छठी अहरा तालाब में अर्घ देने का है खास महत्व

Published at :16 Nov 2015 6:57 PM (IST)
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छठी अहरा तालाब में अर्घ देने का है खास महत्व

छठी अहरा तालाब में अर्घ देने का है खास महत्व (फोटो नंबर-2) परिचय-अर्घ देने के लिए सज-धज कर तैयार तालाब हसपुरा (औरंगाबाद) हसपुरा बाजार से आधा किलोमीटर दूर छठी अहरा तालाब पौराणिक धरोहर का रूप ग्रहण कर लिया है. छठ व्रतियों को अर्घ दिये जाने व खरना का भोजन बनाने के लिए जल भरने का […]

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छठी अहरा तालाब में अर्घ देने का है खास महत्व (फोटो नंबर-2) परिचय-अर्घ देने के लिए सज-धज कर तैयार तालाब हसपुरा (औरंगाबाद) हसपुरा बाजार से आधा किलोमीटर दूर छठी अहरा तालाब पौराणिक धरोहर का रूप ग्रहण कर लिया है. छठ व्रतियों को अर्घ दिये जाने व खरना का भोजन बनाने के लिए जल भरने का तांता श्रद्धालुओं का लगा रहता है. हसपुरा बाजार के लोग बताते हैं कि कार्तिक माह में हसपुरा के छठी अहरा तालाब में स्नान करने व अर्घ देने का खास महत्व है. डूबते व उगते सूर्य को अर्घ देने के दौरान छठ व्रतियों को परेशानी न हो इसके लिए स्वयंसेवी संस्था एवं सामाजिक कार्यकर्ता अपने स्तर से छठी अहरा तालाब में अर्घ देने के लिए घाट का निर्माण कराते हैं. सरकारी स्तर से किसी तरह का कोई घाट निर्माण नहीं किया जाता है. सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा घाट का निर्माण व तालाब की सफाई करा रहे डाॅ ब्रह्मदेव प्रसाद ने कहा कि दिल में सेवा की अगर भावना नहीं है तो सब कुछ बेकार है. घाट का निर्माण व तालाब की सफाई करा रहे रंजीत विश्वकर्मा, अजय सिंह, कन्हाई पासवान, मथुरा पासवान, डेेजर क्लब के मिंटू कुमार, ब्रजेश कुमार, मनोज कुमार, मुखिया प्रतिनिधि शमीम अहमद व सामाजिक कार्यकर्ता मो सुलतान खां ने कहा कि श्रद्धा व भक्ति से अर्घ देने के लिए घाटों का निर्माण कराया जाता है. छठी अहरा तालाब पर लोगों के सहयोग से सूर्य मंदिर का निर्माण कराया जा रहा है. सूर्य ही एक ऐसे भगवान है जिनका दर्शन साक्षात होता है. छठी अहरा तालाब की पौराणिक कथाएं भी हैं. बताया जाता है कि कार्तिक माह में छठी नाम की महिला कई रोग से ग्रसित थी. जो प्रतिदिन छठी अहरा में स्नान कर अपने घर में बने भोजन करती थी और छठ पर्व में उपवास रह कर छठी अहरा पर व्रत किया. इसके बाद महिला की बीमारी बिल्कुल ठीक हो गयी. तब से छठी अहरा तालाब छठ व्रतियों के लिए आस्था और विश्वास का केंद्र बना हुआ है. हजारों श्रद्धालुओं द्वारा यहां भगवान सूर्य को अर्घ दिया जाता है. दूसरी ओर खुटहन गांव के बगीचा में कुएं पर स्नान कर अर्घ देने की परंपरा सैकड़ों वर्ष से चलता आ रहा है. खुटहन गांव समेत अगल-बगल के लोग इस बागीचे में अर्घ देते हैं. गांव के व्यापार मंडल अध्यक्ष अशोक सिंह, पैक्स अध्यक्ष रामनंदन सिंह, सामाजिक कार्यकर्ता परमानंद ठाकुर व गया प्रसाद सिंह ने बताया कि बागीचे में कुएं पर स्नान कर अर्घ देने से मनोवांछित फल छठ व्रतियों को मिलता है.

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