आजाद बिगहा में अगलगी से बेघर हुआ परिवार

Published at :05 Jan 2016 7:56 PM (IST)
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आजाद बिगहा में अगलगी से बेघर हुआ परिवार

आजाद बिगहा में अगलगी से बेघर हुआ परिवार ठंड में खुले में रहने को विवश, गांववालों के देने पर बच्चों को मिला खाना फोटो नंबर-19,परिचय- आग से जला दलित परिवार का घरअंबा(औरंगाबाद). कुटुंबा थाना क्षेत्र के परसांवा टोले आजाद बिगहा में सोमवार की रात अचानक आग लग गयी. इस घटना से रामप्रवेश पासवान का घर […]

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आजाद बिगहा में अगलगी से बेघर हुआ परिवार ठंड में खुले में रहने को विवश, गांववालों के देने पर बच्चों को मिला खाना फोटो नंबर-19,परिचय- आग से जला दलित परिवार का घरअंबा(औरंगाबाद). कुटुंबा थाना क्षेत्र के परसांवा टोले आजाद बिगहा में सोमवार की रात अचानक आग लग गयी. इस घटना से रामप्रवेश पासवान का घर जल कर राख हो गया. ग्रामीणों ने बताया कि रात के करीब आठ बजे अचानक घर से आग की लपेटे दिखायी दी. आग कैसे लगी इसका स्पष्ट जानकारी नहीं मिली पर लोगों का मानना है कि ढिबरी से आग किसी तरह पकड़ लिया. आग को बुझाने के लिए ग्रामीण घर तक दौड़े, पर वहां पानी की कोई व्यवस्था नहीं होने से वे बुझाने में सफल नहीं हो सके. खैरियत यह था कि उससे सटे कोई घर नहीं था अन्यथा पानी के अभाव में वह भी आग के चपेट में आ जाता. इस घटना में रामप्रवेश का घर में रखा सारा सामान जल कर नष्ट हो गया. ठंड के इस मौसम में भी पूरा परिवार खुले में रहने का विवश है. अनाज जल जाने के कारण रामप्रवेश के छोटे बच्चे भूख से तड़प रहे हैं. मंगलवार को किसी ने अनाज दिया तो परिजनों ने बाहर रोटी सेक कर बच्चों को भूख मिटाया. ग्रामीणों ने इसकी जानकारी सीओ व थानाध्यक्ष सुभाष राय को दी है. इस संबंध में सीओ ठुईंया उरांव ने बताया कि राजस्व कर्मचारी को मुआयना करने का निर्देश दिया गया है. राजकीय प्रावधानों के अनुरूप उन्हें सहायता उपलब्ध कराया जायेगा. गौरतलब है कि यहां पर नया गांव बसा है. अधिकतर लोग यहां दूसरे जगह से आकर अपना घर बना कर रह रहे हैं. पीड़ित परिवार भी मटपा सिमरा से आकर लगभग सात वर्षों से यहां रह रहा है.30 घर की बस्ती में मात्र पांच चापाकल : जगदीशपुर पंचायत का यह गांव आज भी विकास से वंचित है. अन्य समस्याओं के साथ गांव में सबसे बड़ी कठिनाई पेयजल की है. तकरीबन 30 घरों की इस बस्ती में दो सरकारी चापाकल लगा है, जिसमें एक खराब है. इसके अतिरिक्त मात्र चार घर में ही निजी चापाकल है. ऐसे में पानी की किल्लत होना स्वाभाविक है. यदि समीप में चापाकल होता तो आग पर नियंत्रण स्थापित किया जा सकता था. इतना ही नहीं गांव में न तो सड़क और न ही अन्य कोई सुविधा है.

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