अब नहीं बिगड़ेगा सामाजिक सौहार्द !
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :21 Apr 2016 7:31 AM (IST)
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पहल. जिले में डीजे पर पूर्ण प्रतिबंध के लिए प्रशासन चला रहा अभियान पर्व-त्योहारों के दौरान डीजे बजाने को लेकर होनेवाले विवाद को देखते हुए जिला प्रशासन ने इसे पूरी तरह से प्रतिबंधित करने का फैसला लिया है. पूरे जिले में एक अभियान चलाया जा रहा है. इससे दर्जनों सामाजिक संगठनों व बुद्धिजीवी वर्ग के […]
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पहल. जिले में डीजे पर पूर्ण प्रतिबंध के लिए प्रशासन चला रहा अभियान
पर्व-त्योहारों के दौरान डीजे बजाने को लेकर होनेवाले विवाद को देखते हुए जिला प्रशासन ने इसे पूरी तरह से प्रतिबंधित करने का फैसला लिया है. पूरे जिले में एक अभियान चलाया जा रहा है. इससे दर्जनों सामाजिक संगठनों व बुद्धिजीवी वर्ग के लोग जुड़ रहे हैं.
औरंगाबाद कार्यालय : औरंगाबाद जिले में डीजे बजाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के लिए एक अभियान चलाया जा रहा है.
अभियान की शुरुआत गत 18 अप्रैल से हो चुकी है, जिसका समापन 30 अप्रैल को नगर भवन में होगा. इस अभियान का नेतृत्व स्वयं डीएम कंवल तनुज व एसपी बाबू राम कर रहे हैं. इस अभियान में जिले के 50 से भी अधिक बुद्धिजीवी वर्ग जुड़ चुके हैं और इनके लगातार जुड़ने का सिलसिला चल रहा है. सबसे अधिक लोग उन जगहों से जुड़ रहे हैं, जहां डीजे को लेकर सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ा है और मारपीट व झड़प जैसी घटनाएं होती रही हैं.
एसपी बाबू राम द्वारा दी गयी जानकारी के अनुसार इस अभियान में दाउदनगर से सबसे अधिक लोग जुड़े हैं. दूसरे स्थान पर औरंगाबाद शहर के लोग हैं. इस अभियान से हिंदू-मुसलिम दोनों समुदायों के लोग जुड़ रहे है. पुलिस प्रशासन को फोन कर लोग कह रहे हैं कि इस अभियान को हर हाल में सफल बनाया जाये. लोगों का कहना है कि अमन-चैन छीनने का सबसे बड़ा दुश्मन डीजे है, इस पर अविलंब प्रतिबंध लगाया जाये. औरंगाबाद से डीजे पर प्रतिबंध लगाने की शुरुआत हो, जो पूरे प्रदेश में लागू हो.
डीजे को लेकर ही अक्सर होती है झड़प : औरंगाबाद शहर में जब भी कोई बड़ा त्योहार आता है, तो उसमें डीजे का उपयोग लोग प्रतिद्वंद्विता के भाव से करते है. अगर मुहर्रम में एक डीजे पर आठ साउंड बॉक्स लगाये गये, तो दशहरे में लोग 10 साउंड बॉक्स लगाते हैं. अगर हजरत साहेब की जयंती के दौरान डीजे पर 12 साउंड बॉक्स लगाये गये, तो रामनवमी व अन्य पर्वों में 15 से 20 साउंड बॉक्स लगाये जाते हैं. यानी पर्व-त्योहार में डीजे बजाना शान-शौकत की बात मानी जाती है.
लेकिन, अभी होता क्या है कि शोभायात्रा या जुलूस के दौरान डीजे बजाते हुए किसी खास समुदाय के लोग धार्मिक स्थलों से गुजरते है, तो वहां अक्सर रुक कर तलवार,भाला, गड़ासा आदि पारंपरिक हथियारों से कलाबाजी दिखाने लगते हैं, जो दूसरे पक्ष को नागवार गुजरता है और विवाद हो जाता है. इस विवाद में आम लोग तो पीसते ही है, कानून व्यवस्था बनाये रखना प्रशासन के लिए एक चुनौती बन जाती है. अब प्रशासन चाहता है कि डीजे को लेकर सामाज में अापसी भाईचारा का माहौल नहीं बिगड़े, इसलिए इस पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया जाये.
इधर, रामनवमी जुलूस में हुई भगदड़ की घटना को जिला प्रशासन ने काफी गंभीरता से लिया है.इस घटना के बाद प्रशासन ने दोनों समुदायों के सुझाव से डीजे पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है. एक अभियान शुरू किया गया है. डीएम कंवल तनुज व एसपी बाबू राम लगातार बैठकें कर रहे हैं और अभियान के कामकाज की समीक्षा की जा रही है.
थानेदारों को जोड़ा गया अभियान से : एसपी बाबू राम ने बताया कि डीजे पर प्रतिबंध लगाने के लिए शुरू किये गये अभियान से जिले के सभी थानेदारों को जोड़ा गया है. सभी थानेदारों को आदेश दिया गया है कि वे अपने-अपने थाना क्षेत्रों में लोगों से मिल कर उन्हें अभियान की जानकारी दें और जो लोग इसमें खुल कर सहयोग करना चाह रहे हैं उनकी सूची तैयार बनायें.
उक्त सूची के आधार पर जिला व थाना स्तर कर संगठन बनाया जायेगा. एसपी ने बताया कि वह सभी थानेदारों से लगातार बात कर रहे हैं. हर जगह से अच्छा रिस्पांस मिल रहा है. लोग खुल कर सहयोग कर रहे हैं. प्रशासन को धन्यवाद भी दे रहे है. इससे हमारा आत्मबल और मजबूत हो रहा है. शीघ्र ही इस अभियान का सुखद परिणाम सबके सामने अायेगा.
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