जिले में बढ़ रहे खिलाड़ी, घट रहे मैदान, नहीं मिल रहा मुकाम
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 26 Jul 2019 8:09 AM
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औरंगाबाद कार्यालय : बच्चों में खेल के प्रति रुचि बढ़ती जा रही है. अभिभावक भी बच्चों को इतनी स्वतंत्रता दे रखे हैं कि बच्चे मनचाहे गेम खेल सकते हैं. पर, खेल मैदान के अभाव में खिलाड़ियों को अच्छा माहौल नहीं मिल रहा है. शहर के करमा मोड़ स्थित गेट स्कूल खेल मैदान पर विद्यालय से […]
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औरंगाबाद कार्यालय : बच्चों में खेल के प्रति रुचि बढ़ती जा रही है. अभिभावक भी बच्चों को इतनी स्वतंत्रता दे रखे हैं कि बच्चे मनचाहे गेम खेल सकते हैं. पर, खेल मैदान के अभाव में खिलाड़ियों को अच्छा माहौल नहीं मिल रहा है.
शहर के करमा मोड़ स्थित गेट स्कूल खेल मैदान पर विद्यालय से अधिक प्रशासन की चलती है, तो गांधी मैदान भी प्रशासन के ही अधिकार में है. सच्चिदानंद सिन्हा कॉलेज का खेल मैदान भी काफी बड़ा है, जिस पर सिर्फ और सिर्फ कॉलेज प्रशासन का वश चलता है. टाउन इंटर कॉलेज खेल मैदान खेलने के लायक ही नहीं है.
ऐसे में गेट स्कूल खेल मैदान व गांधी मैदान ही खिलाड़ियों के काम आ रहा है. शहर में करीब 50 से अधिक क्रिकेट टीमें हैं, जिसके खिलाड़ी जगह के अभाव में मुहल्लों व गलियों में ही प्रैक्टिस कर लिया करते हैं. पर, जब कोई टूर्नामेंट या बड़ी प्रतियोगिता आयोजित होती है, तो उसमें शिरकत करने के लिए इन्हें बड़े खेल मैदान में अभ्यास की आवश्यकता पड़ती है.
ऐसे में इन खिलाड़ियों को गांधी मैदान व गेट स्कूल के खेल मैदान में अभ्यास करते एक साथ देखा जा सकता है. लेकिन, इनके सामने बड़ी परेशानी यह है कि एक साथ कई टीमों के खिलाड़ियों को एक ही मैदान में अभ्यास करना पड़ता है, जिस कारण पूरा जगह नहीं मिल पाता है. नतीजा यह होता है कि नेशनल खेलना तो दूर स्टेट लेबल तक पहुंचने के भी हकदार नहीं बन पाते हैं.
एक में भरा पानी, तो दूसरे का हो रहा जीर्णोद्धार
शहर के दो प्रमुख मैदान गेट स्कूल व गांधी मैदान की स्थिति अभी बदतर है. गेट स्कूल मैदान में बारिश का पानी भरा पड़ा है. पानी की निकासी नहीं होने की वजह से खिलाड़ी परेशान है.
इसके पीछे कारण है मैदान में भरावट नहीं किया जाना, यानी मैदान में गड्ढे बने पड़े है. दूसरी तरफ गांधी मैदान के जीर्णोद्धार का काम चल रहा है. दो करोड़ से अधिक की लागत से जीर्णोद्धार कराया जा रहा है. यह काम वर्ष 2018 में ही पूरा कर लिया जाना था, पर वर्तमान में जो स्थिति है उससे 2020 का लक्ष्य भी असंभव ही दिख रहा है.
प्रशासनिक आयोजनों के लिए प्रसिद्ध हैं दोनों मैदान
गेट स्कूल व गांधी मैदान प्रशासनिक आयोजनों व मेलों के लिए प्रसिद्ध है. खिलाड़ी लाख मैदान को ठीक करने का प्रयास कर लें पर वह ज्यादा समय तक ठीक नहीं रख पाते. गेट स्कूल में अक्सर सरकारी आयोजन होते रहते है. साथ ही चुनाव के समय यह मैदान गाड़ियों का पार्किंग स्टैंड होता है. शहर का गांधी मैदान सालोभर खुला शौचालय बना रहता है. जब भी कोई प्रशासनिक आयोजन जैसे 15 अगस्त व 26 जनवरी सर पर होता है, तो इसे साफ कराया जाता है. बाकी दिनों में यह मैदान गंदगी से पटा रहता है.
परिजन लगा रहे इस तरह का आरोप
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