देवकुंड की महत्ता होने के बावजूद प्रशासन का ध्यान नहीं

Published at :29 Nov 2015 6:54 PM (IST)
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देवकुंड की महत्ता होने के बावजूद प्रशासन का ध्यान नहीं

देवकुंड की महत्ता होने के बावजूद प्रशासन का ध्यान नहीं भगवान राम का बनाया तीर्थ स्थल देवकुंड उपेक्षित (फोटो नंबर-1)परिचय-भगवान राम द्वारा स्थापित तीर्थ स्थल देवकुंडदेवकुंड. गोह प्रखंड के ऐतिहासिक व धार्मिक स्थल आज भी अपनी उपेक्षा पर आंसू बहा रहा है़ जिस धर्म स्थल पर भगवान राम ने स्वयं पधारकर तीर्थ स्थल बनाया. भले […]

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देवकुंड की महत्ता होने के बावजूद प्रशासन का ध्यान नहीं भगवान राम का बनाया तीर्थ स्थल देवकुंड उपेक्षित (फोटो नंबर-1)परिचय-भगवान राम द्वारा स्थापित तीर्थ स्थल देवकुंडदेवकुंड. गोह प्रखंड के ऐतिहासिक व धार्मिक स्थल आज भी अपनी उपेक्षा पर आंसू बहा रहा है़ जिस धर्म स्थल पर भगवान राम ने स्वयं पधारकर तीर्थ स्थल बनाया. भले ही जिला प्रशासन की निगाह उन धर्म स्थल पर नहीं हो. पर, गोह के धार्मिक स्थलों के ऐतिहासिक व धार्मिक कथाओं को श्रवण करने से आपको यह अनुभव होगा कि सच में जिस स्थान पर भगवान राम ने खुद पहुंच कर उसे राम तीर्थ बनाया, लेकिन वह आज भी उपेक्षा का शिकार बना हुआ है़ वह है औरंगाबाद जिले के गोह प्रखंड में बसे देवकुंड, जहां तीर्थ यात्रा के प्रसंग मे देवकुंड महात्मा च्यवनाश्रम के अनुसार श्री रामचंद्र जी काशी में श्री विश्वनाथ जी से विदा होकर आकाश मार्ग से पृथक विमान द्वारा गंगा की दक्षिण पटरी से ही कर्मनाशा नदी देखते हुए च्यवनाश्रम में आये़ देवकुंड स्थित सहस्त्रों धारा तालाब मे स्नानोंपरांत मुनिवर च्यवन जी के दर्शन कर राम तीर्थ बनाया और दुग्धेश नामक शिवलिंग की स्थापना की, जो आज भी दुधेश्वर नाथ के नाम से महादेव प्रसिद्ध है़ च्यवाश्रम देवकुंड से चार कोस दक्षिण दिशा में भरारी नामक स्थान पर पुनपुन व मदार नदी का संगम है़ लोग आज इस स्थान को भृगुरारि कहते है़ं यहां छिन्नमस्ता देवी व मंदारेश शिव का स्थान है़ देवकुंड बाबा दुधेंश्वर नाथ की नगरी व च्यवनाश्रम होने के बावजूद जिला प्रशासन का ध्यान इस ओर नहीं है, जिससे श्रद्धालुओं को श्रावण में शिव दर्शन करने में भारी परेशानियों का समाना करना पड़ता है. प्राचीन काल से ही देवकुंड नाम से विख्यात : नारद जी के पूछने पर ब्रहा जी ने बताया कि च्यवनाश्रम देवकुंड में सदा भगवान विष्णु की देवता और ऋषि भक्ति पूर्वक उपासना करते है़ं यहां का कुंड सिद्धा जाति के देवताओं और तप: सिद्ध महात्माओं द्वारा निर्मित है़ प्राचीन काल से ही यह स्थल देवकुंड नाम से विख्यात है़ यहां च्यवन जी का आश्रम विभिन्न वृक्षों से व्याप्त है़ यहां की यात्रा करने अनेकों यज्ञ करने के तुल्य फल मिलता है़ त्रेता युग में भगवान श्रीराम ने देवकुंड व उसकी पंचकोसी की वृहद प्रदक्षिणा कर सभी कामना सिद्ध करने वाली प्रदक्षिणा बताया है, जिसमें डिंडिर, रघुनाथपुर, रामपुर, भगवानपुर, बेलसार, मदसरवा, अगनूर, दुर्गापुर, बलिदाद, ओयना, अमरा, हसपुरा, रायपुर वंधवा, बासाटांड आदि गांव का वर्णन किया है. यहां रात्रि विश्राम करने के बाद देवकुंड में तीन रात तक निवास का फल काशी से भी अधिक है़

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