किशनगंज में 15 मिनट तक अंधेरे में डूबा गांधी चौक, सुरक्षा तैयारियों को परखा गया
Published by : Pratyush Prashant Updated At : 15 May 2026 11:18 AM
किशनगंज में ब्लैकआउट के दौरान जिला प्रशासन
Kishanganj Blackout : किशनगंज शहर में गुरुवार शाम अचानक गांधी चौक की बत्तियां बुझते ही लोगों में हलचल मच गयी. हालांकि यह कोई बिजली कटौती नहीं थी, बल्कि आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की तैयारी को जांचने के लिए जिला प्रशासन द्वारा आयोजित विशेष ‘ब्लैक आउट’ मॉक ड्रिल थी.
Kishanganj Blackout : किशनगंज से राहुल की रिपोर्ट .जिला प्रशासन की ओर से शहर की सुरक्षा और आपदा प्रबंधन तैयारियों का जायजा लेने के लिए गांधी चौक पर 15 मिनट का ब्लैक आउट मॉक ड्रिल आयोजित किया गया. शाम सात बजे से सात बजकर पंद्रह मिनट तक पूरे इलाके की लाइटें बंद रखी गयीं. इस दौरान सुरक्षा बलों की सक्रियता, रिस्पांस टाइम और आपातकालीन प्रबंधन की क्षमता का परीक्षण किया गया.
वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में चला अभ्यास
इस विशेष मॉक ड्रिल का नेतृत्व जिलाधिकारी विशाल राज और पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार ने किया. मौके पर अनुमंडल पदाधिकारी अनिकेत कुमार, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी मंगलेश कुमार सहित कई प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी मौजूद रहे.
पूरे अभ्यास के दौरान अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था और बलों की तैनाती पर बारीकी से नजर रखी. अंधेरे के दौरान विभिन्न बिंदुओं पर तैनात जवानों की तत्परता का भी आकलन किया गया.
क्यों किया गया ब्लैक आउट मॉक ड्रिल
प्रशासन के अनुसार इस मॉक ड्रिल का मुख्य उद्देश्य युद्ध जैसी स्थिति, बड़े हादसे या किसी आपदा के दौरान शहर की तैयारियों को जांचना था. अधिकारियों का कहना है कि ऐसे अभ्यास से यह समझने में मदद मिलती है कि किसी भी अप्रत्याशित परिस्थिति में प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां कितनी तेजी और प्रभावी तरीके से काम कर सकती हैं.
जिलाधिकारी विशाल राज ने कहा कि भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए इस तरह के सुरक्षा अभ्यास बेहद जरूरी हैं. उन्होंने इसे नियमित सुरक्षा तैयारी का हिस्सा बताया.
आम लोगों ने भी दिया पूरा सहयोग
मॉक ड्रिल के दौरान गांधी चौक और आसपास के बाजारों में स्थित दुकानदारों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों ने भी प्रशासन का पूरा सहयोग किया. लोगों ने स्वेच्छा से अपनी दुकान और प्रतिष्ठानों की लाइटें बंद रखीं.
प्रशासन ने नागरिकों के सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि जनता की भागीदारी से ही ऐसे अभ्यास सफल हो पाते हैं. इस दौरान पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह सतर्क नजर आयी.
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By Pratyush Prashant
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.
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