यादव कॉलेज में आठ साल बाद भी छात्रावास अधूरा

Published at :23 Dec 2015 6:52 PM (IST)
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यादव कॉलेज में आठ साल बाद भी छात्रावास अधूरा

यादव कॉलेज में आठ साल बाद भी छात्रावास अधूरा लाखों रुपये की लागत से निर्मित गर्ल्स हॉस्टल बनी शोभा की वस्तु(फोटो नंबर-11) कैप्शन- रामलखन सिंह यादव कॉलेज में बनी गर्ल्स हॉस्टल औरंगाबाद (नगर) एक तरफ छात्र-छात्राओं को लाभ दिलाने के लिए शिक्षा विभाग द्वारा कॉलेज से लेकर प्रत्येक विद्यालयों में लाखों रुपये खर्च की जा […]

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यादव कॉलेज में आठ साल बाद भी छात्रावास अधूरा लाखों रुपये की लागत से निर्मित गर्ल्स हॉस्टल बनी शोभा की वस्तु(फोटो नंबर-11) कैप्शन- रामलखन सिंह यादव कॉलेज में बनी गर्ल्स हॉस्टल औरंगाबाद (नगर) एक तरफ छात्र-छात्राओं को लाभ दिलाने के लिए शिक्षा विभाग द्वारा कॉलेज से लेकर प्रत्येक विद्यालयों में लाखों रुपये खर्च की जा रही है. तभी छात्र-छात्राओं को भरपूर लाभ नहीं मिल पा रहा है. यूनिवर्सिटी की देखरेख में कॉलेजों को सुंदर व स्वच्छ बनाने की दिशा में विकास कार्य कराया जा रहा है, लेकिन कुछ न कुछ खामियां के कारण काम में रुकावट देखी जा रही है. शहर के रामलखन सिंह यादव कॉलेज में लगभग सात साल पहले यूजीसी द्वारा छात्राओं को भरपूर लाभ दिलाने के लिए हॉस्टल का निर्माण कराया जा रहा था, लेकिन अब तक यह हॉस्टल चालू नहीं हो सका. छात्राएं भी काफी उत्सुक थी कि अपने घरों से चलकर कॉलेज आने की परेशानी दूर होगी, लेकिन यह उत्सुकता सिर्फ चेहरे तक ही सिमट कर रह गयी. कॉलेज में अर्द्धनिर्मित हॉस्टल आज शोभा की वस्तु बन गयी है, साथ ही निर्माण कार्य में तेजी लाने के बजाये धीरे-धीरे जर्जर होती जा रही है. बरसात के दिनो में हॉस्टल की हालत और खराब हो जाती है. प्रशाखा पदाधिकारी रामचंद्र सिंह ने बताया कि वर्ष 2007 में यूजीसी द्वारा 50 लाख रुपये की लागत से 48 छात्राओं को रहने के लिए गर्ल्स हॉस्टल का निर्माण शुरू हुआ था. विभाग द्वारा पहले किस्त में 25 लाख रुपये उपलब्ध कराये गये थे. इससे भवन का निर्माण किया गया. इसके बाद दिसंबर 2012 में विभाग की टीम ने हॉस्टल की जांच की. जांच के बाद विभाग द्वारा हॉस्टल से संबंधित कागजात की मांग की गयी. उन्होंने बताया कि कागजात जमा करने के बाद भी अब तक दूसरे किस्त के रूप में पैसे उपलब्ध नहीं कराये गये. इसके कारण हॉस्टल का काम लटका हुआ है.नहीं कराये गये पैसे उपलब्ध प्राचार्य डाॅ फूलो पासवान ने बताया कि हमारे पदस्थापन से पहले का ही यह मामला है, इसके बावजूद भी कई बार विभाग को निर्माण के शेष रुपये के लिए आवेदन दिया गया है. कई बार हॉस्टल से संबंधित कागजात की मांग की गयी, जिसे उपलब्ध भी करा दिया गया. इसके बावजूद भी यूजीसी द्वारा अभी तक पैसे उपलब्ध नहीं कराये गये हैं. प्राचार्य ने बताया कि हॉस्टल निर्माण से संबंधित जनवरी में बैठक की जानी है. इसके बाद अगर यूनिवर्सिटी हॉस्टल निर्माण के लिए आदेश देती है तो कुछ फंड लगाकर निर्माण कराया जायेगा.

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