घरेलू उपचार की परंपरा हो रही खत्म!

Published at :14 Jan 2016 6:57 PM (IST)
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घरेलू उपचार की परंपरा हो रही खत्म!

घरेलू उपचार की परंपरा हो रही खत्म!प्रयोग में नहीं लाते अब दादी के नुस्खे (ग्राफिक्स लगा देंगे, फोटो नंबर-11)कैप्शन- डा. प्रवीण, औरंगाबाद (सदर)पहले ये अक्सर देखने को मिलता था कि घर में अगर कोई बीमार पड़ जाये या किसी को सर्दी, खांसी व मौसमी बीमारियां लग जायें, तो दादी के घरेलू नुस्खे से ही बीमारी […]

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घरेलू उपचार की परंपरा हो रही खत्म!प्रयोग में नहीं लाते अब दादी के नुस्खे (ग्राफिक्स लगा देंगे, फोटो नंबर-11)कैप्शन- डा. प्रवीण, औरंगाबाद (सदर)पहले ये अक्सर देखने को मिलता था कि घर में अगर कोई बीमार पड़ जाये या किसी को सर्दी, खांसी व मौसमी बीमारियां लग जायें, तो दादी के घरेलू नुस्खे से ही बीमारी छू मंतर हो जाती थी. कब्ज, एसीडीटी, छोटे घाव, दस्त, दर्द और न जाने कई तरह की छोटी-छोटी बीमारियों को घरेलू उपयोग में आनेवाले औषधियों से झट से इसके इलाज के उपाय निकाल लिये जाते थे. दादी के छोटे-छोटे घरेलू नुस्खे बड़े काम के होते थे, पर अब दादी के नुस्खे को प्रयोग में कोई कहां लाता है. घरेलू उपचार की परंपरा को लोग महत्व नही दे रहे. देखा जाये तो घरेलू उपचार की पद्धति में दादी के नुस्खे में वही औषधियां उपयोग में लायी जाती थी जो आयुर्वेद दवाओं के बनाने में इस्तेमाल में लाये जाते हैं. दादी के नुस्खे प्रभावकारी तो होते ही थे और उनका कोई साइड इफेक्ट भी नहीं होता था. लेकिन अब ये तरीका आम तौर पर खत्म सा जैसा हो गया है. बेकार नहीं जाते थे घरेलू उपचार : आयुष चिकित्सक संघ के जिलाध्यक्ष डाॅ प्रवीण कुमार बताते हैं कि छोटी बीमारियों में दादी के नुस्खे बेकार नहीं जाते थे. घरेलू उपचार से ही मौसमी बीमारियां ठीक हो जाती थी. गरमी में अगर लू लग जाये या फिर ठंड की चपेट में आ जाने पर दादी के नुस्खे बड़े असरदायक होते थे. घर के उपयोग में आनेवाले हल्दी, तुलसी, लहसुन, गोल्की, अदरक, जीरा, नींबू सहित और भी उपयोगी चीजों को दवा के रूप में प्रयोग कर बीमारियों को दूर कर दिया जाता था. हालांकि इस इलाज में देर होती थी पर मरीज स्वस्थ्य हो जाता था. उन्होंने बताया कि घरेलू उपचार से कोई साइड इफेक्ट भी नहीं पहुचते थे. आयुर्वेद चिकित्सा में मानव शरीर को कोई हानि नहीं होता. बदल गया चिकित्सा का तरीका : 80 वर्षीय वृद्ध नाथून चौधरी बताते हैं कि पहले जब किसी को सर्दी या खांसी होती थी तो तुलसी व अदरक के काढे से ही शरीर स्वस्थ्य हो जाता था. मौसमी बुखार व चेचक जैसे रोग में भी घरेलू उपचार को ही बेहतर माना जाता था. पर अब लोगों के पास धैर्य की कमी हो गयी है. साथ ही घरेलू उपचार पर लोगों का भरोसा नहीं रह गया. वे किसी भी बीमारी से तुरंत निजात चाहते हैं इसलिये कट-छट जाने पर भी या छोटे घाव होने पर भी सीधे अस्पताल पहुच जाते हैं. जबकि संयम व घरेलू उपचार से इसे ठीक किया जा सकता है.

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