सीएस की कार्रवाई पर उठ रहे सवाल!
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :23 Dec 2015 12:55 AM (IST)
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औरंगाबाद (नगर) : एक तरफ जिलाधिकारी कंवल तनुज के निर्देश पर जिले में पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत नहीं चलनेवाले अल्ट्रासाउंड केंद्रों की जांच टीम गठित कर पदाधिकारियों से करायी गयी थी, ताकि दोषी केंद्र चलानेवालों व चिकित्सकों पर कार्रवाई की जा सके. जांच टीम ने जिला मुख्यालय में चल रहे 15 अल्ट्रासाउंड केंद्रो का नवंबर […]
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औरंगाबाद (नगर) : एक तरफ जिलाधिकारी कंवल तनुज के निर्देश पर जिले में पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत नहीं चलनेवाले अल्ट्रासाउंड केंद्रों की जांच टीम गठित कर पदाधिकारियों से करायी गयी थी, ताकि दोषी केंद्र चलानेवालों व चिकित्सकों पर कार्रवाई की जा सके. जांच टीम ने जिला मुख्यालय में चल रहे 15 अल्ट्रासाउंड केंद्रो का नवंबर में जांच की थी.
इस क्रम में 11 अल्ट्रासाउंड केंद्रों को पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत नहीं पाया गया था, जिस पर जांच टीम ने जिलाधिकारी को अपना जांच प्रतिवेदन कार्रवाई करने के लिए सपर्पित किया था. इस पर जिलाधिकारी ने सिविल सर्जन को तत्काल प्रभाव से कार्रवाई करने का निर्देश दिया. इसके बावजूद सिविल सर्जन ने एडवाइजरी कमेटी गठित कर कुछ लोगों को बचाने के लिए प्रयास किया.
जब जिलाधिकारी ने सीएस पर कार्रवाई करने के लिए दबाव बनाया, तो सिविल सर्जन ने खानापूर्ति करते हुए मामले को दबाने के उद्देश्य से गलत पाये गये चार अल्ट्रासाउंड केंद्रों के खिलाफ न्यायालय में मुकदमा दायर किया है. ताज्जुब की बात यह है कि जब सीएस ने खुद पांच अल्ट्रासाउंड केंद्रों को सील किया था, तो चार ही लोगों पर क्यों मुकदमा दायर किया.
इस घटना के बाद यह सवाल उठ रहे हैं. उठना भी जायज है. क्योंकि, जांच टीम ने 11 अल्ट्रासाउंड केंद्रों के चलानेवालों पर कार्रवाई करने की रिपोर्ट सौंपी थी. लेकिन सिविल सर्जन ने कुछ केंदों के चलानेवालों को बचाने के उद्देश्य से पांच केंद्रों को सील किया. अन्य केंद्रों को चलानेवालों से अल्ट्रासांउड केंद्र का अनुज्ञप्ति निलंबित करते हुए उनसे स्पष्टीकरण पूछा कि, क्यों ने आपके विरुद्ध कार्रवाई की जाये.
जब जिलाधिकारी ने अल्ट्रासाउंड केंद्रों की जांच करने के लिए सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डा तपेश्वर प्रसाद, वरीय उप समाहर्ता सीमा कुमारी को जांच करने की जिम्मेवारी सौंपी, तो उनलोगों ने महावीर अल्ट्रासाउंड, गुप्ता अल्ट्रासांउड, तुबा अल्ट्रासाउंड, ज्या अल्ट्रासांउड, मॉडर्न अल्ट्रासाउंड, साक्षी अल्ट्रासाउंड सहित अन्य अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर कार्रवाई करने के लिए रिपोर्ट समर्पित किया.
लेकिन सिर्फ महावीर, गुप्ता, साक्षी, मॉडर्न अल्ट्रासाउंड पर कार्रवाई करते हुए न्यायालय में सीएस ने मुकदमा दायर किया. ताज्जुब की बात यह है कि एक अल्ट्रासाउंड केंद्र वरीय याक्ष्मा पर्यवेक्षक के नाम पर है, तो दूसरा अल्ट्रासाउंड सिविल सर्जन कार्यालय के लिपिक के पार्टनरशीप में है. सूत्रों के अनुसार, इससे ही कार्रवाई नहीं हो पा रही है.
अब देखना यह होगा कि डीएम अपने स्तर से अवैध केंद्रों को चलानेवालों के विरूद्ध कौन सी कार्रवाई करते हैं. यह तो समय ही बता पायेगा. हालांकि इस संबंध में पक्ष जानने के लिये सिविल सर्जन के सरकारी मोबाइल नंबर 9470003061 पर प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका.
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