Aurangabad News: 26 से 31 मई के बीच होगा सशक्त स्थाई समिति का चुनाव, नगर निकायों में बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी
Published by : Vivek Pandey Updated At : 19 May 2026 12:51 PM
Aurangabad News: पहले स्थगित हो चुकी थी चुनाव प्रक्रिया, अब नए निर्देश के बाद दावेदार सक्रिय
Aurangabad News: (ओम प्रकाश) औरंगाबाद जिले में बिहार के नगर निकायों में सशक्त स्थाई समिति सदस्य पद के निर्वाचन का रास्ता आखिरकार साफ हो गया है. नगर विकास एवं आवास विभाग के अपर सचिव मनोज कुमार ने मंगलवार को सभी डीएम सह जिला निर्वाचन पदाधिकारी (नगरपालिका) को पत्र जारी कर 26 मई से 31 मई के बीच चुनाव प्रक्रिया पूरी कराने का निर्देश दिया है. आदेश जारी होते ही औरंगाबाद जिले समेत विभिन्न नगर निकायों में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है.
इससे पहले विभाग ने 15 अप्रैल से 25 अप्रैल के बीच चुनाव कराने का निर्देश दिया था. कई जिलों में तिथियां भी निर्धारित कर दी गई थीं, लेकिन 15 अप्रैल को जारी विभागीय पत्र में अपरिहार्य कारणों का हवाला देते हुए चुनाव प्रक्रिया को अगले आदेश तक स्थगित कर दिया गया था. हालांकि जिन नगर निकायों में चुनाव पहले ही संपन्न हो चुका था, वहां निर्वाचित समितियों को कार्य करने की अनुमति दे दी गई थी.
जिले के छह नगर निकायों में होगा चुनाव
औरंगाबाद जिले के छह नगर निकायों में पहले 16 अप्रैल को चुनाव प्रस्तावित था, लेकिन स्थगन आदेश के कारण प्रक्रिया रुक गई थी. अब नए आदेश के बाद सभी की निगाहें डीएम द्वारा घोषित की जाने वाली नई तिथियों पर टिकी हैं.
जानकारी के अनुसार, औरंगाबाद नगर परिषद में सशक्त स्थाई समिति के पांच सदस्यों का चुनाव होना है. वहीं दाउदनगर नगर परिषद में तीन सदस्य चुने जाएंगे। इसके अलावा रफीगंज, नवीनगर, देव और बारुण नगर पंचायतों में भी तीन-तीन सदस्यों का निर्वाचन कराया जाएगा.
संभावित उम्मीदवारों ने तेज किया जनसंपर्क
नया आदेश जारी होते ही संभावित उम्मीदवार सक्रिय हो गए हैं. पार्षदों को अपने पक्ष में गोलबंद करने के लिए लगातार बैठकों, व्यक्तिगत संपर्क और रणनीतिक चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है. कुछ दावेदार अपने पुराने कार्यों को आधार बनाकर समर्थन जुटा रहे हैं, तो कुछ विकास योजनाओं और नए वादों के सहारे चुनावी मैदान में उतर चुके हैं.
समिति को माना जाता है सबसे प्रभावशाली इकाई
नगर निकायों में सशक्त स्थाई समिति को सबसे प्रभावशाली इकाई माना जाता है. विकास योजनाओं की स्वीकृति, वित्तीय निर्णय और प्रशासनिक मामलों में इसकी अहम भूमिका होती है. पहले समिति के सदस्यों का मनोनयन मुख्य पार्षद के विवेक पर निर्भर करता था, लेकिन अब चुनावी प्रक्रिया लागू होने से पार्षदों को लोकतांत्रिक तरीके से चुने जाने का अवसर मिल रहा है. यही कारण है कि इस बार दावेदारों की संख्या भी बढ़ती नजर आ रही है.
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लेखक के बारे में
By Vivek Pandey
विवेक पाण्डेय टीवी चैनल के माध्यम से पिछले 6 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हूं . करियर की शुरुआत Network 10 National News Channel से की. अभी प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम में काम कर रहा हूं. देश और राज्य की राजनीति, कृषि और शिक्षा में रुचि रखते हैं.
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