औरंगाबाद : सुप्रीम कोर्ट का फैसला आते ही लहंग गांव में पसरा सन्नाटा

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 10 Jul 2018 1:01 AM

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गैंगरेप के आरोपित की सजा में नहीं बरती गयी रियायत दोषी अक्षय ठाकुर ने नहीं की थी पुनर्विचार याचिका दायर परिजनों व गांववालों को उम्रकैद की सजा की थी उम्मीद औरंगाबाद/नवीनगर : देश के बहुचर्चित निर्भया गैंग रेप कांड में सुप्रीम कोर्ट ने औरंगाबाद जिले के टंडवा थाना क्षेत्र के करमा लहंग गांव के अक्षय […]

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गैंगरेप के आरोपित की सजा में नहीं बरती गयी रियायत
दोषी अक्षय ठाकुर ने नहीं की थी पुनर्विचार याचिका दायर
परिजनों व गांववालों को उम्रकैद की सजा की थी उम्मीद
औरंगाबाद/नवीनगर : देश के बहुचर्चित निर्भया गैंग रेप कांड में सुप्रीम कोर्ट ने औरंगाबाद जिले के टंडवा थाना क्षेत्र के करमा लहंग गांव के अक्षय ठाकुर की फांसी की सजा बरकरार रखी है. वैसे सोमवार की सुबह से ही लहंग करमा गांव से लेकर नवीनगर व जिला मुख्यालय में इसकी चर्चा आम थी.
वैसे पूरा जिला सुनवाई पर टक-टकी लगाये बैठा था. हालांकि परिजनों को कुछ उम्मीद थी,पर सुनवाई के बाद फिर मातम का माहौल कायम हो गया. इस मामले में न तो परिजन कुछ बोलने को तैयार हुए व न गांव के लोग. बीते छह साल से लगातार इस गांव ने निर्भया कांड को लेकर जिल्लत महसूस की है. वैसे भी औरंगाबाद के लोगों में निर्भया के दोषियों के प्रति मन में थोड़ी भी जगह नहीं है.
गौरतलब है कि गैंगरेप के चार दोषियो में एकमात्र अक्षय ठाकुर ही ऐसा आरोपित है,जो अपील किये जाने से भी पीछे हट गया था. इधर लहंग करमा गांव में सोमवार को एक तरह से सन्नाटा पसरा था. लोगों की कुछ उम्मीदें भी थीं,पर वे सिर्फ दबी जुबान से खुद तक ही समेटने में लगे हुए थे. अक्षय के पिता सरयु सिंह ,पत्नी पुनिता देवी का भी हाल एक जैसा था.
आम दिनों की तरह उस घर में दहशत का माहौल था. शायद परिजनों को उम्मीद थी कि फांसी की सजा उम्रकैद में बदल जाये, पर ऐसा कुछ नहीं हुआ.
पत्नी पुनिता अपने मासूम पुत्र प्रियांसु को अब सहारा मान चुकी है. हालांकि उसकी उम्मीदें जिंदा थीं और न्यायालय पर भरोसा था. वैसे भी पत्नी ही पति का दर्द समझ सकती है. पुत्र के वियोग में पिता टूट चुके हैं और उन्हें भी अपने पोता का ही सहारा दिख रहा है.
गांव वालों की मानें तो अक्षय कोई बुरा लड़का नहीं था. कैसे निर्भया कांड में वह शामिल हो गया. यह ग्रामीणों की समझ से परे है.अपने तीन भाइयो में अक्षय छोटा था. गौरतलब है कि 16 दिसंबर 2012 को दिल्ली के बसंत बिहार इलाके में निर्भया गैंगरेप की घटना हुई थी और उसमें औरंगाबाद के लहंग करमा गांव का अक्षय ठाकुर भी शामिल था.
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