वर्षों से बंद है सूती वस्त्र बुनाई व प्रशक्षिण केंद्र

Published at :05 Jan 2016 8:11 PM (IST)
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वर्षों से बंद है सूती वस्त्र बुनाई व प्रशक्षिण केंद्र

वर्षों से बंद है सूती वस्त्र बुनाई व प्रशिक्षण केंद्र काफी दूर-दूर से लोग यहां आते थे प्रशिक्षण लेनेधागे के अभाव में काम हो गया बंद उद्योग विभाग ने नहीं उपलब्ध कराया कर्मचारी व उपकरण फोटो नंबर-1, परिचय ,बंद पड़ा सूती वस्त्र बुनाई प्रशिक्षण केंद्रनवीनगर (औरंगाबाद)नवीनगर कॉलेज मोड़ के समीप कृषि फार्म परिसर में स्थित […]

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वर्षों से बंद है सूती वस्त्र बुनाई व प्रशिक्षण केंद्र काफी दूर-दूर से लोग यहां आते थे प्रशिक्षण लेनेधागे के अभाव में काम हो गया बंद उद्योग विभाग ने नहीं उपलब्ध कराया कर्मचारी व उपकरण फोटो नंबर-1, परिचय ,बंद पड़ा सूती वस्त्र बुनाई प्रशिक्षण केंद्रनवीनगर (औरंगाबाद)नवीनगर कॉलेज मोड़ के समीप कृषि फार्म परिसर में स्थित सूती वस्त्र बुनाई व प्रशिक्षण केंद्र वर्षों से बंद है. इसकी देखरेख कर्मचारी सच्चिदानंद मिश्र जो कुशल शिल्पी थे, करते थे. लेकिन, अब वे भी यहां नहीं रहते. कर्मचारी अर्जुन कुमार पंडित फरवरी 2008 से बिना सूचना के फरार है. वर्षों पूर्व यहां काफी दूर-दूर से लोग आते थे और सूती वस्त्र बुनाई अनुशिक्षण वर्ग में शामिल होकर प्रशिक्षण प्राप्त करते थे. साथ ही इस केंद्र में बुने गये कपड़े हाट बाजारों में बिकते थे. इससे लोगों को रोजी-रोजगार भी प्राप्त होता था. लेकिन, आज यहां सब कुछ वीरान पड़ा हुआ है. इस केंद्र में अंतिम बार 20 जुलाई 1992 को अमझर शरीफ से चार लोगों को प्रशिक्षण दाता के रूप में यहां भेजा गया था ताकि अनुशिक्षण वर्ग सुचारु रूप से चलता रहे. लगभग तीन वर्षों तक सब कुछ ठीकठाक चलता रहा. मई 1995 में एक अनुदेशक रामनंदन शर्मा के सेवानिवृत्त हो गये. इस दौरान आधा दर्जन लोगों को ट्राइसेम योजना के तहत 1995-96 में प्रशिक्षित किया गया . इसके साथ ही रात्रि प्रहरी के रूप कार्यरत इंद्रदेव यादव को कैंसर की वजह से मृत्यु हो गयी और यहां मात्र दो लोग शेष रहे गये. इस केंद्र में उपस्कर व कर्मचारियों को भेजने की मांग कई बार उद्योग विभाग तथा सरकार से की गयी. लेकिन, आज तक उस मांग पत्र की ओर कोई पहल नहीं की गयी. न तो कोई कर्मचारी आया और न ही उन्हें कोई सामग्री मिला. पहले का जो भी सूत धागे थे उसी में कुछ दिनों तक काम चला और जब कुछ भी शेष नहीं बचा तो यह केंद्र पूरी तरह ठप पड़ गया. कुछ वर्षों तक जैसे -तैसे दोनों कर्मचारियों ने समय बिताया और लगभग नौ साल पूर्व कर्मचारी अर्जुन पंडित बिना सूचना के गायब हो गया. एक वर्ष पूर्व कुशल शिल्पी सच्चिदानंद मिश्र भी कहीं चले गये. तब से लेकर आज तक यह केंद्र बंद है.

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