राज्य के वार्षिक कैलेंडर में दिखाया गया कुटुंबा गढ़ का आइना

Published at :09 Jan 2016 6:52 PM (IST)
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राज्य के वार्षिक कैलेंडर में दिखाया गया कुटुंबा गढ़ का आइना

राज्य के वार्षिक कैलेंडर में दिखाया गया कुटुंबा गढ़ का आइनाविधायक ने सीएम को दी बधाई अंबा (औरंगाबाद). राज्य सूचना व जनसंपर्क विभाग बिहार द्वारा जारी किया गया वार्षिक कैलेंडर में कुटुंबा गढ़ का आइना दिखाया गया. वर्ष 2016 के कैलेंडर के मुख्य पृष्ठ पर बिहार के इतिहास को दर्शाया गया है. इसमें कुटुंबा का […]

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राज्य के वार्षिक कैलेंडर में दिखाया गया कुटुंबा गढ़ का आइनाविधायक ने सीएम को दी बधाई अंबा (औरंगाबाद). राज्य सूचना व जनसंपर्क विभाग बिहार द्वारा जारी किया गया वार्षिक कैलेंडर में कुटुंबा गढ़ का आइना दिखाया गया. वर्ष 2016 के कैलेंडर के मुख्य पृष्ठ पर बिहार के इतिहास को दर्शाया गया है. इसमें कुटुंबा का प्राचीन गढ़ समेत चौसा, वेवर, वेलहाड़ा, पांड व बलिराज गढ़ को भी रखा गया है. अंदर के पृष्ठों पर कुटुंबा गढ़ की खुदाई में मिले अवशेष की तसवरी के साथ इसका इतिहास वर्णित है. कैलेंडर में वर्णित है कि जिला मुख्यालय औरंगाबाद से 22 किमी की दूरी अंबा-नवीनगर रोड़ में कुटुंबा अवस्थित है. इसके गढ़ की खुदाई से 10 से 12 हजार वर्ष पुराना अवशेष प्राप्त हुआ है, जो पाषाण युग का प्रतीत होता है. इन अवशेषों में जैन व हिंदू देवी-देवताओं के विखंडित मूर्तियां साक्ष्य के रूप में मिले है. साथ ही अन्य कई दुलर्भ वस्तुएं भी प्राप्त हुए हैं. सरकार के इस पहल के लिए कुटुंबा विधायक राजेश कुमार ने सीएम नीतीश कुमार, शिक्षा मंत्री अशोक चौधरी व पर्यटन मंत्री अनिता देवी को बधाई दी है. उन्होंने ने कहा कि कैलेंडर पर कुटुंबा को स्थान दिये जाने से क्षेत्र की प्रसिद्धि बढ़ी है और इस क्षेत्र को विकास होने तथा पर्यटन से जुड़ने का संकेत मिला है. विधायक ने गढ़ के विकास के लिए मुख्यमंत्री से मिल कर मांग रखने की बात भी कही है.सीएम की पहल पर शुरू की गयी थी गढ़ की खुदाईगढ़ की खुदाई मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पहल पर शुरू की गयी थी. वे वर्ष 2005 में विधानसभा चुनाव के दौरान चुनावी सभा के लिए कुटुंबा आये थे. गढ़ को देख कर उन्होंने कहा था कि इसके नीचे इतिहास छुपा है. यदि सरकार बनी तो हम उसे उभारने का प्रयास करेंगे. सरकार बनने के बाद सीएम ने कला संस्कृति मंत्रालय को खुदाई कराने का निर्देश दिये. उस समय के कला संस्कृति मंत्री सुखदा पांडेय की पहल पर आवश्यक कार्रवाई शुरू कर खुदाई करायी गयी. थोड़ी खुदाई के बाद काम रूक गया पर जब सीएम सेवा यात्रा के दौरान आये तो उन्होंने पुन: इस ओर पहल की और खुदाई शुरू करायी गयी. खुदाई का काम बिहार विरासत विकास समिति कर रही थी. समिति के अधिकारियों ने प्राप्त अवशेषों को 10 से 12 हजार वर्ष पुराना बताया था. यह गढ़ 52 एकड़ विस्तृत क्षेत्र में फैला है. खुदाई से प्राप्त अवशेषों को रखने के लिय यहां संग्रहालय बनाने की मांग भी पूर्व विधायक ने सीएम से की थी.

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