मध्यस्थता समय की आवश्यकता : प्रधान न्यायाधीश

Updated at : 02 Sep 2025 6:54 PM (IST)
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मध्यस्थता समय की आवश्यकता : प्रधान न्यायाधीश

मध्यस्थता के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि स्वच्छ समाज तथा स्वच्छ पारिवारिक वातावरण के निर्माण में मध्यस्थता का महत्वपूर्ण स्थान होता है

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औरंगाबाद शहर. परिवार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश सह मध्यस्थता निगरानी एवं पर्यवेक्षी समिति के अध्यक्ष अरुण कुमार के नेतृत्व में निगरानी एवं पर्यवेक्षी समिति की बैठक आयोजित की गयी. इस समिति में सदस्य के रूप में लोक अभियोजक पुष्कर अग्रवाल, सरकारी अधिवक्ता बिरजा प्रसाद सिंह, विधि संघ के अध्यक्ष विजय पांडेय, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वारा नामित अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष संजय सिंह, अपर जिला सत्र न्यायाधीश पंकज पांडेय एवं प्रशिक्षित मध्यस्थ अरुण तिवारी तथा मध्यस्थता समन्वयक सह जिला विधिक सेवा प्राधिकार की सचिव तान्या पटेल उपस्थित रहीं. इस बैठक में प्रधान न्यायाधीश ने बताया कि वादों के निस्तारण में मध्यस्थता का प्रयोग करें. वर्तमान परिस्थिति के अनुरूप मध्यस्थता समय की आवश्यकता है. मध्यस्थता के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि स्वच्छ समाज तथा स्वच्छ पारिवारिक वातावरण के निर्माण में मध्यस्थता का महत्वपूर्ण स्थान होता है. प्रधान न्यायाधीश ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार 90 दिनों का विशेष मध्यस्थता अभियान चलाया जा रहा है, जिसके अंतर्गत वैवाहिक विवाद मामले, दुर्घटना दावा मामले, घरेलू हिंसा मामले, चेक बाउंस मामले, वाणिज्यिक विवाद मामले, सेवा मामले, आपराधिक समझौता योग्य मामले, उपभोक्ता विवाद मामले, ऋण वसूली मामले, विभाजन मामले, बेदखली मामले, भूमि अधिग्रहण मामले, अन्य उपयुक्त सिविल मामले को प्रमुखता से निस्तारण की कार्रवाई की जा रही है. इसके लिए सभी को लगातार पहल करने की जरूरत है. बताया गया कि बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार के निर्देश अंतर्गत राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण ने मध्यस्थता एवं सुलह परियोजना समिति, सर्वोच्च न्यायालय के सहयोग से मुख्य न्यायाधीश , न्यायमूर्ति सह राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष और एमसीपीसी के अध्यक्ष के मार्गदर्शन में विशेष मध्यस्थता अभियान मध्यस्थता राष्ट्र के लिए पूरे भारत में चलाया जा रहा है जिसके अंतर्गत अनुमंडलीय व्यवहार न्यायालय, दाउदनगर और व्यवहार न्यायालय, औरंगाबाद में लंतित वैसे वादों को चिह्नित करते हुए पक्षकारों को सूचित करने के लिए अपील की गयी. प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि तालुका न्यायालय और जिला न्यायालय में लंतित मामलों को मध्यस्थता के माध्यम से निपटाने के लिए 90 दिनों का गहन विशेष अभियान है जिसके माध्यम से अधिक से अधिक लोगों को जोड़ते हुए इसका लाभ पहुंचाना है. प्रधान न्यायाधीश द्वारा अपील की गयी कि उक्त मामलों के निस्तारण में मध्यस्थता एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है जिसका उपयोग अधिक से अधिक लोगों को करना चाहिए और इसके लिए सभी संबंधित को पूर्ण सहयोग की आवश्यकता है. प्रधान न्यायाधीश ने बताया कि न्यायालय में लंबित मामलों के साथ-साथ वाद लाने के पूर्व तथा कई स्तरों पर मध्यस्थता की कार्रवाई की जाती है. जिला विधिक सेवा प्राधिकार की सचिव ने बताया कि इस मध्यस्थता विशेष अभियान के लिए कई स्तरों पर पारा विधिक स्वयं सेवकों के सहयोग से प्रचार-प्रसार कराया गया है और वर्तमान परिस्थिति के अनुरूप इसका सुखद फल मिल रहा है और लोग इससे लाभान्वित भी हो रहे हैं.

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