुए, तो भी दसवीं की परीक्षा में बैठ सकते हैं. ऐसे में कहां से कदाचार रुकेगा. क्या कदाचार से पास छात्र यूपीएससी और बीपीएससी की परीक्षा निकाल सकते हैं. इस पर छात्रों और उनके अभिभावकों को सोचना चाहिए. स्कूलों की हालत बदतर हो गयी है. न छात्र पढ़ते हैं न शिक्षक पढ़ाना चाहते हैं. नकल के विरोध में सिर्फ छात्र नेता उतरें, इससे काम नहीं बनने वाला. यह तभी होगा, जब बड़ी संख्या में छात्र भी इसके विरोध में आगे आएं. अभाविप शुरू से ही ऐसे कृत्यों का विरोध करती आ रही है और आगे भी जारी रहेगा.आदित्य सिंह, नगर मंत्री, अभाविपनकल रोकने के लिए सबसे पहले अभिभावकों को आगे आना होगा. बहुत से छात्रों के दिमाग में यही रहता है कि जब नकल से पास हो सकते हैं, तो फिर पढ़ने की क्या जरूरत. नकल वैसे ही लोग करते हैं, जो यह सोचते हैं कि मेरिट अच्छा रहेगा तो मेरिट के आधार पर होने वाली नियुक्तियों में लाभ मिल जायेगा. जिन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करनी है, वे नकल के भरोसे नहीं रहते. नकल की वजह से असली मेधा कुंठित हो रही है. वाकई अब समय आ गया है कि छात्र नेता नकल रोकने को लेकर मंथन करें. साथ ही नकल रोकने के लिए सिर्फ सरकार व प्रशासन को दोष देना ठीक नहीं है. इसके लिए समाज के सभी तबके को जिम्मेदारी के साथ आगे आना होगा, तभी नकल पर रोक संभव है.अनंत राय, छात्र राजद

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