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मधुश्रवां को नहीं मिला पर्यटन स्थल का दर्जा

Updated at : 02 Nov 2015 6:49 AM (IST)
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मधुश्रवां को नहीं मिला पर्यटन स्थल का दर्जा

अरवल (ग्रामीण) : ऐतिहासिक एवं पौराणिक स्थल मधुश्रवां को पर्यटक स्थल बनाने की घोषणा मात्र घोषणा में ही सिमट कर रह गयी है. इसके लिए आधा दर्जन प्रतिनिधियों ने अपने-अपने कार्यकाल में सार्वजनिक सभा के दौरान घोषणा की थी. इस पौरानिक स्थल का जिक्र धर्मग्रंथों में भी वर्णित है. बिहार में लगनेवाला मलमास मेला राजगीर […]

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अरवल (ग्रामीण) : ऐतिहासिक एवं पौराणिक स्थल मधुश्रवां को पर्यटक स्थल बनाने की घोषणा मात्र घोषणा में ही सिमट कर रह गयी है. इसके लिए आधा दर्जन प्रतिनिधियों ने अपने-अपने कार्यकाल में सार्वजनिक सभा के दौरान घोषणा की थी. इस पौरानिक स्थल का जिक्र धर्मग्रंथों में भी वर्णित है. बिहार में लगनेवाला मलमास मेला राजगीर के बाद मधुश्रवां में ही लगता है.

मालूम हो कि जिले में अवस्थित मधुश्रवां को पर्यटन स्थल बनाने के लिए स्थानिय लोगों द्वारा कई बार आवाज उठायी गयी. आम जनों की भावना का कद्र करते हुए जनप्रतिनिधियों ने भी पर्यटन स्थल बनाने के लिए घोषणा की है.

वहीं, इस जिले के तत्कालीन प्रतिनिधि डाॅ अखिलेश प्रसाद सिंह जो बिहार सरकार एवं केंद्र सरकर में मंत्री थे, ने भी इस स्थल को पर्यटक स्थल बनाने के लिए घोषणा की थी. इसके अलावा विधान पार्षद डॉ रामकिशोर शर्मा ने भी इसके लिए आश्वासन दिया था. 2010 की चुनाव सभा के दौरान मधुश्रवां के मैदान में मुख्यमंत्री के समक्ष लोगों ने आवाज उठायी थी,

लेकिन आचार संहिता का हवाला देकर इस सवाल पर कुछ कहने में असमर्थता जतायी गयी थी, लेकिन आज तक इस दिशा में कोई कारगर कदम नहीं उठाया गया है. बिहार में लगने वाले मलमास मेले में राजगीर के अलावा मधुश्रवां में भी पौराणिक काल से लगते आ रहा है. इस दौरान बिहार के कोने-कोने से श्रद्धालु भक्त आकर बाबा मधेश्वर नाथ पर जलाभिषेक कर पूजा-अर्चना करते हैं. जन श्रूति के अनुसार महर्षि च्वन ऋर्षि का जन्म स्थल भी नहीं है.

इनके द्वारा अपने निर्वासन काल में अनेक प्रकार की जन उपयोगी औषधि की खोज की गयी. इसी खोज के तहत आज भी हम लोग च्यवनप्राश का उपयोग करते हैं. ऐसे में इस स्थल के बारे में अनेक प्रकार की ऐतिहासिक बातें ग्रंथों के अनुसार सार्वजनिक हैं. त्रेता युग में अवतरित भगवान राम ने भी बाबा मधेश्वर नाथ की पूजा – अर्चना की थी. यहां का मंदिर स्वयं विश्वकर्मा भगवान ने रातोंरात निर्माण किया था. एेसा जानकारों के द्वारा बताया जाता है. इन तमाम उपलब्धियों के आधार पर अरवल के लोगों ने मधुश्रवां को पर्यटक स्थल बनाने की मांग की है. लोग आज भी सरकार के प्रति उम्मीद लगाये बैठे हैं कि मधुश्रवां को पर्यटक स्थल का दर्जा प्राप्त होगा.

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