लक्ष्य के अनुसार नहीं हो सका शौचालय का नर्मिाण

Published at :06 Jan 2016 7:01 PM (IST)
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लक्ष्य के अनुसार नहीं हो सका शौचालय का नर्मिाण

लक्ष्य के अनुसार नहीं हो सका शौचालय का निर्माण खजाने में पड़े हैं छह करोड़ रुपयेस्वच्छ भारत मिशन से घर-घर में शौचालय बनाने की योजना नहीं पकड़ पा रही गति 2015-16 में 37 हजार शौचालय बनवाने के लिए विभाग को था लक्ष्य, पर बने सिर्फ 1100(पेज तीन का लीड)ग्राफिक्स लगा देंगे औरंगाबाद (नगर)जिला लोक स्वास्थ्य […]

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लक्ष्य के अनुसार नहीं हो सका शौचालय का निर्माण खजाने में पड़े हैं छह करोड़ रुपयेस्वच्छ भारत मिशन से घर-घर में शौचालय बनाने की योजना नहीं पकड़ पा रही गति 2015-16 में 37 हजार शौचालय बनवाने के लिए विभाग को था लक्ष्य, पर बने सिर्फ 1100(पेज तीन का लीड)ग्राफिक्स लगा देंगे औरंगाबाद (नगर)जिला लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग की स्थिति विकास कार्यों में काफी दयनीय है. लक्ष्य के अनुसार अभी तक जितने शौचालय बनाने थे आज उससे काफी पीछे है. आंकड़ा के अनुसार यह देखा जाये तो 15 साल के सफर में इस विभाग द्वारा शहर व ग्रामीण क्षेत्रों को स्वच्छ व सुंदर बनाने के लिए विभाग द्वारा चलायी जा रही योजनाओं को अब तक तीन बार नाम बदला गया है, फिर भी घर-घर में शौचालय नहीं बन सका. घर-घर में शौचालय बनाने के लिए केंद्र सरकार की यह काफी महत्वकांक्षी योजना साबित हो रही थी इसकी शुरूआत वर्ष 1999 में की गयी थी, उस समय योजना का नाम संपूर्ण स्वच्छता अभियान रखा गया था. इसके माध्यम से शहर ही नहीं बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों को भी सुंदर व स्वच्छ बनाने के लिए प्रयास शुरू किया गया था. लेकिन यह अक्षम साबित हुआ. इसके बाद वर्ष 2012 में इस नाम को बदलकर निर्मल भारत अभियान का नाम दिया गया था. फिर दो अक्टूबर 2014 को इसमें भी नाम परिवर्तन करते हुए पुन: स्वच्छ भारत मिशन का नाम दिया गया, जो अभी जारी है. फिर भी यह अभियान अपने मंजिल तक नहीं पहुंच पाया. अभियान का सबसे दुखद पहलू यह है कि शौचालय बनाने के लिए जो रुपये विभाग के खजाने में भेजे गये हैं, वह रुपये विभाग के खाते में आने के बाद भी खर्च के लिए बाट जोह रहा है. इस जिले में छह करोड़ रुपये अभी भी उपलब्ध हैं. लेकिन लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग की लापरवाही या फिर अनदेखी के कारण इस पर विचार नहीं किया जा रहा है. इसके कारण यह परेशानी विभाग ही नहीं बल्कि लोगों को भी हो रही है. यही कारण है कि जिले में अभी भी स्वच्छता अभियान की गति नहीं पकड़ पा रहा है. वर्ष 2015-16 में 37 हजार शौचालय बनवाने के लिए विभाग को लक्ष्य रखा गया था, लेकिन मात्र 1100 ही शौचालय जिले में अभी तक बन सके हैं. जबकि जिले में चार लाख घर अभी भी शौचालय के इंतजार में है. 37 हजार शौचालय बनाने का लक्ष्य इस संंबंध में पीएचइडी के कार्यपालक अभियंता बिंदु भूषण ने बताया कि वर्ष 2015-16 में वार्षिक कार्य योजना तैयार कर 37 हजार शौचालय बनाने का लक्ष्य भेजा गया था. लेकिन अभी तक 1100 ही शौचालय का निर्माण हो सका है. जो लोग शौचालय बनवाने के लिए इच्छुक हैं वे पहले शौचालय बनवाये फिर रुपये के लिए कार्यालय को आवेदन दें. उनके खाते में रुपये भेजे जायेंगे. वर्ष 2019 तक जिले में चार लाख घरों में शौचालय बनाने का लक्ष्य रखा गया है. विभाग के खाते में अभी भी छह करोड़ रुपये बचे हुए हैं.

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