अरवल : नये समीकरण में सभी दल मौके की तलाश में
Updated at : 01 Sep 2015 12:27 AM (IST)
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अरवल अरवल विधानसभा क्षेत्र से 2010 के चुनाव में भाजपा के चितरंजन शर्मा जीते थे. उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी भाकपा माले के महानंद प्रसाद को हराया था. इसलिए विधानसभा चुनाव में भाजपा की सीटिंग सीट होने के कारण एनडीए से चितरंजन शर्मा ही संभावित प्रत्याशी माने जा रहे हैं. महागंठबंधन की ओर से इस सीट […]
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अरवल
अरवल विधानसभा क्षेत्र से 2010 के चुनाव में भाजपा के चितरंजन शर्मा जीते थे. उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी भाकपा माले के महानंद प्रसाद को हराया था. इसलिए विधानसभा चुनाव में भाजपा की सीटिंग सीट होने के कारण एनडीए से चितरंजन शर्मा ही संभावित प्रत्याशी माने जा रहे हैं.
महागंठबंधन की ओर से इस सीट पर कौन चुनाव लड़ेगा, यह तय नहीं है, लेकिन कयास यही लगाये जा रहे हैं कि क्षेत्र के समीकरण के लिहाज से यहां राजद का उम्मीदवार होगा. माले भी चुनाव की तैयारी में जुट गया है. वर्ष 2010 के विधानसभा चुनाव में माले दूसरे नंबर पर था. उसे 20 फीसदी से ज्यादा मत मिले थे.
लोकसभा चुनाव में दूसरे नंबर पर राजद था. पिछड़ा जिला अरवल कई समस्याओं से घिरा है. सड़क की स्थिति में तो सुधार हुआ है. लेकिन, कलेर प्रखंड के अधिकतर गांवों में बिजली की समस्या है. मुख्य चुनावी मुद्दा बिजली ही रहेगी. इस मुद्दे पर मतदाता दलों से जवाब भी मांगने की तैयारी में हैं.
अब तक
इस सीट पर एनडीए का कई बार कब्जा रहा है. राजद व लोजपा भी इस सीट से जीती है. भाकपा-माले भी दमदार उपस्थिति दर्ज कराती रही है.
इन दिनों
स्थानीय विधायक गांव-गांव में बिजली पहुंचाने में जुटे हुए हैं. वहीं माले तथा जदयू द्वारा भी गांव-गांव में जनसंपर्क अभियान चलाया जा रहा है.
प्रमुख मुद्दे
– गांवों में बिजली की व्यवस्था
– रेलवे लाईन का निर्माण
– नक्सलियों को मुख्यधारा से जोड़ना
– सिंचाई की व्यवस्था
– उद्योग-धंधों की स्थापना
– क्षेत्र में सामाजिक शांति की स्थापना
– एनएच की मरम्मत
कुर्था
सूखे पर राजनीति की फसल
2010 के विधानसभा चुनाव में सत्यदेव कुशवाहा ने जदयू के टिकट पर जीत हासिल की थी. इस बार चुनाव में राजद-जदयू महागंठबंधन फिर से उन्हें बतौर उम्मीदवार मैदान में उतार सकता है.
विधानसभा में राजद को 30 फीसदी और लोस में 35 फीसदी वोट मिले थे. इस तर्क के आधार पर पार्टी के कई नेता इस सीट पर अपना दावा मजबूत मान रहे हैं. इधर एनडीए की ओर से रालोसपा क्षेत्र के समीकरण को अपने पक्ष में बताते हुए अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराने की तैयारी में है.
भाजपा की तरफ से यहां कोई उम्मीदवार प्रत्यक्ष रूप से सामने नहीं आया है. महागंठबंधन की ओर से चुनावी तैयारियों के तहत गांवों में प्रचार-प्रसार हो रहा है. कुर्था में बिजली और सिंचाई बड़ी समस्या है. करपी, शहर तेलपा, सोनभद्र, वंशी, मंझियावां, सेनारी, लारी, सचई, ओड़बिगहा, शेरपुर और उतरामा आदि गांवों में नियमित बिजली नहीं मिलने से किसान खफा हैं. यह राजद के राष्ट्रीय महासचिव मुन्द्रिका सिंह यादव की भी सीट रही है.
अब तक
यह सीट कई बार राजद के कब्जे में रहा है, लेकिन पिछले दो चुनाव से जद यू जीता. एनडीए में रालोसपा की दावेदारी है.
इन दिनों
उपेंद्र कुशवाहा ने यहां ध्यान केंद्रित किया है. जद यू व राजद ने स्वाभिमान रैली में शिरकत की. भाजपा का भी जनसंपर्क चल रहा.
प्रमुख मुद्दे
– कुर्था को अनुमंडल का दर्जा दिलाना
– रेफरल अस्पताल की स्थापना
– पुराने नक्शे पर हमीद नगर पुनपुन परियोजना का निर्माण
– शुद्ध पेयजल की व्यवस्था
– गांवों में बिजली की व्यवस्था
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