सच्चिदानंद सिन्हा कॉलेज में गर्ल्‍स हॉस्टल बन कर तैयार, जुलाई में चालू होने की उम्मीद सभी सुविधाओं से होगा लैस

Updated at :10 Jun 2015 9:27 AM
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सच्चिदानंद सिन्हा कॉलेज में गर्ल्‍स हॉस्टल बन कर तैयार, जुलाई में चालू होने की उम्मीद सभी सुविधाओं से होगा लैस

औरंगाबाद (कोर्ट): तमाम अवरुद्धों को दूर करते हुए सच्चिदानंद सिन्हा कॉलेज में करोड़ों रुपये की लागत से बने गर्ल्‍स हॉस्टल अगले माह से चालू होने की उम्मीद है. इस हॉस्टल के चालू होने से ग्रामीण क्षेत्र से ताल्लुक रखनेवाली छात्राओं को काफी सहूलियत होगी. प्राचार्य ओमप्रकाश सिंह ने बताया कि हॉस्टल का निर्माण कार्य लगभग […]

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औरंगाबाद (कोर्ट): तमाम अवरुद्धों को दूर करते हुए सच्चिदानंद सिन्हा कॉलेज में करोड़ों रुपये की लागत से बने गर्ल्‍स हॉस्टल अगले माह से चालू होने की उम्मीद है. इस हॉस्टल के चालू होने से ग्रामीण क्षेत्र से ताल्लुक रखनेवाली छात्राओं को काफी सहूलियत होगी. प्राचार्य ओमप्रकाश सिंह ने बताया कि हॉस्टल का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है. इसका निर्माण एक करोड़ पांच लाख रुपये खर्च किये जाने की योजना है.

मगर पहले किस्त के रूप में 60 लाख रुपये ही यूजीसी द्वारा दिया गया है. बाकी के रुपये बाद में देने की बात कही गयी है. उन्होंने बताया कि जून के अंत तक हॉस्टल से संबंधित कार्य पूर्ण कर लिया जायेगा और संवेदकों से हैंडओवर करने के बाद चालू करने की प्रक्रिया शुरू की जायेगी. हॉस्टल में सभी कोटी के 76 छात्रओं के रहने की सुविधा होगी. सुरक्षा के मद्देनजर यहां सीसीटीवी कैमरे व सिक्यूरिटी गार्ड मौजूद रहेंगे. बिजली, पानी, शौचालय की सुविधा समेत हॉस्टल सभी सुविधाओं से लैस होगा. जुलाई में नये सत्र के नामांकन के साथ हॉस्टल में छात्रओं के रहने के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी जायेगी.

घटिया गुणवता के खिलाफ जताया था विरोध

वैसे तो गर्ल्‍स हॉस्टल का निर्माण कुछ साल पहले ही पूरा हो गया था. लेकिन, जैसे ही इसे चालू करने की प्रक्रिया प्रारंभ हुई कि गुणवत्तापूर्ण निर्माण नहीं होने के कारण बरसात के मौसम में छत से पानी का रिसाव शुरू हो गया. यही नहीं भवन की दीवारों में दरारें भी उभर आयी. इससे हॉस्टल के शुभारंभ पर ग्रहण लग गया और इसका परिणाम यह हुआ कि अब तक तीन साल बीत गये मगर हॉस्टल चालू नहीं हो सका. हॉस्टल के शुभारंभ होने से पहले ही गुणवत्तापूर्ण निर्माण कार्य नहीं होने से दीवारों में दरारें उभर आना और छत से पानी का रिसाव होने के खिलाफ छात्रों ने विरोध भी जताया था. कई छात्र संगठनें आगे आयी थी और रोष जताते हुए कॉलेज प्रबंधन के विरोध में प्रदर्शन किया था. घटिया गुणवत्ता के खिलाफ हो रहे प्रदर्शन पर यूजीसी ने संज्ञान लिया और हॉस्टल के भवन को पुन: मरम्मत कराने का निर्देश दिया. इसके बाद मरम्मत का कार्य प्रारंभ हुआ, साथ ही हॉस्टल के चारों ओर चहारदीवारी भी बनाने की योजना बनायी गयी. अब लगभग निर्माण व मरम्मत कार्य पूरा कर लिया गया है और जल्द ही हॉस्टल को चालू कराने की दिशा में काम किया जा रहा है.

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