Juvenile Justice Board का बड़ा फैसला, 30 दिन तक PHC में सेवा करेगा किशोर

Published by : Suryakant Kumar Updated At : 05 Jun 2026 5:02 PM

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व्यवहार न्यायालय औरंगाबाद

Aurangabad News: औरंगाबाद के किशोर न्याय बोर्ड (JJB) ने उत्पाद थाने से जुड़े एक मामले में बड़ा फैसला सुनाया है. बोर्ड के प्रधान दंडाधिकारी सुशील प्रसाद सिंह ने एक विधि विरुद्ध किशोर को ओबरा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) में 30 दिनों तक सामुदायिक सेवा करने का आदेश दिया है.

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Aurangabad News (औरंगाबाद से सुजीत कुमार सिंह की रिपोर्ट) :
किशोर न्याय बोर्ड (Juvenile Justice Board), औरंगाबाद ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए उत्पाद थाना से जुड़े एक मामले में विधि विरुद्ध किशोर को 30 दिनों तक सामुदायिक सेवा करने का आदेश दिया है. यह आदेश बोर्ड के प्रधान दंडाधिकारी सह एएसजेएम सुशील प्रसाद सिंह ने जीआर संख्या-1226/23, जेजेबी वाद संख्या-497/26 एवं उत्पाद थाना कांड संख्या-698/23 की सुनवाई पूरी होने के बाद पारित किया. कोर्ट के इस फैसले को बाल सुधार की दिशा में एक बेहद जरूरी कदम माना जा रहा है.

ओबरा पीएचसी में करनी होगी सेवा, पहचान रहेगी पूरी तरह गुप्त

मामले की कानूनी जानकारी देते हुए अधिवक्ता सतीश कुमार स्नेही ने बताया कि संबंधित किशोर को ओबरा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) में 30 दिनों तक सामुदायिक सेवा करनी होगी. इसके साथ ही बोर्ड ने स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को कड़ा निर्देश दिया है कि किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 की धारा-74 का पूर्णतः पालन सुनिश्चित किया जाए. इसके तहत किशोर की पहचान, नाम, पता और अन्य सभी व्यक्तिगत जानकारियों को पूरी तरह गोपनीय रखा जाएगा.

कार्य अवधि पूरी होने के बाद प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी कोर्ट को सौंपेंगे रिपोर्ट

न्यायालय के आदेश के अनुसार, सामुदायिक सेवा की 30 दिनों की अवधि पूरी होने के बाद, ओबरा पीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को किशोर के आचरण, व्यवहार एवं कार्य निष्पादन से संबंधित एक विस्तृत प्रतिवेदन (रिपोर्ट) निर्धारित समय सीमा के भीतर किशोर न्याय बोर्ड को सौंपना होगा. इस रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की समीक्षा की जाएगी कि किशोर के व्यवहार में कितना सकारात्मक बदलाव आया है.

दंडात्मक कार्रवाई के बजाय सुधारात्मक दृष्टिकोण पर बोर्ड का जोर

बोर्ड ने अपने आदेश में विशेष रूप से कहा कि यह निर्णय बच्चे के सर्वोत्तम हित और उसके उज्ज्वल भविष्य को ध्यान में रखते हुए लिया गया है. इसका मुख्य उद्देश्य दंडात्मक कार्रवाई के बजाय सुधारात्मक दृष्टिकोण अपनाना है, ताकि किशोर अपराध की दुनिया से दूर होकर समाज की मुख्यधारा से जुड़ा रहे और भविष्य में एक सकारात्मक जीवन की ओर अग्रसर हो सके. विशेषज्ञों के अनुसार, किशोर न्याय व्यवस्था में सामुदायिक सेवा को सुधार एवं पुनर्वास का सबसे प्रभावी माध्यम माना जाता है, जिससे बच्चों में सामाजिक जिम्मेदारी और अनुशासन की भावना विकसित होती है.

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