Aurangabad News : एकीकृत कृषि अपनाएं, आय में होगी वृद्धि, कम होगा जोखिम

Published by : AMIT KUMAR SINGH_PT Updated At : 04 Jun 2025 10:48 PM

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अंबा में आयोजित खरीफ महाभियान में विशेषज्ञों ने खेती के नवीनतम तकनीक की दी जानकारी

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औरंगाबाद/अंबा. भारतीय मूल में जब से कृषि का अविष्कार हुआ है, लोगो में संपन्नता आयी है. इसके बाद से कृषि व पशुपालन का प्रचलन बढ़ा है. वर्तमान परिवेश में खेती से किसानों के आय दुगनी करने के लिए कृषि में नित्य नये-नये प्रयोग किये जा रहें है. मशीनीकरण के युग में परंपरागत खेती को अपेक्षा आधुनिक तकनीक से खेती की जा रही है. ऐसे में किसानों को कम लागत में अधिक उत्पादन का लाभ मिल रहा है. ये बातें बुधवार को इ-किसान भवन अंबा में आत्मा के तहत आयोजित खरीफ महाभियान सह किसान प्रशिक्षण के दौरान कृषि विशेषज्ञों ने कही. कार्यक्रम का उद्घाटन उप परियोजना निदेशक (आत्मा) शालिग्राम सिंह, मौसम वैज्ञानिक डॉ अनूप कुमार चौबे, आत्माध्यक्ष वृजकिशोर मेहता, प्रशिक्षु बीएओ कुमारी साक्षी गुप्ता व राम प्रकाश कुमार विंद ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया.

एकीकृत कृषि अपनाकर सीमित संसाधनों में बेहतर करने का करें प्रयास

उप परियोजना निदेशक श्री सिंह ने कहा कि कृषको के पास अब भूमि सीमित रह गयी है. उन्हें एकीकृत कृषि प्रणाली अपनाकर सीमित संसाधनों में आय की वृद्धि करनी होगी. इधर किसान कर क्या रहें हैं, कि कृषि से अधिक उपज प्राप्त करने के लिए अंधाधुंध यूरिया का प्रयोग कर रहे हैं, जो कतई उचित नही है. इससे एक तरफ पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है, दूसरे तरफ भूमि की उर्वरा शक्ति क्षीण होती चली रही है. उन्होंने बताया कि एकीकृत कृषि प्रणाली में गृहस्थी के सभी घटक फसल उत्पादन, मधुमक्खी पालन, मवेशी पालन, फल फूल व सब्जी का उत्पादन, मुर्गी पालन, मछली पालन व वानिकी आदि को समेकित किया जाता है. एकीकृत प्रणाली को अपनाकर खेती के जोखिमों को कम किया जा सकता है. उन्होने कहा कि इस प्रणाली से संग्रहित जल से उपज में वृद्धि की जा सकती है.

जमीन के अनुसार प्रभेद का करें चयन : चौबे

मौसम वैज्ञानिक डॉ अनूप कुमार चौबे ने कहा कि किसानों को जमीन के अनुसार धान के प्रभेद का चयन करना चाहिए. खरीफ फसल के लिए बीज बहुत मायने रखता है. उन्होंने नर्सरी की तैयारी से लेकर बिचड़ा गिराने व धान की रोपाई खर पतवार नियंत्रण कीट ब्याधि सिचाई आदि के बारे में विस्तार से बताया. कहा कि नर्सरी में बिचड़ा जब 25 दिन का हो जाये तो उसे उखाड़कर कादो में एक पौधा लगाना चाहिए. इसी तरह से 30 दिन से अधिक के होने पर दो और 40 दिनों से अधिक के होने पर तीन पौधा की रोपाई की जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि किसान को खेत तैयार करते समय प्रति कट्ठा 750 ग्राम यूरिया, एक किलो डीएपी व 600 ग्राम पोटाश का प्रयोग करना चाहिए.

मिट्टी परीक्षण जरूरी

प्रशिक्षु बीएओ श्री बिंद ने कहा कि बेहतर खेती के लिए मिट्टी परीक्षण जरूरी है. इससे खेत के स्वास्थ्य के बारे में पता चल जाता है व इसके बाद जैविक या रसायनिक उर्वरक के प्रयोग करने में सहूलियत होती है. उन्होंने कहा कि इधर असंतुलित मात्रा में यूरिया के प्रयोग करने से फसल मे बीमारी व कीट व्याधि का भयंकर अटैक हो रहा है. किसान आत्माध्यक्ष ने खरीफ महोत्सव में स्ट्रॉबेरी सेव व केला की खेती के बारे में बताया. कहा कि किसान अनाज के साथ फल फूल की खेती करेंगे तो समृद्धि आयेगी.

फल फूल व सब्जी की खेती पर जोर

पौधा संरक्षक राजेश्वर राम ने कहा कि सरकार के उद्यान विभाग फल फूल के साथ साग-सब्जी की खेती विस्तारित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है. इसके लिए किसानों को अनुदानित दर पर आम, अमरूद, नींबू, नारियल, केला, पपीता, सेव, ड्रायगनफ्रूट, अंजीर आदि के साथ भिंडी, कद्दू, करेला, आलू,प्याज, धनिया, मेथी सब्जी फसल की बीज दी जा रही है. उन्होंने बताया कि बेरोजगार युवाओं के बेहतरी के लिए मशरूम उत्पादन मधुमक्खी पालन की सुविधा है. स्ट्राबेरी उत्पादको को भी अनुदान दिया जा रहा है.

मौसम का प्रतिकूल पड़ रहा है प्रभाव

मौसम वैज्ञानिक डॉ चौबे के कहा कि जलवायु परिवर्तन का प्रभाव फसल के उत्पादन पर पड़ रहा है. पर्यावरण प्रदूषण के चलते जलवायु परिवर्तन में अनिश्चिता आ गयी है. गर्मी में बरसात जैसा मौसम का नजारा दिखता है. वर्षा ॠतु में चिलचिलाती धूप लोगो को घर में दुबकने के लिए विवश कर दे रही है. उन्होंने कहा कि लंबी अवधी के धान का बिचड़ा अब तक डाल दिया जाना चाहिए था. पर अब तक किसान नर्सरी के लिए खेतो की तैयारी शुरू नहीं किये है. उन्होंने बताया कि धान के नर्सरी तैयार करते समय अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या इससे कम रहने पर बीज का अंकुरण अच्छा होता है. वैसै रोहिणी नक्षत्र को अच्छी खेती के लिए वरदान माना गया है. रोहिणी नक्षत्र में लंबी अवधि वाले धान के प्रजातियों का नर्सरी में बीज डालना शुभ माना गया है. किसानों का भी मानना है कि इस नक्षत्र में बीज डालने से खेती आगे होती है. इसके पहले नक्षत्र के अनुसार मौसम अनुकूल रहता था. अब फसल पर मौसम का प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा हैं. उन्होंने किसानो को जलवायु आधारित खेती करने की नसीहत दी. मौके पर को-ऑर्डिनेटर परशुराम कुमार, संजीव कुमार योगेंद्र कुमार, एटीएम जूही कुभारी, सलाहकार मुरारी राम, रमेश शर्मा, संजीव कुमार, आकाश कुमार, चितरंजन कुमार, रंजीत कुमार व दीपक कुमार, अर्जुन प्रसाद, सौरभ कुमार आदि थे. समेत दर्जनो की संख्या में अन्नदाता मौजूद थे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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