छह माह से वेतन बकाया : सफाईकर्मियों का समाहरणालय पर प्रदर्शन

औरंगाबाद जिले के विभिन्न विद्यालयों में साफ-सफाई की जिम्मेदारी संभाल रहे कर्मियों के सब्र का बांध सोमवार को टूट गया.
आउटसोर्सिंग एजेंसी पर लगाया शोषण का आरोप, जल्द भुगतान न होने पर दी उग्र आंदोलन की चेतावनी
जिले के विद्यालयों में तैनात कर्मियों के सामने आर्थिक संकट, पारिश्रमिक को लेकर टालमटोल का आरोप.फोटो नंबर-9- प्रदर्शन करती सफाई कर्मी
प्रतिनिधि, औरंगाबाद कार्यालयऔरंगाबाद जिले के विभिन्न विद्यालयों में साफ-सफाई की जिम्मेदारी संभाल रहे कर्मियों के सब्र का बांध सोमवार को टूट गया. पिछले छह महीनों से वेतन न मिलने से नाराज दर्जनों कर्मियों ने समाहरणालय पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारी कर्मियों ने जिला प्रशासन को सौंपे आवेदन में एक आउटसोर्सिंग एजेंसी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके श्रम का पारिश्रमिक रोककर उन्हें आर्थिक तंगी के मुहाने पर खड़ा कर दिया गया है. प्रदर्शन में शामिल कर्मियों ने बताया कि लगभग दो वर्ष पूर्व उनकी नियुक्ति एक निजी आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से की गयी थी. तब से वे नियमित रूप से विद्यालयों में सफाई कार्य कर रहे हैं, लेकिन बीते छह महीनों से उन्हें एक भी रुपये नहीं मिला है. इससे उनके परिवारों के सामने दैनिक खर्चों और बच्चों की पढ़ाई-लिखाई का संकट गहरा गया है. कर्मियों का आरोप है कि संबंधित एजेंसी के प्रतिनिधियों और अधिकारियों से कई बार गुहार लगाने के बावजूद केवल आश्वासन ही मिला, धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. प्रदर्शनकारियों ने यह भी उजागर किया कि एजेंसी उनसे निर्धारित समय से कहीं अधिक कार्य लेती है, परंतु इस अतिरिक्त श्रम का कोई भुगतान नहीं किया जाता. कर्मियों ने इसे सीधे तौर पर शोषण करार दिया है. उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि मामले में हस्तक्षेप कर जल्द से जल्द बकाया वेतन का भुगतान कराया जाए और लापरवाह एजेंसी के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए.
आंदोलन को और अधिक उग्र करने की चेतावनी
उल्लेखनीय है कि जिले के अधिकांश सरकारी विद्यालयों में साफ-सफाई का कार्य बाहरी एजेंसियों के भरोसे है. जहां कुछ प्रखंडों में व्यवस्था पटरी पर है, वहीं कई क्षेत्रों में भुगतान की अनियमितता लगातार सुर्खियां बन रही हैं. इस प्रदर्शन में मुख्य रूप से पार्वती देवी, रिंकू देवी, ममता देवी और पूजा देवी समेत बड़ी संख्या में सफाई कर्मी शामिल थीं. कर्मियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर त्वरित संज्ञान नहीं लिया गया, तो वे अपने हक के लिए आंदोलन को और अधिक उग्र बनाने के लिए बाध्य होंगे. फिलहाल, इस पूरे प्रकरण पर प्रशासनिक अधिकारियों की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है.
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