जीवन भोग के लिए नहीं भगवान के भजन के लिए है
Updated at : 12 Feb 2020 5:36 AM (IST)
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बौंसी : सत्संग व्यक्ति के चरित्र निर्माण के लिए होता है. यह जीवन भोग के लिए नहीं, भगवान के भजन के लिए मिला है. भगवान की भक्ति का रस ही संसार से बैराग दे सकता है. उक्त बातें झालर गांव में चल रहे श्रीमद् भागवत कथा के दौरान मंगलवार को कथावाचिका अर्चना सिंह ने अपने […]
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बौंसी : सत्संग व्यक्ति के चरित्र निर्माण के लिए होता है. यह जीवन भोग के लिए नहीं, भगवान के भजन के लिए मिला है. भगवान की भक्ति का रस ही संसार से बैराग दे सकता है.
उक्त बातें झालर गांव में चल रहे श्रीमद् भागवत कथा के दौरान मंगलवार को कथावाचिका अर्चना सिंह ने अपने प्रवचन में कही. उन्होंने उद्धव चरित्र रास पंचाध्याई गोपी गीत भगवान श्री कृष्ण के उत्सव आदि की चर्चा करते हुए कहा कि भगवान सत्य हैं, सर्वमान्य है, सर्वत्र हैं और सबके लिए हैं.
भगवान श्री कृष्ण जरासंध के साथ 17 बार युद्ध किये 18वीं बार धर्म की रक्षा के लिए रन छोड़कर द्वारिका चले गये और द्वारिकापुरी का निर्माण करवाया. कथा के बीच-बीच में बेहतरीन भजनों की प्रस्तुति दी गयी. जिसमें मुख्य रूप से मेरो तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई…,
मेरा आपकी कृपा से सब काम हो रहा है… आदि भजनों सुनकर श्रद्धालु झूमने पर मजबूर हो गये. कथा को सफल बनाने में दिनेश मंडल, पत्नी सरस्वती देवी, पंचानंद यादव, राम प्रसाद मंडल, चमेली देवी, जनार्दन पंडित, इंद्रदेव यादव, चंदा देवी, देवकी देवी, कल्पना देवी, कविता कुमारी, सुधा कुमारी, चांदनी देवी सहित अन्य मौजूद थे.
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