सनातन संस्कृति, मर्यादा व लोक मूल्यों का मंत्र है तुलसी साहित्य

Updated at : 03 Aug 2025 7:13 PM (IST)
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सनातन संस्कृति, मर्यादा व लोक मूल्यों का मंत्र है तुलसी साहित्य

मानस महामंडल के तत्वावधान में मिडिल स्कूल कुटुंबा में आयोजित की गई तुलसी जयंती

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मानस महामंडल के तत्वावधान में मिडिल स्कूल कुटुंबा में आयोजित की गई तुलसी जयंती कुटुंबा. संत शिरोमणि गोस्वामी तुलसीदास का काव्य संसार अत्यंत ही विस्तृत है. उनकी कृति रामचरित मानस अविरल भारतीय संस्कृति की मूल धरोहर है. तुलसी ने रामचरित मानस में व्यक्ति धर्म और लोकधर्म दोनों को समान महत्व दिया है. मनुष्य के लिए कर्म व परोपकार सबसे बड़ा धर्म है. किसी भी व्यक्ति को कोई ऐसा काम नहीं करना चाहिए, जिससे जगत जीव को कष्ट पहुंचे. प्रकृति की सुरक्षा तुलसी ने धर्म का अंग बनाया. इसका उदाहरण है कि मानस के सभी कांडों में प्राकृतिक चित्रण बहुतता से मिलती है. साहित्य उपासकों की संख्या बढ़ाने की जरूरत है. रामचरित मानस मनुष्य पर प्रभाव छोड़कर गया है. राष्ट्र निर्माण, प्रेम व भक्ति का बढ़ावा दिया है. उक्त बातें महामानस मंडल के तत्वावधान में मिडिल स्कूल कुटुंबा में आयोजित तुलसी जंयती के दौरान वक्ताओं ने कही. कार्यक्रम का उद्घाटन प्रो सिद्धेश्वर सिंह, प्रो शिवपूजन सिंह, समकालिन जवाबदेही के डॉ सुरेंद्र मिश्र व धंनजय जयपुरी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर और कवि के चित्र पर पुष्प अर्पित कर की गई. विचार गोष्ठी की अध्यक्षता रामलखन तिवारी व संचालन चंद्रशेखर प्रसाद साहु ने किया. प्रो सिद्धेश्वर सिंह ने कहा कि तुलसी साहित्य सनातन संस्कृति, मर्यादा व लोक मूल्यों का मंत्र है. उनकी रचना की भाषा जनभाषा है, लोक भाषा है. डॉ शिवपूजन सिंह ने कहा कि तुलसी दास ने रामचरित मानस की रचना कर अपने सामाजिक दायित्व की पूर्ति किया है. रामचरित मानस सामाजिक संस्कार को ऊंचा करने में महती भूमिका निभाया है. धनजंय जयपुरी ने कहा कि तुलसी दास का व्यक्तित्व विलक्षण से परिपूर्ण था. जन्म से लेकर रामचरित मानस के रचयिता होने तक इनमें विलक्षणता भरी थी. शिक्षक राजेश्वर सिंह तुलसी की रचना को अलौकिक बताया. कहा कि मानस की प्रासंगिकता दिन प्रति दिन बढ़ रही है. विचार गोष्ठी के दौरान कवि नागेंद्र दुबे व सुरेश विद्यार्थी ने मानस सस्वर पाठ से लोगों को भाव विभोर कर दिया. विनय मामूली बुद्धि ने कहा कि रामचरित मानस की पाठ नियमित रूप से करने से सुख शांति व समृद्धि आती है. पुरुषोत्तम पाठक ने कहा कि कार पर चलें, लेकिन संस्कार को न भूलें. तुलसी की रचनाओं को पढ़कर आप संस्कार अवश्य सीखें. मौके पर पूर्व मुखिया कुमारी सावित्री सिंह, सत्येंद्र सिंह, विनोद सिंह, उमेश सिंह, उपेंद्र सिंह, यदु मौआर, महेंद्र मेहता, रामनाथ साव, सरजू भगत, करीमन तिवारी, धनजंय पांडेय, रवींद्र तिवारी, अनिल सिंह, विनोद मेहता, तेजस्वी तिवारी, हर्ष कुमार, सोमनाथ प्रसाद व विजय मेहता आदि थे.

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