सूख गये नदी-तालाब, कैसे पड़ेगा अर्घ

Published at :02 Nov 2015 7:46 PM (IST)
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सूख गये नदी-तालाब, कैसे पड़ेगा अर्घ

सूख गये नदी-तालाब, कैसे पड़ेगा अर्घ (फोटो नंबर-27,29)परिचय- काफी गंदा है माली तालाब का पानी, सूखा पड़ा दुमुहान घाट पर जेसीबी से सफाई करती पूजा समिति कुटुंबा (औरंगाबाद) वर्षाभाव में प्रखंड के नदी व तालाब समेत जलाशय सूखे हैं. यहां तक की छठ पर्व पर अर्ध देने के लिये प्रखंड का प्रमुख स्थल भास्कर नगर […]

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सूख गये नदी-तालाब, कैसे पड़ेगा अर्घ (फोटो नंबर-27,29)परिचय- काफी गंदा है माली तालाब का पानी, सूखा पड़ा दुमुहान घाट पर जेसीबी से सफाई करती पूजा समिति कुटुंबा (औरंगाबाद) वर्षाभाव में प्रखंड के नदी व तालाब समेत जलाशय सूखे हैं. यहां तक की छठ पर्व पर अर्ध देने के लिये प्रखंड का प्रमुख स्थल भास्कर नगर दोमुहान के बटाने नदी में भी पानी का अभाव है. इस स्थान पर प्रखंड के ही नहीं बल्कि जिले के लोग भी छठ पूजा करने के लिए आते हैं. बतरे व बटाने दो नदियों के संगम स्थल होने से यहां अर्घ देने का खास महत्व है. इस भावना को लेकर यहां हजारों श्रद्धालु अर्घ देने पहुंचते हैं. इस वर्ष महीनों से बारिश नहीं होने से नदियां सूखी है. मंदिर के घाट क समीप बिल्कुल ही पानी नहीं है. हालांकि छठ पूजा समिति घाट की सफाई करने में जुट गयी है.गांव के तालाब में एक बूंद पानी नहीं ग्रामीण क्षेत्रों में श्रद्धालु व्रत के दौरान तालाब व नहर आदि में स्नान कर अर्घ देते हैं. आस्था के छठ पर्व में लोग अपने गांव के समीप घाट की सफाई करने में जुट जाते थे, पर इस वर्ष कहीं भी पानी दिखाई नहीं पड़ रहा है. जब जलाशाय ही सूखा पड़ा है तो अर्घ कहां देंगे. धान की सिंचाई करने के लिए किसान डीजल पंप का सहारा लिए, जिससे प्रखंड क्षेत्र के अधिकतर जलाशय सूख गये. मनरेगा द्वारा निर्माण कराया पोखरा भी छठ व्रतियों के लिए इस वर्ष कारगर साबित नहीं होगा.गंदा पड़ा है माली का तालाबमाली राजा द्वारा निर्माण कराया गया आकर्षक तालाब में पानी तो है, पर रखरखाव के बिना इसके जल से बदबू आ रहा है. इतना ही नहीं पानी के ऊपर हरा काई जम गया है. इसके आसपास भी गंदगी का अंबार लगा हुआ है. स्थानीय पंचायत समिति सदस्य राजनारायण सिंह ने बताया कि पहले माली की रानी महल के अंदर से ही तालाब में स्नान करने आया करती थी. तालाब के अंदर से किला तक आने-जाने वाला रास्ता आज भी दिखाई दे रहा है. स्थिति ऐसी बन गयी है कि इसमें स्नान कर अर्घ देना संभव नहीं दिख रहा है.कायम है आस्था का जुनून जलाशयों के सूख जाने से श्रद्धालुओं की आस्था में कमी नहीं हुई है. श्रद्धालु इसकी तैयारी में जुट गये हैं. जलाशयों में पानी की व्यवस्था करने के लिए हर जगहों पर प्रयास किया जा रहा है. स्थानीय लोग पंप के सहारे जलाशयों में पानी जमा करने का उपाय सोच रहे हैं. कार्तिक माह के छठ का हिंदू धर्म में खास महत्व है.

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