चूल्हे की चिंगारी से झुलस महिला की मौत

औरंगाबाद के नवीनगर में चूल्हे पर खाना बनाने के दौरान हादसा
औरंगाबाद के नवीनगर में चूल्हे पर खाना बनाने के दौरान हादसा रसोई गैस नहीं मिलने के कारण लकड़ी के चूल्हे पर बन रहा था भोजन बेटी ने कहा-रसोई गैस सिलिंडर उपलब्ध होता, तो शायद मां जिंदा होती प्रतिनिधि, औरंगाबाद/नवीनगर. औरंगाबाद जिले के नवीनगर प्रखंड के रामपुर गांव में एक हृदयविदारक हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया. सोमवार को 64 वर्षीय कबूतरी देवी की चूल्हे की चिंगारी से झुलसकर मौत हो गयी. यह घटना न केवल एक परिवार की त्रासदी है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रसोई गैस की अनुपलब्धता की गंभीर समस्या को भी उजागर करती है. मृत कबूतरी देवी सरयू पाल की पत्नी थी और अपने परिवार के साथ गांव में रहती थी. परिजनों के अनुसार, घर में पिछले कई दिनों से रसोई गैस सिलिंड नहीं मिलने के कारण खाना पारंपरिक चूल्हे पर ही बनाया जा रहा था. घटना के समय कबूतरी देवी चूल्हे के पास बैठी थी और अपने पोते के छोटे बच्चे के साथ खेल रही थी. इसी दौरान अचानक चूल्हे से निकली एक चिंगारी उनकी साड़ी पर जा गिरी और देखते ही देखते आग ने कपड़े को अपनी चपेट में ले लिया. आग इतनी तेजी से फैली कि आसपास मौजूद लोग कुछ समझ पाते, उससे पहले ही कबूतरी देवी बुरी तरह झुलस गयी. हालांकि, उनके पास खेल रहा मासूम बच्चा हादसे में सुरक्षित बच गया, जो राहत की बात रही. तमाम प्रयासों के बाद भी नहीं बची परिवार के सदस्यों ने तत्परता दिखाते हुए किसी तरह आग बुझायी और उन्हें गंभीर हालत में नवीनगर रेफरल अस्पताल पहुंचाया. अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उनकी हालत नाजुक देखते हुए उन्हें औरंगाबाद सदर अस्पताल रेफर कर दिया, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद इलाज के दौरान मौत हो गयी. चूल्हे का लेना पड़ा सहारा इस दुखद घटना के बाद पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गयी है. परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है. मृतका की बेटी संगीता देवी ने बताया कि अगर समय पर रसोई गैस उपलब्ध होती, तो शायद उनकी मां आज जीवित रहती. उन्होंने कहा कि गैस की कमी के कारण ही उन्हें चूल्हे का सहारा लेना पड़ा, जो अंततः इस हादसे का कारण बना. परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़ बताया जाता है कि कबूतरी देवी एक मेहनती और जिम्मेदार महिला थी, जो परिवार के हर सदस्य का ख्याल रखती थीं. उसकी मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है. एक बेटा और पांच बेटियां हैं, जिनमें सभी बेटियों की शादी हो चुकी है. हैरानी की बात यह रही कि परिजनों ने शव का पोस्टमार्टम नहीं कराया और सीधे अंतिम संस्कार के लिए घर ले गये. इस घटना के बाद पूरे रामपुर गांव में मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है.
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