किशनगंज में संस्कृत-उर्दू पर छिड़ा भाषाई विवाद: भाजपा नेता सुशांत गोप का कांग्रेस सांसद डॉ. जावेद पर पलटवार

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संस्कृत-उर्दू विवाद पर सांसद के बयान की आलोचना, भाजपा  ने उठाए सवाल

जिला बीस सूत्री उपाध्यक्ष सह वरीय भाजपा नेता सुशांत गोप | Prabhat Khabar Network

किशनगंज में संस्कृत और उर्दू को लेकर उभरे भाषाई विवाद पर भाजपा नेता सुशांत गोप ने कांग्रेस सांसद पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने सांसद के बयान को तथ्यहीन बताते हुए समाज में विद्वेष फैलाने का आरोप लगाया है.

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जिला बीस सूत्री उपाध्यक्ष सह वरिष्ठ भाजपा नेता सुशांत गोप ने स्थानीय सांसद के बयान की कड़ी भर्त्सना करते हुए इसे पूरी तरह तथ्यहीन और समाज में भाषाई विद्वेष फैलाने की कोशिश करार दिया है. भाजपा नेता ने दो टूक शब्दों में कहा कि सीमांचल के जनप्रतिनिधियों को भाषा जैसे बेहद संवेदनशील विषयों पर कोई भी टिप्पणी करने से पहले संयम बरतना चाहिए, ताकि क्षेत्र का सामाजिक सौहार्द प्रभावित न हो.

"संस्कृत भारतीय सभ्यता और ज्ञान की मूल भाषा है"

सांसद के कथित बयान पर पलटवार करते हुए भाजपा नेता सुशांत गोप ने संस्कृत के ऐतिहासिक और वैज्ञानिक महत्व को रेखांकित किया. उन्होंने कहा कि संस्कृत सिर्फ एक भाषा नहीं, बल्कि हमारी गौरवशाली भारतीय सभ्यता, संस्कृति और प्राचीन ज्ञान परंपरा की जननी (मूल भाषा) है. आज के दौर में संपूर्ण विश्व वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी संस्कृत के महत्व को खुले दिल से स्वीकार कर रहा है. आधुनिक युग में बोली जाने वाली देश की अधिकांश भारतीय भाषाओं पर संस्कृत का सीधा और गहरा प्रभाव है. ऐसे में इस महान भाषा की उपेक्षा करना या इस पर विवाद खड़ा करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है.

सीमांचल में ध्रुवीकरण और तुष्टीकरण का खेल खेलने का आरोप

भाजपा नेता ने कांग्रेस सांसद पर निशाना साधते हुए राजनीतिक आरोप भी मढ़े:

  • राजनीतिक ध्रुवीकरण: सुशांत गोप ने आरोप लगाया कि स्थानीय सांसद का यह बयान किसी विकासात्मक सोच से प्रेरित नहीं है, बल्कि सीमांचल के विशेष राजनीतिक माहौल में तुष्टीकरण और वोटों के ध्रुवीकरण को बढ़ावा देने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है.
  • जिम्मेदारी का अहसास: उन्होंने कहा कि एक सांसद का पद बेहद गरिमापूर्ण होता है, इसलिए उन्हें समाज को जोड़ने वाले बयान देने चाहिए, न कि समुदायों के बीच अनावश्यक विवाद पैदा करने वाले.

विद्यालयों में संस्कृत शिक्षा के व्यापक विस्तार की मांग

भाषाई बहस के बीच सुशांत गोप ने सरकार और शिक्षा विभाग से संस्कृत शिक्षा के संवर्धन के लिए विशेष कदम उठाने की मांग की है.

"संस्कृत को केवल पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों की भाषा मानकर एक सीमित दायरे में नहीं बांधा जाना चाहिए. बल्कि, नई शिक्षा नीति के तहत सरकारी और निजी विद्यालयों के साथ-साथ सभी प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों में इसके पठन-पाठन का व्यापक स्तर पर विस्तार होना चाहिए. हम उम्मीद करते हैं कि भविष्य में जिले के जनप्रतिनिधि ऐसे गैर-जिम्मेदाराना बयानों से परहेज करेंगे." — सुशांत गोप, उपाध्यक्ष (जिला बीस सूत्री) व भाजपा नेता, किशनगंज


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गौरव कुमार

लेखक के बारे में

By गौरव कुमार

गौरव कुमार प्रिंट माध्यम में 20 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 10 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. राजनीतिक, सामाजिक व अपराध की खबरों में विशेष रूचि है.

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