Aurangabad News : शस्त्र व शास्त्र के ज्ञाता भगवान परशुराम की मनायी गयी जयंती

Published by :AMIT KUMAR SINGH_PT
Published at :19 Apr 2026 9:27 PM (IST)
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Aurangabad News : शस्त्र व शास्त्र के ज्ञाता भगवान परशुराम की मनायी गयी जयंती

Aurangabad News: सनातन संस्कृति की रक्षा के लिए भगवान परशुराम ने अधर्मियों को किया था संहार

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औरंगाबाद/कुटुंबा. सनातन संस्कृति की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने अपने छठे अवतार में परशुराम का रूप धारण किया था. वक्ताओं ने कहा कि भगवान परशुराम किसी जाति, वर्ण या वर्ग के नहीं, बल्कि समस्त मानव मात्र के आराध्य हैं. उन्होंने धर्म की रक्षा और अत्याचारियों के संहार के लिए धरती को पाप के भार से मुक्त किया. भगवान परशुराम ने विश्व कल्याण के लिए आवश्यक सभी विद्याओं को अपनाया और 21 बार प्रजा शोषक, धर्मांध, अहंकारी, आतताई व दुराचारी राजाओं का संहार किया. वक्ताओं के अनुसार, आज भी जब-जब धरती पर अन्याय और अत्याचार बढ़ता है, तब भगवान परशुराम विभिन्न रूपों में प्रकट होकर आसुरी शक्तियों का नाश करते है. रविवार को प्रखंड मुख्यालय अंबा में सतबहिनी माई के आंचल तले भगवान परशुराम की जयंती धूमधाम से मनयी गयी. अक्षय तृतीया के अवसर पर ब्रह्मर्षि विकास एवं जन कल्याण मंच के बैनर तले आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ समाजसेवी निलेश पांडेय, पंचदेव धाम चपरा के पतंजलि प्रभारी वृजमोहन शर्मा, भरत मिश्र, राधेकृष्ण पांडेय, रौशन कुमार, अरुण कुमार मिश्र, राजीव कुमार, विपुल पांडेय, मौसम वैज्ञानिक अनूप पांडेय, अजय कुमार पांडेय सहित अन्य अतिथियों ने भगवान परशुराम के चित्र पर पुष्प अर्पित कर और दीप प्रज्ज्वलित कर किया. कार्यक्रम की अध्यक्षता मंच के अध्यक्ष अजीत कुमार और श्रीमन्न कुमार ने की, जबकि संचालन शिक्षक वेद प्रकाश तिवारी ने किया. निलेश पांडेय ने कहा कि भगवान परशुराम सनातन धर्म के धरोहर हैं और अंबा में उनकी प्रतिमा स्थापित की जानी चाहिए. इस दौरान आयोजन समिति के सदस्यों ने अतिथियों को अंगवस्त्र एवं भगवान परशुराम का चित्र भेंट कर सम्मानित किया. वक्ताओं ने बताया कि जमदग्नि और रेणुका के पुत्र राम ने भगवान शिव की कठिन तपस्या की थी, जिसके बाद शिव ने उन्हें दिव्यास्त्र ‘परशु’ प्रदान किया, तभी से वे परशुराम कहलाये. भगवान परशुराम शस्त्र और शास्त्र दोनों के ज्ञाता थे और धर्म रक्षा के लिए आवश्यकता अनुसार दोनों का उपयोग किया. शिक्षक राजीव रंजन कुमार ने कहा कि यदि भगवान परशुराम किसी समाज से वैर रखते तो वे भीष्म पितामह, द्रोणाचार्य और कर्ण को अपना शिष्य नहीं बनाते. मौसम वैज्ञानिक शिवशंकर पांडेय ने कहा कि भगवान परशुराम विष्णु के ऐसे अवतार हैं जिनका उल्लेख त्रेतायुग और द्वापर दोनों युगों में मिलता है. कार्यक्रम में राधेकृष्ण पांडेय, रमेश पांडेय, जयनारायण पांडेय, प्रो दिलीप कुमार, मदन पाठक, ओमप्रकाश शर्मा, अखिलेश पांडेय सहित कई वक्ताओं ने अपने विचार रखे. इस अवसर पर अंकित पाठक, पंचम पांडेय, चंदन तिवारी, रौशन तिवारी, राजेंद्र पांडेय, ललन सिंह, जयप्रकाश पाठक, छोटू पाठक, विनोद पांडेय, शिवम पांडेय, राहुल कुमार, निरंजन कुमार, नरेंद्र तिवारी सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे.

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