बिहार में अप्रैल में ही बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे लोग, किल्लत ऐसी कि गंदे पानी का लेना पड़ रहा सहारा

ग्रमीणों की तस्वीर
Bihar News: अप्रैल महीने में ही बिहार में लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं. मामला औरंगाबाद जिले का है जहां के महादलित बस्ती में हर साल गर्मी के मौसम में भारी परेशानी झेलनी पड़ती है. किल्लत ऐसी है कि लोग हर रोज पानी के लिए तरस रहे हैं.
Bihar News: औरंगाबाद जिले के मदनपुर प्रखंड के महुआवा पंचायत के सांवा बिगहा महादलित बस्ती में गर्मी के कारण पेयजल को लेकर हालात विकराल है. लगभग 400 आबादी वाले इस गांव में लोगों को गांव से एक किलोमीटर दूर कुएं से गंदा पानी लाकर अपना काम चलाना पड़ रहा है. पानी की कमी इस कदर है कि या तो आप प्यास बुझा सकते हैं या फिर स्नान कर सकते हैं. गांव में किसी ने दो तो किसी ने चार दिनों से नहाया नहीं है.
यहां नल जल की तमाम प्रक्रिया पूरी हुई है लेकिन सप्लाई अनियमिता की भेट चढ़ गई है. ऐसे में गांव से कुछ दूर पर स्थित कुएं का गंदा पानी सहारा बन गया है. लोग सुबह से ही पानी की जुगाड़ में लग जाते हैं. गर्मी शुरू होते ही यहां के चापाकल सूख गए, जिसके कारण अब ग्रामीणों के लिए पेयजल का कोई इंतजाम नहीं है. नल जल योजना के तहत बना जल मीनार शोभा की वस्तु बनकर रह गई है. जिस कारण हर दिन पानी की तलाश में लोगों को भटकना पड़ता है.
गंदे पानी से बीमारी की आशंका
कुएं का पानी भले ही प्यास बुझा रहा हो, लेकिन गंदे पानी से लोगों को बीमारी की भी आशंका है. ग्रामीणों ने बताया कि कुएं के पानी से संक्रामक बीमारियां फैलने की आशंका है, लेकिन उनके पास कोई दूसरा रास्ता नहीं है. बहुत से लोग हैं जो दो से तीन दिन पर स्नान कर रहे हैं. शादी विवाह का सीजन चल रहा है. पानी की किल्लत तो उनके सामने इस सीजन में सबसे बड़ी समस्या है.
क्या कहना है लोगों का?
लोगों को कहना है एक तो रसोई गैस से परेशानी उठानी पड़ रही है और दूसरी पानी की समस्या उनके सामने सबसे बड़ी समस्या बनी हुई है. ग्रामीणों की मांग है कि जिला प्रशासन इस ओर ध्यान दें. पहाड़ी इलाके में जल संकट से निपटने के लिए विभाग की ओर से कार्य योजना बनाई जाए जिससे ग्रामीणों को पानी के लिए भटकना नहीं पड़े.
ग्रामीणों ने यह भी बताया कि गंदे पानी के लिए भी एक किलोमीटर दूर सफर करना पड़ता है. खेत में बने कुएं से पानी ला रहे हैं. यहां दिन भर कुएं से पानी ढोने के लिए महिलाएं और बच्चों की भीड़ लगी रहती है. भीषण गर्मी में पानी के लिए मशक्कत करनी पड़ रही है. पानी की वजह से दूसरा काम नहीं हो पा रहा है. घर की महिलाएं मजदूरी के लिए भी नहीं जा पा रही है.
नहीं हो रही सुनवाई
ग्रामीणों के मुताबिक, पानी को लेकर कोई भी गंभीर नहीं है. जनप्रतिनिधियों को कई बार अवगत कराया जा चुका है. कई बार पीएचईडी के अधिकारियों को भी समस्या से अवगत कराया गया है, लेकिन अभी तक जल संकट से निपटने के लिए कोई इंतजाम नहीं हुआ है. एक हैंड पंप था वह भी कम पानी दे रहा है. अगर कुआं सूख जाए तो उनका जीवन हमेशा के लिए सूख जाएगा.
गर्मी में पहाड़ किनारे बसे गांव में हर साल होती है पानी की किल्लत
गर्मी के चलते मदनपुर प्रखंड के पहाड़ किनारे बसे गांवों में पानी की समस्या हर साल होती है. सरकार गांव में पानी की समस्या दूर करने के लिए जितना प्रयास कर रही है वह कारगर साबित नहीं हो रही है. नल जल योजना सिर्फ कागजों में ही ग्रामीणों की प्यास बुझा रही है. हकीकत में कई गांव के लोगों को पानी के लिए बूंद-बूंद के लिए तरसना पड़ रहा है. महुआवा पंचायत के सांवा बिगहा गांव इसका उदाहरण है.
यहां नल जल योजना नाम के लिए संचालित है. गांव के लोग अभी हैंडपंप और कुएं के भरोसे हैं. इस गांव में नल जल योजना सालों से ठप पड़ी है. पिछले दिनों ग्रामीणों ने पानी की समस्या को लेकर प्रदर्शन किया और अपनी समस्या प्रभात खबर टीम के सामने रखी. ग्रामीणों ने बताया कि जितना बोरिंग नल जल योजना के तहत करना था उतना नहीं कराया गया है और इसके कारण पानी की समस्या उत्पन्न हो रही है. ग्रामीण पानी की समस्या की निराकरण की मांग जिला अधिकारी से की है.
क्या कहते हैं प्रखंड विकास पदाधिकारी?
प्रखंड विकास पदाधिकारी डॉक्टर अवतुल्य कुमार आर्य ने बताया कि नल जल योजना खराब होने की जानकारी मिली है. पीएचईडी विभाग के अधिकारियों को ठीक करने के लिए निर्देश दिया गया है. जल्द गांव में पेयजल आपूर्ति कराया जाएगा.
(औरंगाबाद से सुजीत कुमार सिंह की रिपोर्ट)
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By Preeti Dayal
डिजिटल जर्नलिज्म में 3 साल का अनुभव. डिजिटल मीडिया से जुड़े टूल्स और टेकनिक को सीखने की लगन है. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हूं. बिहार की राजनीति और देश-दुनिया की घटनाओं में रुचि रखती हूं.
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