संसाधनों के अभाव में सिमट रहे सरकारी स्कूल, नरेंद्र खाप में महज 18 बच्चे

Published by :PANCHDEV KUMAR
Published at :03 May 2026 9:56 PM (IST)
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संसाधनों के अभाव में सिमट रहे सरकारी स्कूल, नरेंद्र खाप में महज 18 बच्चे

कुटुंबा के स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं का अकाल, नामांकन में भारी गिरावट, संसाधन विहीन विद्यालय में बच्चों का नामांकन कराने से कतरा रहे अभिभावक

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शौचालय के किवाड़ गायब, तो किचन शेड का अकाल, सीढ़ी के नीचे बन रहा बच्चों का भोजन

नरेंद्र खाप, पोखराही व सिमरी स्कूल में सुविधाओं की कमी से नहीं पहुंच रहे बच्चे

कुटुंबा.

सरकारी विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर संसाधन उपलब्ध कराने के नाम पर विभाग द्वारा करोड़ों रुपये खर्च किये जा रहे हैं. इसके बावजूद जमीनी हकीकत आज भी चिंताजनक बनी हुई है. कुटुंबा प्रखंड की दधपा पंचायत अंतर्गत नरेंद्र खाप गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय वर्तमान में दयनीय स्थिति से जूझ रहा है.

बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव: विद्यालय में योग्य एवं कुशल शिक्षक होने के बावजूद बच्चों का नामांकन लगातार घटता जा रहा है. इसका मुख्य कारण बुनियादी संसाधनों का घोर अभाव है. ऐसे में अभिभावक अपने बच्चों का नामांकन कराने से कतरा रहे हैं. बदहाली से जूझता यह इकलौता विद्यालय नहीं है, बल्कि पंचायत के प्राथमिक विद्यालय पोखराही तथा सूही पंचायत के सिमरी का भी यही हाल है. नरेंद्र खाप विद्यालय में चहारदीवारी नहीं होने से छुट्टी के दिनों में यहां असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है. ये लोग विद्यालय परिसर में मादक पदार्थों का सेवन कर गंदगी फैलाते हैं, जिससे शैक्षणिक वातावरण दूषित हो रहा है. प्रबंधन के अनुसार, सफाईकर्मी के नहीं आने से नियमित सफाई भी नहीं होती है.

सुरक्षा मानकों की अनदेखी और बंद पड़ा एमडीएम विद्यालयों में आवश्यक ढांचे का भी अभाव है. चहारदीवारी न होने से बच्चे असुरक्षित महसूस करते हैं. छत पर जाने वाली सीढ़ी में रेलिंग नहीं लगी है, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है. शौचालय के दरवाजों में किवाड़ तक नहीं हैं, जिससे छात्र-छात्राओं को भारी असुविधा होती है. किचन शेड के अभाव में सीढ़ी के नीचे ही भोजन तैयार किया जाता है, जो स्वच्छता मानकों के विपरीत है. पेयजल की सुविधा न होने और रसोईघर अधूरा रहने के साथ-साथ एमएलएन किट व खेल सामग्री की भी भारी कमी है. बच्चों की घटती संख्या का असर मध्याह्न भोजन (एमडीएम) पर भी पड़ा है. दो मई से विद्यालय में एमडीएम का संचालन बंद कर दिया गया है, जिससे बच्चों के पोषण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है.

नामांकन की स्थिति और ग्रामीणों की मांग

विद्यालय में प्रधानाध्यापक सहित चार शिक्षक तैनात हैं, लेकिन नामांकन की स्थिति बेहद चिंताजनक है. पहली कक्षा में तीन, दूसरी में पांच, तीसरी में चार, चौथी में एक तथा पांचवीं कक्षा में पांच यानी कुल 18 बच्चे ही नामांकित हैं. स्थानीय ग्रामीणों ने संबंधित विभाग से आवश्यक संसाधन जल्द उपलब्ध कराने की मांग की है.

बीइओ को दी गयी है सूचना : प्रधानाध्यापक

प्रधानाध्यापक अंबिका चौहान ने बताया कि विद्यालय में बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी है. पोषक क्षेत्र में भ्रमण करने के बावजूद अभिभावक बच्चों का प्रवेश कराने से परहेज कर रहे हैं. इसके लिए बीइओ को लिखित सूचना दी गयी है. उन्होंने बताया कि एमडीएम वेंडर निकू कुमार द्वारा भोजन सामग्री उपलब्ध कराने से इंकार करने के बाद से मध्याह्न भोजन का संचालन बंद हो गया है.

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